नीति आयोग का खुलासा: देश में 8.7 करोड़ युवा पढ़ाई और रोजगार दोनों से दूर, व्यावसायिक शिक्षा पर जोर देने की सिफारिश
विशेष संवाददाता, नई दिल्ली
देश की युवा आबादी को लेकर नीति आयोग की एक ताजा रिपोर्ट ने चिंता बढ़ा दी है। नीति आयोग द्वारा जारी आंकड़े के अनुसार, भारत में 15 से 29 वर्ष की आयु वर्ग के लगभग 8.7 करोड़ युवा ऐसे हैं, जो न तो किसी शैक्षणिक संस्थान में पढ़ाई कर रहे हैं और ना ही किसी रोजगार या प्रशिक्षण से जुड़े हुए हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस वर्ग को NEET यानी नॉट इन एजुकेशन, एम्प्लॉयमेंट, और ट्रेनिंग की श्रेणी में रखा जाता है। इतने बड़े पैमाने पर युवाओं का मुख्यधारा की शिक्षा और रोजगार से बाहर होना देश के विकास और युवाओं के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
रिपोर्ट के मुख्य बिंदु और चिंताजनक आंकड़े
नीति आयोग की इस विस्तृत समीक्षा में युवाओं की स्थिति का गहराई से विश्लेषण किया गया है। 15 से 29 वर्ष के बीच का एक बड़ा वर्ग औपचारिक शिक्षा बीच में ही छोड़ चुका है और उनके पास आधुनिक बाजार की मांग के अनुसार तकनीकी या व्यावसायिक कौशल नहीं है।
इस 8.7 करोड़ के आंकड़े में एक बड़ा हिस्सा ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों की उन युवतियों का है, जो पारिवारिक जिम्मेदारियों या सामाजिक कारणों से पढ़ाई छोड़ने के बाद श्रम बल का हिस्सा नहीं बन पाईं। वहीं, उच्च शिक्षा हासिल करने वाले कई युवा भी उपयुक्त रोजगार न मिलने के कारण इस दायरे में आ रहे हैं, क्योंकि उद्योगों की जरूरतें और कॉलेज के पाठ्यक्रम में बड़ा अंतर देखा जा रहा है।
व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने की सिफारिश
नीति आयोग ने इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए नीतिगत बदलावों और व्यावसायिक शिक्षा के मॉडल को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया है।
आयोग का मानना है कि केवल किताबी ज्ञान के बजाय स्कूली स्तर से ही वोकेशनल ट्रेनिंग यानी व्यवसायिक प्रशिक्षण को अनिवार्य किया जाना चाहिए, ताकि युवा पढ़ाई के साथ-साथ हुनरमंद बन सकें।
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि आईटीआई और कौशल विकास केंद्रों को स्थानीय उद्योगों की मांग के अनुसार अपडेट किया जाए, जिससे प्रशिक्षण पूरा होते ही युवाओं को रोजगार मिल सके। साथ ही युवाओं को अप्रेंटिसशिप स्कीम और आसान ऋण योजनाओं के जरिए स्वरोजगार की ओर प्रेरित करने की रणनीति पर काम करने की बात कही गई है।
आर्थिक प्रगति के लिए युवाओं को जोड़ना जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस 8.7 करोड़ युवाओं की ऊर्जा का सही इस्तेमाल नहीं किया गया, तो देश के विकास की गति प्रभावित हो सकती है। नीति आयोग ने राज्यों को भी निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने स्तर पर ऐसे युवाओं की पहचान करें और उन्हें राज्य-स्तरीय कौशल विकास योजनाओं से जोड़कर मुख्यधारा में वापस लाएं।
