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व्हाइट-कॉलर आतंकवाद’ और अकेले हमलावरों के उभरते खतरे से निपटने के लिए नागरिक सतर्कता और जिम्मेदार कार्रवाई महत्वपूर्ण: रक्षा मंत्री

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व्हाइट-कॉलर आतंकवाद’ और अकेले हमलावरों के उभरते खतरे से निपटने के लिए नागरिक सतर्कता और जिम्मेदार कार्रवाई महत्वपूर्ण: रक्षा मंत्री
 
मनोज शर्मा, चंडीगढ़ । रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 15 अक्टूबर, 2026 को नई दिल्ली में आयोजित रक्षा सम्मेलन में कहा कि ऑपरेशन सिंदूर, बालाकोट हवाई हमला और सर्जिकल स्ट्राइक केवल सैन्य अभियान नहीं थे, बल्कि ये आतंकवाद के प्रति भारत की नीति में आए निर्णायक बदलाव के प्रतीक थे, जो राजनयिक निंदा से आगे बढ़कर आतंकवाद के उन्मूलन के उद्देश्य से ठोस एवं सक्रिय कार्रवाई पर केंद्रित है। सीमा पार आतंकवाद के संबंध में भारत के रुख को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि पाकिस्तान से होने वाले किसी भी आतंकवादी कृत्य का और भी कड़ा जवाब दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की सांस्कृतिक विचारधारा संवाद, सह-अस्तित्व और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन करती है और शांति के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद से अधिकांश आतंकवादियों का जीवनकाल घटकर एक वर्ष से भी कम हो गया है और सुरक्षा बलों ने भारत के खिलाफ हथियार उठाने के एक वर्ष के भीतर ही उन्‍हें ढेर कर दिया है।
 
शांति बनाए रखने के लिए शक्ति और क्षमता को आवश्यक बताते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत शांति की आशा रखता है, लेकिन राष्ट्र की रक्षा के लिए कभी-कभी आवश्यक हो जाने वाले युद्ध के लिए भी तैयार है। उन्होंने कहा कि शांति के प्रति हमारी प्रतिबद्धता अटल है, फिर भी हम किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। हमारा लक्ष्य एक ऐसे भारत का निर्माण करना है जो शांति की वकालत करते हुए भी सुरक्षा के मामले में सतर्क रहे और अपनी संप्रभुता, अखंडता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम हो।
 
बदलते सुरक्षा परिदृश्य का उल्लेख करते हुए राजनाथ सिंह ने हाइब्रिड युद्ध, उन्नत प्रौद्योगिकी आधारित युद्ध और अति-युद्ध के मौजूदा दौर में सतर्कता बरतने तथा हर परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने डिजिटल युग में सुरक्षा खतरों की बढ़ती जटिलता को उजागर करते हुए ‘5डी सुरक्षा खतरे’ के रूप में डिसइन्फॉर्मेशन (दुष्प्रचार),डीस्टेबलाइजेशन(अस्थिरता),डिसरप्शन (व्यवधान), डिसेप्‍शन (छल) और डिस्ट्रक्शन (विनाश) की पहचान की। उन्होंने कहा कि आतंकवाद का स्वरूप अब संगठित समूहों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें ‘अकेले हमलावरों’ और ‘व्हाइट-कॉलर आतंकवाद’ जैसे नए खतरे भी उभर रहे हैं। इससे सुरक्षा एजेंसियों के लिए कट्टरपंथ की ओर बढ़ रहे व्यक्तियों की पहचान करना और संभावित आतंकवादी हमलों को समय रहते रोकना पहले से अधिक चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।
 
रक्षा मंत्री ने हाल ही में एक सह-पायलट द्वारा कथित तौर पर यात्री विमान को दुर्घटनाग्रस्त करने के प्रयास और कैप्टन स्मित मच्छार द्वारा एक बड़े आतंकी हमले को रोकने के लिए अपनी जान जोखिम में डालने की घटना का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस घटना ने अकेले हमला करने वाले आतंकवादियों से उत्पन्न खतरे को उजागर किया और यह भी दिखाया कि कैसे एक व्यक्ति का साहस और प्रतिबद्धता नफरत से प्रेरित लोगों की योजनाओं को विफल कर सकती है। एक सतर्क और साहसी व्यक्ति पूरे आतंकी षड्यंत्र को नाकाम कर सकता है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सुरक्षा एजेंसियों की क्षमता के साथ-साथ जागरूक और जिम्मेदार नागरिकों की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है।
 
