महेश राठौड़
चेक बाउंस मामले में मुलताई कोर्ट का बड़ा फैसला, दोषी पर 5.39 लाख रुपए का प्रतिकर का आदेश
मुलताई। चेक बाउंस के करीब तीन साल पुराने मामले में मुलताई की द्वितीय अपर सत्र न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी विशाल चिल्हाटे को दोषी ठहराया है। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश संजय कुमार भलावी की अदालत ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई एक वर्ष के सश्रम कारावास की सजा में संशोधन करते हुए आरोपी को न्यायालय उठने तक की सजा सुनाई और 5,39,566 रुपए प्रतिकर के रूप में अदा करने का आदेश दिया। यह मामला परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 से संबंधित है।
मामले में अपीलार्थी की ओर से अधिवक्ता सी.एस. चंदेल तथा प्रत्यर्थी की ओर से अधिवक्ता विशाल कोडले ने पैरवी की। मामला व्यापारिक लेनदेन से जुड़ा है। मुलताई निवासी विशाल चिल्हाटे और बी.एस. ट्रेडर्स के प्रोपराइटर अभिलाष कापसे के बीच मित्रतापूर्ण एवं व्यापारिक संबंध थे। मामले के अनुसार, व्यापार के सिलसिले में विशाल ने अभिलाष से अलग-अलग समय पर कुल 8,16,420 रुपए लिए थे। इसमें से 4 लाख रुपए बैंक ट्रांसफर के माध्यम से वापस किए गए, जबकि शेष राशि की अदायगी के लिए 4,14,420 रुपए का केनरा बैंक का चेक दिया गया था।
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अभिलाष कापसे ने चेक भुगतान के लिए बैंक में प्रस्तुत किया, लेकिन खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण 4 अक्टूबर 2021 को चेक अनादरित हो गया। इसके बाद परिवादी की ओर से आरोपी को अधिवक्ता के माध्यम से कानूनी नोटिस भेजा गया। निर्धारित अवधि में राशि का भुगतान नहीं होने पर मामला न्यायालय पहुंचा।
इस मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, मुलताई ने 12 अप्रैल 2024 को विशाल चिल्हाटे को दोषी ठहराते हुए एक वर्ष के सश्रम कारावास और 5.20 लाख रुपए प्रतिकर की सजा सुनाई थी। इस फैसले के विरुद्ध आरोपी ने सत्र न्यायालय में अपील दायर की। अपील में आरोपी की ओर से चेक पर किए गए हस्ताक्षर का दुरुपयोग किए जाने का तर्क रखा गया।
अपील की सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों का परीक्षण करने के बाद द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश संजय कुमार भलावी ने आरोपी के हस्ताक्षर वाले चेक और उससे संबंधित देयता को लेकर निचली अदालत के निष्कर्षों को बरकरार रखा। अदालत ने माना कि आरोपी अपनी ओर से देयता से संबंधित बचाव को प्रमाणित करने में सफल नहीं रहा।
न्यायालय ने सजा में संशोधन करते हुए आरोपी को 5,39,566 रुपए प्रतिकर के रूप में अदा करने का आदेश दिया। यह राशि मूल चेक राशि के साथ ब्याज, मानसिक वेदना और न्यायालयीन व्यय को ध्यान में रखते हुए निर्धारित की गई है। आरोपी को आदेश की तारीख से 20 दिनों के भीतर राशि जमा करनी होगी। निर्धारित अवधि में राशि जमा नहीं करने पर उसे तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
अभिलाष कापसे ने चेक भुगतान के लिए बैंक में प्रस्तुत किया, लेकिन खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण 4 अक्टूबर 2021 को चेक अनादरित हो गया। इसके बाद परिवादी की ओर से आरोपी को अधिवक्ता के माध्यम से कानूनी नोटिस भेजा गया। निर्धारित अवधि में राशि का भुगतान नहीं होने पर मामला न्यायालय पहुंचा।
इस मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, मुलताई ने 12 अप्रैल 2024 को विशाल चिल्हाटे को दोषी ठहराते हुए एक वर्ष के सश्रम कारावास और 5.20 लाख रुपए प्रतिकर की सजा सुनाई थी। इस फैसले के विरुद्ध आरोपी ने सत्र न्यायालय में अपील दायर की। अपील में आरोपी की ओर से चेक पर किए गए हस्ताक्षर का दुरुपयोग किए जाने का तर्क रखा गया।
अपील की सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों का परीक्षण करने के बाद द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश संजय कुमार भलावी ने आरोपी के हस्ताक्षर वाले चेक और उससे संबंधित देयता को लेकर निचली अदालत के निष्कर्षों को बरकरार रखा। अदालत ने माना कि आरोपी अपनी ओर से देयता से संबंधित बचाव को प्रमाणित करने में सफल नहीं रहा।
न्यायालय ने सजा में संशोधन करते हुए आरोपी को 5,39,566 रुपए प्रतिकर के रूप में अदा करने का आदेश दिया। यह राशि मूल चेक राशि के साथ ब्याज, मानसिक वेदना और न्यायालयीन व्यय को ध्यान में रखते हुए निर्धारित की गई है। आरोपी को आदेश की तारीख से 20 दिनों के भीतर राशि जमा करनी होगी। निर्धारित अवधि में राशि जमा नहीं करने पर उसे तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
