एमपी के पेट्रोल पंपों पर बड़ा फैसला: ₹2000 से ऊपर UPI पेमेंट बंद, इंदौर में 23 सितंबर को ‘No-UPI Day’
भोपाल/इंदौर (NTV TIME): मध्य प्रदेश में डिजिटल पेमेंट (Digital India) को एक बड़ा झटका लगने जा रहा है। अगर आप अपने वाहन में ₹2,000 से ज्यादा का ईंधन (पेट्रोल-डीजल) भरवाते हैं, तो अब आपको अपनी जेब में नकद (Cash) रखना बेहद जरूरी होगा। मध्य प्रदेश पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन ने नए मर्चेंट चार्ज के विरोध में 16 अक्टूबर 2026 से राज्य के सभी पेट्रोल पंपों पर ₹2,000 से अधिक के डिजिटल भुगतानों पर पूरी तरह रोक लगाने का ऐलान किया है।
इस बड़े फैसले से पहले, व्यावसायिक राजधानी इंदौर में विरोध की शुरुआत करने के लिए 23 सितंबर 2026 को ‘नो-UPI डे’ (No-UPI Day) मनाया जाएगा।
क्यों लिया गया ₹2000 से अधिक UPI पर रोक का फैसला?
एसोसिएशन के पदाधिकारियों के मुताबिक, केंद्र सरकार और बैंकों के नए नियमों के तहत ₹2,000 से अधिक के प्रत्येक UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर ₹5 का फ्लैट मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू कर दिया गया है। जब इसमें 18% जीएसटी (90 पैसे) जुड़ता है, तो पंप मालिकों को हर एक बड़े डिजिटल ट्रांजैक्शन पर ₹5.90 का सीधा अतिरिक्त नुकसान उठाना पड़ रहा है।
गणित समझिए: एक पंप पर हर महीने ₹17,400 से ज्यादा की चपत
- दैनिक मार: प्रदेश के एक औसत पेट्रोल पंप पर रोजाना ₹2,000 से अधिक के लगभग 100 से अधिक ट्रांजैक्शन होते हैं। इससे रोजाना करीब ₹590 का घाटा सीधे डीलर को हो रहा है।
- मासिक बोझ: प्रति पंप यह अतिरिक्त वित्तीय बोझ हर महीने ₹17,400 से अधिक बैठता है।
- करोड़ों का नुकसान: मध्य प्रदेश में सक्रिय सभी 4,700 पेट्रोल पंपों को मिला दिया जाए, तो डीलर्स की जेब से हर महीने करीब ₹8.17 करोड़ की राशि बैंकों के खाते में चली जाएगी।
“सीमित मार्जिन में धंधा करना हुआ नामुमकिन”
पेट्रोल पंप एसोसिएशन के वरिष्ठ पदाधिकारियों का कहना है कि पेट्रोल और डीजल पर डीलर्स का प्रॉफिट मार्जिन बेहद कम (पेट्रोल पर लगभग 0.75% और डीजल पर 0.5%) है। इस मामूली मार्जिन में उन्हें पंप कर्मचारियों की सैलरी, बिजली बिल और मेंटेनेंस जैसे भारी-भरकम खर्च निकालने होते हैं। ऐसे में बैंक और तेल कंपनियों द्वारा थोपे गए इस नए चार्ज को वहन करना पंप संचालकों के बस की बात नहीं है।
एसोसिएशन ने साफ किया है कि देश की आधिकारिक करेंसी (कैश) लेने से वे मना नहीं कर रहे हैं, जो कि गैर-कानूनी होता। लेकिन निजी या डिजिटल पेमेंट गेटवे (UPI/QR Code) का उपयोग करना या न करना उनके विवेक पर निर्भर है। इसलिए जनहित और व्यवसाय को बचाने के लिए 16 अक्टूबर से प्रदेशभर में नकद लेनदेन को ही प्राथमिकता दी जाएगी।