राजनाथ सिंह ने रक्षा तैयारियों पर ‘हार्ड पावर’ और ‘सॉफ्ट पावर’ के संयोजन की आवश्यकता पर बल दिया और ‘स्मार्ट शक्ति’ की ओर बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक रक्षा रणनीतियों में सटीक निर्देशित हथियारों और निष्क्रिय गोला-बारूद को किफायती हथियारों के साथ, मानवीय बुद्धिमत्ता को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के साथ और उन्नत प्रणालियों को कम लागत वाली, सुदृढ़ और अनुकूलन प्रौद्योगिकियों के साथ एकीकृत करना आवश्यक है ताकि सुरक्षा संबंधी उभरती चुनौतियों का समाधान किया जा सके।
 
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत की रक्षा क्षमताओं में बढ़ते आत्मविश्वास का श्रेय, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हुए सुधारों,परिचालन पद्धतियों में बदलाव और परिवर्तित मानसिकता को दिया। उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े बारह वर्षों में सरकार ने तात्कालिक रक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने की जगह आत्मनिर्भर और भविष्य के लिए तैयार रक्षा प्रणाली के निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया है। उन्होंने कहा कि लाइसेंसिंग नियमों में सुधार और व्यापार सुगमता बढ़ाने के उपायों से देश के रक्षा विनिर्माण आधार का विस्तार हुआ है, जिसके तहत अब 500 से अधिक कंपनियां इस क्षेत्र में कार्यरत हैं और सैकड़ों नए औद्योगिक लाइसेंस जारी किए गए हैं।
 
रक्षा खरीद में सुधारों पर बोलते हुए श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया और ‘स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित उत्पाद खरीदें’ जैसी नीतियों के माध्यम से रक्षा बलों के आधुनिकीकरण में घरेलू उद्योगों को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने बताया कि आधुनिकीकरण बजट का 75 प्रतिशत हिस्सा भारतीय उद्योगों से खरीद के लिए निर्धारित किया गया है और इन सुधारों से सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के बीच सहयोग मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र ‘संपूर्ण सरकारी दृष्टिकोण’ से ‘संपूर्ण राष्ट्र दृष्टिकोण’ और धीरे-धीरे ‘संपूर्ण जन दृष्टिकोण’ की ओर बढ़ रहा है, जिसमें स्टार्टअप, सूक्ष्‍म, लघु एवं मध्यम उद्यम, व्यक्तिगत नवप्रवर्तक तथा बड़े निगम ‘राष्ट्र पहले’ की भावना के तहत राष्ट्रीय रक्षा में योगदान दे रहे हैं।
 
रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर को भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमताओं और आकाश मिसाइल प्रणाली तथा ब्रह्मोस जैसे रक्षा बलों के उन्नत स्वदेशी प्रणालियों पर विश्वास का प्रदर्शन बताया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन की सफलता भारत के घरेलू रक्षा उद्योग और राष्ट्रीय सुरक्षा में इसके योगदान पर बढ़ते विश्वास को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि रक्षा बलों ने रक्षा उपकरण, हथियार प्रणालियों और प्लेटफार्मों सहित 509 वस्तुओं को शामिल करते हुए पांच सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियां जारी की थीं, और छठी सूची जल्द ही जारी की जाएगी। इसी तरह, रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों ने स्वदेशीकरण के लिए 5,012 वस्तुओं की पहचान की थी, जिनमें लाइन रिप्लेसमेंट यूनिट, उप-प्रणाली, स्पेयर पार्ट्स और घटक शामिल हैं और इनमें से 3,255 का स्वदेशीकरण किया जा चुका है।
 
