मध्य प्रदेश में यूसीसी के खिलाफ मुस्लिम समाज का बढ़ा विरोध: जमीयत और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने खोला मोर्चा
भोपाल / गौरव जोशी मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर राज्य भर में मुस्लिम समुदाय और प्रमुख धार्मिक-सामाजिक संगठनों का विरोध तेज हो गया है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद (मध्य प्रदेश) और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) से जुड़े प्रतिनिधियों ने राज्य में यूसीसी के क्रियान्वयन को संविधान के अनुच्छेद 25 द्वारा प्रदत्त धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन करार देते हुए प्रदेशव्यापी रणनीति तैयार की है।
मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर राज्य भर में मुस्लिम समुदाय और प्रमुख धार्मिक-सामाजिक संगठनों का विरोध तेज हो गया है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद (मध्य प्रदेश) और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) से जुड़े प्रतिनिधियों ने राज्य में यूसीसी के क्रियान्वयन को संविधान के अनुच्छेद 25 द्वारा प्रदत्त धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन करार देते हुए प्रदेशव्यापी रणनीति तैयार की है।
विरोध प्रदर्शन और मुख्य रणनीतियाँ
10 दिवसीय ज्ञापन और हस्ताक्षर अभियान: जमीयत उलेमा मध्य प्रदेश की भोपाल में आयोजित बैठक में तय किया गया कि प्रदेश के सभी जिलों और तहसीलों (जैसे इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, सागर आदि) में जिला कलेक्टर, एसडीएम और उच्च अधिकारियों को ज्ञापन सौंपे जाएंगे। साथ ही जन-जागरूकता के लिए हस्ताक्षर अभियान भी चलाया जाएगा।
महिला प्रतिनिधियों की अग्रणी भूमिका: ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य और स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा घोषित कार्यक्रम के तहत हर जिले में राष्ट्रपति और राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपने के लिए 21 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल तैयार किया गया है। इसमें महिलाओं की प्रमुख भागीदारी (16 से 20 महिलाएं और 5 पुरुष) सुनिश्चित की गई है।
कानूनी चुनौती की तैयारी: मुस्लिम संगठनों ने स्पष्ट किया है कि वरिष्ठ वकीलों, सेवानिवृत्त न्यायाधीशों और विधि विशेषज्ञों से परामर्श कर यूसीसी को उच्च न्यायालय (High Court) और सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) में चुनौती दी जाएगी।
धार्मिक व संवैधानिक तर्क
धार्मिक स्वतंत्रता पर कुठाराघात: जमीयत उलेमा मध्य प्रदेश के अध्यक्ष मुफ्ती मोहम्मद अहमद खान और शहर काजी मुश्ताक अली नदवी का कहना है कि यह कानून मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरिया) में सीधा हस्तक्षेप है। विवाह, तलाक, और वरासत जैसे मामलों में एक समान कानून लागू करना इस्लाम की मूल व्यवस्था के खिलाफ है।
विविधता का संरक्षण: विरोध कर रहे उलेमा और नागरिक निकायों का मानना है कि भारत की ताकत उसकी विविधता में है। यूसीसी से न केवल मुस्लिम समुदाय, बल्कि प्रदेश के बड़े आदिवासी वर्ग (Tribal Community) और अन्य अल्पसंख्यकों के पारंपरिक अधिकार भी प्रभावित होंगे।
मुस्लिम संगठनों का कहना है कि वे संविधान के दायरे में रहकर लोकतांत्रिक व कानूनी तरीकों से अपनी बात सरकार और अदालतों के समक्ष रखेंगे।
