भोपाल।
मध्यप्रदेश सरकार ने प्रदेश भर में रासायनिक खाद (यूरिया, डीएपी और एनपीके) की बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। कृषि विभाग ने यह फैसला सोसायटियों और निजी विक्रेताओं के पास मौजूद खाद के फिजिकल स्टॉक और पीओएस (POS) मशीन के रिकॉर्ड का मिलान (Stock Verification) करने के लिए लिया है। इस अचानक लगे बैन से राज्य के करीब 82 लाख किसानों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि रबी/खरीफ की बोवनी और फसलों में खाद डालने का यही मुख्य समय है।
किसानों को सता रहा कालाबाजारी और किल्लत का डर
सरकार के इस फैसले से जमीनी स्तर पर हड़कंप मच गया है। किसानों को डर है कि बिक्री बंद होने से बाजार में खाद की कृत्रिम किल्लत (Artificial Scarcity) पैदा होगी, जिससे कालाबाजारी करने वालों को बढ़ावा मिलेगा। कई जिलों में किसान सोसायटियों और दुकानों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
विभाग की सफाई: गड़बड़ी रोकने के लिए कदम
कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह एक नियमित प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य खाद की जमाखोरी और अवैध बिक्री पर लगाम लगाना है।
पीओएस मिलान: पीओएस मशीन में दर्ज आंकड़ों और गोदामों में रखे वास्तविक स्टॉक का सत्यापन किया जा रहा है।
पारदर्शिता: सत्यापन पूरा होते ही जिन सोसायटियों और दुकानों का स्टॉक सही पाया जाएगा, उन्हें तुरंत बिक्री की अनुमति दे दी जाएगी।
विपक्ष का हमला और किसानों की मांग
इस फैसले के बाद किसान संगठनों और विपक्ष ने सरकार को घेरा है। उनका तर्क है कि बिना किसी पूर्व सूचना के बिक्री रोकने से किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। किसानों ने मांग की है कि स्टॉक चेकिंग की प्रक्रिया को पारदर्शी और तेज बनाया जाए, ताकि उन्हें सही दाम पर समय पर खाद मिल सके।
