2 सितंबर विश्व नारियल दिवस पर विशेष
श्रीफल ही नहीं पौष्टिकता एवं चमत्कारी गुणों से भरपूर भी है– नारियल
नारियल का उपयोग प्राचीन काल से ही होता आया है।हमारे धर्म ग्रंथों में उल्लेखित है, कि आराध्य देवी-देवताओं को हम मनोवांछित फल प्राप्त होने की आशा से नारियल चढ़ाते है। नारियल साबुत चढ़ाने व किन्ही स्थानों पर नारियल वदारकर( फोड़कर )भी देवी- देवताओं को चढ़ाया जाता है।
नारियल भगवान शिव का परम प्रिय फल है, और इसमें बनी तीन आखों की आकृति को त्रिनेत्र का प्रतीक माना जाता है। नारियल में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास माना गया है। यही कारण है कि सम्मान के प्रतीक के रूप एवं आम जनता को इसके महत्व के प्रति जागरूक करने के लिए 2 सितम्बर को विश्व नारियल दिवस के रुप में मनाया जा रहा है। इस दिवस को हमें यह समझना होगा, कि विश्वामित्र ऋषि की श्रृष्टि का फल है। इसकी विस्तृत कथा पुराणों में आती है।
हिन्दू धर्म के शास्त्रों के अनुसार मांगलिक कार्य में नारियल को अग्रणी स्थान प्राप्त है। जिस प्रकार देवताओं में गणेश सबसे पहले पूजे जाते है, उसी प्रकार फलों में नारियल का स्थान है। – अंतः इसका एक नाम “श्रीफल ” है। नारियल सिर्फ एक फल ही नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति रसोई, सेहत और दैनिक जीवन में अटूट हिस्सा भी बना हुआ है।
इस फल में लक्ष्मी और देवताओं का वास भी माना जाता है, क्योंकि किसी भी नए कार्य गृह प्रवेश ,यज्ञ, विवाह या कलश स्थापना में नारियल का उपयोग करके नकारात्मकता को दूर किया जाता है । सुख समृद्धि के आगमन की प्रार्थना की जाती है।
नारियल कई रूपों में प्राप्त होता है। केवल पानी युक्त नारियल, थोड़ी मलाई युक्त नारियल, मोटी मलाई और थोड़ा पानी, और पानी रहित सूखा गोला नारियल।
कच्चे नारियल का पानी सेहत के लिए फायदेमंद है। नारियल को खरीदने के बाद इसके पानी को पांच-सात दिन के अंदर नारियल की परत खोलते ही पी लेना चाहिए। हरे नारियल पानी में प्रचुर मात्रा में इलेक्ट्रोलाइट मौजूद होता है। श्रनारियल पानी में मौजूद पोषक तत्त्वों में (प्रति 100 मिलीलीटर में) 93.8 ग्राम जल, 1.4 ग्राम प्रोटीन, 0.1 ग्राम वसा, 0 ग्राम कोलेस्ट्रॉल, 4.4 ग्राम कार्बोहाइडेटा, 250 मिलीग्राम पोटेशियम, 105 मिलीग्राम सोडियम, 24 मिलीग्राम कैल्शियम, 25 मिलीग्राम मैग्नीशियम ,20 मिलीग्राम फास्फोरस पाया जाता है। यह पौष्टिक तत्वों” की भरपूर है।
नारियल में समाहित विशिष्ट गुणों की वजह से इसका महत्व कभी भी खत्म नहीं हो सकता। इसमे सभी आवश्यक खनिज लवण पाए जाते है। खनिज लवणों के साथ ही विटामिन ए-बी।,
बी-2, बी-3 कथा ई प्रचुरता से मिलता है।
नारियल के पानी के अनेक फायदे जो निम्नलिखित है—
कच्चा नारियल का पानी पित्तनाशक बलवर्धक है। यह कमजोरी भी दूर करता है। इससे पेट के कीड़े भी नष्ट होते हैं।
कच्चे नारियल को खूब चबा-चबाकर खाने से मूंह की दुर्गन्ध, पायरिया व मसूड़ों की कमजोरी से लाभ मिलता है।
कच्चे नारियल की पानी पाचन में हल्का एवं तृष्णानाशक है, इसकी शर्करा की करने अवशोषण हो जाता है । इसलिए यह जीर्ण रोगियों के लिए भी का की उपयोगी है।
हैजा एवं उल्ली-दस्त रोगियों में खनिज व पानी की कमी हो जाने पर भी नारियल पानी दिया जाताऊ है।
नारियल के नियमित सेवन करने से पथरी गल जाती है। दस दिन नारियल के पानी में नींबू डालकर – पीने से पथरी गायब हो जाती है।
नारियल के नियमित सेवन करने से पथरी गल जाती है। दस दिन नारियल के पानी में नींबू का रस डालकर पीने से पथरी गायब हो जाती है।
नारियल की गिरी शीतल व वातपित्तनाश बलवर्धक होती है। यह कमजोरी भी दूर करती है। इससे पेट की कीड़े भी नष्ट होते है।
प्रतिदिन नारियल पानी पीने से हिमोग्लोबिन बढ़ता है। इससे रक्ताल्पता दूर होती है।
खाना खाने के बाद पेट में एसिडिटी हो तो नारियल की गिरी के साथ मिश्री भी खाना चाहिए।
गर्भावस्था में महिलाऐं प्रतिदिन नारियल की गिरी खाते तो गर्भकाल की कई व्याधियों से छूटकारा मिलता है।
नारियल पानी चिकनगुनिया की रोकथाम में भी सहायक है।
सुखा नारियल का तेल खाज खुजली में इसका लाभकारी असर होता है।
नारियल के तेल का रूसीऔर सिरदर्द में बहुत लाभदायक है।
हिचकी और नकसीर में कच्चे नारियल का पानी पीना फायदेमंद होता है।
नारियल दिवस हमें नारियल अपने विशिष्ट गुणों के साथ देवताओं का फल होने से जागरूकता देता है ,कि नारियल का पानी पवित्र है। ताजे कच्चे नारियल पानी में अत्यन्त पोषकतत्त्व होते है।
डॉ बी आर नलवाया मंदसौर


