इंदौर: मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के एरोड्रम थाने में शुक्रवार रात को उस समय भारी तनाव की स्थिति बन गई, जब भाजपा विधायक गोलू शुक्ला के समर्थकों और पुलिसकर्मियों के बीच तीखी झड़प हो गई। मामले ने इतना तूल पकड़ा कि आधी रात को करीब 400 से अधिक कार्यकर्ताओं ने थाने का घेराव कर दिया। स्थिति को बिगड़ता देख वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मामले में दखल दिया और त्वरित कार्रवाई करते हुए एरोड्रम थाना प्रभारी (TI) समेत सात पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, क्षेत्र में रहने वाले भाजपा विधायक गोलू शुक्ला के पंडित जयदीप दुबे और उनके जीजा पंकज चौबे किसी मामले की शिकायत दर्ज कराने एरोड्रम थाने पहुंचे थे। आरोप है कि थाने के भीतर ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। बात इतनी बढ़ गई कि पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर उनके साथ मारपीट की और उन्हें थाने के अंदर घसीटा। इस पूरी घटना का एक सीसीटीवी (CCTV) फुटेज भी सामने आया है, जिसमें पुलिसकर्मी अभद्रता करते हुए दिखाई दे रहे हैं।
आधी रात को थाने का घेराव और उग्र नारेबाजी
जैसे ही विधायक गोलू शुक्ला के पंडित और कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की खबर बाहर निकली, भाजपा कार्यकर्ताओं में आक्रोश फैल गया। देखते ही देखते कुछ ही समय में विधायक गोलू शुक्ला के सैकड़ों समर्थक और पदाधिकारी एरोड्रम थाने पर इकट्ठा हो गए। कार्यकर्ताओं ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उग्र नारेबाजी शुरू कर दी और थाने को चारों तरफ से घेर लिया। हंगामे की सूचना मिलते ही खुद विधायक गोलू शुक्ला भी मौके पर पहुंचे और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग पर अड़ गए।
वरिष्ठ अधिकारियों की एंट्री और निलंबन की कार्रवाई
थाने पर बढ़ते तनाव और सैकड़ों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए एडिशनल डीसीपी सुमित केरकट्टा सहित भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा। पुलिस के आला अधिकारियों ने आक्रोशित कार्यकर्ताओं और विधायक को समझाने का प्रयास किया। शुरुआती जांच और सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद, पुलिसकर्मियों की गलती पाए जाने पर वरिष्ठ अधिकारियों ने बड़ा एक्शन लिया।
प्रशासन ने कानून व्यवस्था और निष्पक्ष जांच का हवाला देते हुए एरोड्रम थाना प्रभारी (TI) और उनके साथ मौजूद 6 अन्य पुलिसकर्मियों (कुल 7 पुलिसकर्मियों) को तुरंत निलंबित कर दिया।
वर्तमान स्थिति
वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दोषी पुलिसकर्मियों पर निलंबन की त्वरित कार्रवाई और मामले की निष्पक्ष जांच के आश्वासन के बाद भाजपा कार्यकर्ता शांत हुए और देर रात हंगामा खत्म हुआ। फिलहाल पुलिस प्रशासन मामले की विस्तृत जांच कर रहा है ताकि घटना के वास्तविक कारणों का पूरी तरह पता लगाया जा सके।
