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MP News: बांग्लादेश से युवतियां लाकर कश्मीर में शादी कराने वाले 2 रोहिंग्या तस्कर ग्वालियर में गिरफ्तार

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ग्वालियर:
मध्य प्रदेश की ग्वालियर जीआरपी पुलिस ने मानव तस्करी के एक बहुत बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को ध्वस्त करने में बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने स्वर्णजयंती एक्सप्रेस ट्रेन में सघन चेकिंग अभियान चलाकर दो रोहिंग्या तस्करों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह बांग्लादेश के रिफ्यूजी कैंपों से भोली-भाली लड़कियों को बहला-फुसलाकर भारत लाता था और फिर मोटी रकम के बदले जम्मू-कश्मीर में उनकी जबरन शादी करा देता था। पुलिस ने इस कार्रवाई के दौरान गिरोह के चंगुल से 4 रोहिंग्या युवतियों को सुरक्षित मुक्त कराया है, जिनमें दो नाबालिग हैं।

खुफिया इनपुट पर ट्रेन में बिछाया जाल

जीआरपी को खुफिया सूत्रों से सूचना मिली थी कि स्वर्णजयंती एक्सप्रेस में कुछ संदिग्ध विदेशी नागरिक सफर कर रहे हैं। इस इनपुट पर ग्वालियर जीआरपी थाना प्रभारी दीपशिखा तोमर के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। ट्रेन के ग्वालियर स्टेशन पहुंचते ही पुलिस टीम ने जनरल कोच में चेकिंग शुरू की। हुलिए और संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर पुलिस ने एक युवक को हिरासत में लिया, जिसकी पहचान मुबीन (25 वर्ष) के रूप में हुई। मुबीन मूल रूप से म्यांमार का निवासी है और पिछले चार सालों से हैदराबाद में रिफ्यूजी के तौर पर रह रहा था। उसके पास से संयुक्त राष्ट्र (UN) का शरणार्थी कार्ड भी मिला है।

अलीगढ़ में दबिश और लड़कियों की बरामदगी

मुबीन से जब पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने मानव तस्करी के इस पूरे काले खेल का राज उगल दिया। उसने बताया कि उसका एक और साथी मोहम्मद हसन (35 वर्ष) उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में मौजूद है और उसी के पास लड़कियां रखी गई हैं। सूचना मिलते ही जीआरपी की टीम ने तुरंत अलीगढ़ में दबिश दी और दूसरे मुख्य आरोपी मोहम्मद हसन को धर दबोचा। पुलिस ने हसन के पास से ही चारों पीड़ित युवतियों को बरामद किया।

‘डंकी रूट’ के जरिए अवैध घुसपैठ

पूछताछ में तस्करों ने कुबूल किया कि इन युवतियों को बांग्लादेश के कुतुपालोंग (Kutupalong) शरणार्थी शिविर से लाया गया था। भारत की सीमा में प्रवेश कराने के लिए तस्करों ने खतरनाक ‘डंकी रूट’ का इस्तेमाल किया। वे सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बचते हुए दुर्गम पहाड़ियों और नदियों के रास्ते अवैध रूप से भारतीय सीमा के अंदर दाखिल हुए थे।

गूगल ट्रांसलेटर से खुले राज

बरामद की गई लड़कियां केवल रोहिंग्या भाषा ही बोल और समझ पा रही थीं। भाषा की इस बड़ी दीवार को तोड़ने के लिए जीआरपी पुलिस ने ‘गूगल ट्रांसलेटर’ और एक स्थानीय द्विभाषी (ट्रांसलेटर) की मदद ली। इसके बाद युवतियों ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि उन्हें अच्छी जिंदगी और शादियों का झांसा देकर जम्मू और श्रीनगर ले जाया जा रहा था, जहां तस्करों ने भारी रकम के बदले उनकी शादियां तय कर रखी थीं।

बड़े नेक्सस की जांच में जुटी एजेंसियां

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह केवल एक अकेला मामला नहीं है बल्कि इसके पीछे मानव तस्करी का एक बहुत बड़ा और सुव्यवस्थित सिंडिकेट काम कर रहा है। पुलिस ने दोनों तस्करों सहित सभी छह विदेशी नागरिकों को हिरासत में ले लिया है। उनके पास से मिले मोबाइल फोन और दस्तावेजों को खंगाला जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि देश के अन्य किन राज्यों में इस गिरोह के मददगार फैले हुए हैं। सुरक्षा और नियमानुसार, दोनों नाबालिग लड़कियों को फिलहाल बाल संरक्षण गृह भेज दिया गया है।

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