MP Sugam Parivahan Seva: मध्य प्रदेश के 7 शहरों में शुरू हुई 351 बसें, कांग्रेस ने उठाए ‘खटारा’ बसों पर सवाल
भोपाल/इन्दौर: मध्य प्रदेश में करीब 21 साल के लंबे इंतजार के बाद एक बार फिर सरकारी देखरेख में लोक परिवहन व्यवस्था की वापसी हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भोपाल के भेल (BHEL) दशहरा मैदान से ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा’ का भव्य शुभारंभ किया। पहले चरण में प्रदेश के 7 प्रमुख शहरों में 351 इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसें रवाना की गई हैं। जहाँ एक तरफ सरकार इसे राज्य के सार्वजनिक परिवहन में एक क्रांतिकारी कदम बता रही है, वहीं दूसरी तरफ मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस योजना की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कांग्रेस का वार: “रंग बदला, पर हाल वही, खटारा बसों को दिखाई हरी झंडी”
योजना के शुरू होते ही मध्य प्रदेश कांग्रेस ने सोशल मीडिया और बयानों के जरिए भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार केवल इवेंट मैनेजमेंट कर रही है और नई परिवहन सेवा के नाम पर पुरानी और जर्जर हो चुकी ‘खटारा’ बसों को ही नया रंग-रोगन करके सड़क पर उतार दिया गया है। विपक्ष का कहना है कि “बसों का सिर्फ बाहरी रंग बदला है, लेकिन यात्रियों की सुरक्षा और सुविधाओं का हाल वही पुराना है।” कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि यात्रियों के सफर को सुरक्षित बनाने के लिए केवल कागजी दावों के बजाय बसों की वास्तविक फिटनेस और गुणवत्ता पर ध्यान दिया जाए।
क्या है ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा’ और सरकार का दावा?
सरकारी अधिकारियों और भाजपा नेतृत्व के अनुसार, इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत करना है। यह बस सेवा सरकारी है, लेकिन इसका संचालन मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एवं अधोसंरचना लिमिटेड (MPYPIL) के तहत पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर निजी ऑपरेटरों द्वारा किया जाएगा। दावों के मुताबिक, इन बसों को आधुनिक सुरक्षा मानकों से लैस किया गया है, जिसमें GPS/लाइव ट्रैकिंग, CCTV कैमरे और पैनिक बटन शामिल हैं। सरकार ने साल 2031 तक प्रदेश भर में 15,000 से अधिक आधुनिक बसों का नेटवर्क तैयार करने का लक्ष्य रखा है।
पहले चरण में किस शहर को मिलीं कितनी बसें?
पहले चरण के तहत प्रदेश के 7 शहरों में कुल 351 बसें (120 इंटरसिटी और 231 इंट्रासिटी) चलाई जा रही हैं:
- इंदौर: 145 बसें
- भोपाल: 106 बसें
- जबलपुर: 67 बसें
- रीवा: 18 बसें
- देवास: 10 बसें
- कटनी: 03 बसें
- भिंड: 02 बसें
इन कुल बसों में पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए 180 इलेक्ट्रिक बसें भी शामिल की गई हैं।
