NSE IPO Listing: 10 साल का इंतजार खत्म; सुस्त बाजार के बीच BSE पर ₹1,800 पर लिस्ट हुए NSE के शेयर
₹1,785 के इश्यू प्राइस के मुकाबले 0.8% के मामूली प्रीमियम पर हुई शुरुआत; लिस्टिंग के साथ ही ₹4.45 लाख करोड़ की कंपनी बना नेशनल स्टॉक एक्सचेंज।
मुंबई, 24 सितंबर 2026
मुंबई। भारतीय शेयर बाजार के इतिहास का सबसे बहुप्रतीक्षित और देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) आज आधिकारिक रूप से घरेलू बाजार में लिस्ट हो गया है। पिछले एक दशक से लंबित और कई नियामकीय बाधाओं के बाद आए इस मेगा आईपीओ की आज बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर शुरुआत हो गई।
वैश्विक और घरेलू बाजार में आज देखी जा रही सुस्ती और कमजोरी के असर के चलते NSE के शेयरों ने निवेशकों को निराश करते हुए बेहद फ्लैट शुरुआत की। अपर प्राइस बैंड ₹1,785 के मुकाबले यह शेयर मात्र 0.80% के प्रीमियम के साथ ₹1,800 प्रति शेयर पर लिस्ट हुआ।
लिस्टिंग डे का मुख्य स्नैपशॉट
- इश्यू प्राइस: ₹1,785 प्रति शेयर
- लिस्टिंग प्राइस (BSE): ₹1,800 प्रति शेयर (₹15 का मामूली मुनाफा)
- मार्केट कैपिटलाइजेशन: ₹4.45 लाख करोड़ (देश की 11वीं सबसे मूल्यवान कंपनी)
- कुल इश्यू साइज: ₹22,561.57 करोड़
प्रतिस्पर्धी एक्सचेंज (BSE) पर क्यों हुई लिस्टिंग?
मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) के कड़े नियमों के अनुसार, कोई भी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज अपने ही ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर खुद के शेयरों की लिस्टिंग या ट्रेडिंग नहीं करा सकता है। हितों के टकराव (Conflict of Interest) को रोकने के लिए बनाए गए इस नियम के चलते देश के सबसे बड़े एक्सचेंज NSE को अपने प्रतिद्वंद्वी बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर लिस्ट होना पड़ा।
LIC ने दिखाई मजबूती, बढ़ाई हिस्सेदारी
जहाँ स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), बैंक ऑफ बड़ौदा और कैनडा पेंशन प्लान (CPPIB) जैसे बड़े निवेशकों ने ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए अपनी हिस्सेदारी बेची है, वहीं देश की दिग्गज सरकारी बीमा कंपनी LIC (लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन) ने इस एंकर बुक और आईपीओ में बिकवाली करने के बजाय ₹450 करोड़ के अतिरिक्त शेयर खरीदे हैं। इसके साथ ही NSE में LIC की कुल हिस्सेदारी बढ़कर 10.81% हो गई है।
सुस्त लिस्टिंग के पीछे के मुख्य कारण
- बाजार का मूड: पिछले दो दिनों से घरेलू बेंचमार्क इंडेक्स (निफ्टी और सेंसेक्स) में ऊपरी स्तरों से मुनाफावसूली देखी जा रही है, जिसका सीधा असर नए लिस्ट होने वाले शेयरों पर पड़ा है।
- ग्रे मार्केट (GMP) में गिरावट: लिस्टिंग से ठीक एक दिन पहले ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) घटकर मात्र 2% से 2.5% के दायरे में आ गया था, जिसने पहले ही सुस्त शुरुआत के संकेत दे दिए थे।
- 100% ऑफर फॉर सेल (OFS): यह पूरा इश्यू केवल पुराने निवेशकों द्वारा शेयर बेचने (OFS) के लिए था। इससे कंपनी के पास कोई नया बिजनेस फंड नहीं आ रहा है, जिसे बाजार न्यूट्रल नजरिए से देखता है।
एक्सपर्ट्स की राय: लंबी अवधि के लिए बेहतरीन दांव
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि भले ही लिस्टिंग गेन (Listing Gain) के नजरिए से निवेशकों को बड़ा मुनाफा न मिला हो, लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों के लिए NSE एक बेहतरीन पोर्टफोलियो स्टॉक है। भारत के कैश मार्केट में 92% से अधिक और डेरिवेटिव मार्केट (F&O) में लगभग एकाधिकार (Monopoly) रखने वाली इस कंपनी का बिजनेस मॉडल बेहद मजबूत और लगातार कैश जेनरेट करने वाला है।