सरकार के प्रयासों के फलस्वरूप रक्षा क्षेत्र में हुई प्रगति पर राजनाथ सिंह ने कहा कि वर्ष 2014 में रक्षा उत्पादन  जहां 40,000 करोड़ रुपये था, अब यह बढ़कर रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। वहीं रक्षा निर्यात 2013-14 के 686 करोड़ रुपये से बढ़कर 39,000 करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर तक पहुंच गया है। भारत के रक्षा उत्पाद लगभग 100 देशों तक पहुंच रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि देश इस वर्ष 2 लाख करोड़ रुपये और 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादन लक्ष्य को प्राप्त कर लेगा तथा 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये के रक्षा उपकरण निर्यात करेगा।
 
रक्षा मंत्री ने इस वृद्धि का श्रेय निर्यात प्रक्रियाओं को सरल बनाने वाले सुधारों को दिया, जिनमें रक्षा एक्जिम पोर्टल की शुरुआत, ऑनलाइन अनुमोदन, ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस, सुव्यवस्थित गुणवत्ता प्रमाणन और ‘ग्रीन चैनल’ नीति शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन उपायों से भारत की वैश्विक विश्वसनीयता बढ़ी है और घरेलू उद्योग अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धा करने के लिए तत्‍पर हैं।
 
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए अनुसंधान, विकास और नवाचार के महत्व पर जोर देते हुए, राजनाथ सिंह ने बताया कि सरकार ने आईडेक्‍स,आईडेक्‍स प्राइम और अदिति योजना जैसी पहलों के माध्यम से स्टार्टअप्स,सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम तथा युवा नवोन्मेषकों के लिए अवसर सृजित किए हैं। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्रालय ने स्टार्टअप्स और एमएसएमई से 2,400 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की वस्तुओं और सेवाओं की खरीद को मंजूरी दी है और नई प्रौद्योगिकी विकास के लिए 1,500 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को स्वीकृत किया है। मार्च 2026 तक, आईडेक्‍स  ने 676 स्टार्टअप्स और नवोन्मेषकों को शामिल किया था और 551 अनुबंधों पर हस्ताक्षर करने में सहायता की थी। 2018 की तुलना में रक्षा स्टार्टअप्स का इकोसिस्टम बढ़कर अब 2,000 से अधिक हो गया है, जिसमें युवा उद्यम ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा, रोबोटिक्स और अन्य उन्नत क्षेत्रों में काम कर रहे हैं।
 
रक्षा मंत्री ने भारत के रक्षा औद्योगिक तंत्र के विस्तार पर कहा कि रक्षा उत्पादन अब केवल सार्वजनिक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, क्योंकि सार्वजनिक क्षेत्र के रक्षा उपक्रम, निजी उद्योग, 16,000 से अधिक एमएसएमई, आपूर्ति इकाइयां और नवाचार केंद्र सभी इस क्षेत्र में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि ओएफबी के निगमीकरण से घाटे में चल रही संस्थाएं अब लाभ कमाने वाले उद्यमों में परिवर्तित हो गई हैं। सार्वजनिक और निजी हितधारकों का बढ़ता नेटवर्क भारत का नया रक्षा औद्योगिक परिवार है।
 
रक्षा खरीद में हुए सुधारों पर राजनाथ सिंह ने कहा कि इस क्षेत्र का आधुनिकीकरण और स्वदेशीकरण हो रहा है, जिसमें अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही शामिल है। गोला-बारूद निर्माण में हुई प्रगति का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि रक्षा बलों द्वारा उपयोग किए जाने वाले 175 प्रकार के गोला-बारूद में से 159 अब स्वदेशी रूप से उत्पादित किए जाते हैं,जो इस मामले में 90 प्रतिशत से अधिक आत्मनिर्भरता को दर्शाता है। 100 से अधिक देशों को बुलेटप्रूफ जैकेट के निर्यात का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत बुलेटप्रूफ जैकेट के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप राष्ट्रीय मानक स्थापित करने वाला विश्व का चौथा देश बन गया है। उन्होंने वन रैंक वन पेंशन योजना के कार्यान्वयन और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के पद के सृजन के बारे में भी बात की और इन्हें रक्षा ढांचे को मजबूत करने के लिए उठाए गए महत्वपूर्ण कदम बताया।
 
रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन का समापन इस विश्वास के साथ किया कि जब भारत अपनी स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब वह ‘विकसित भारत’ बन जाएगा और प्रौद्योगिकी, अर्थव्यवस्था तथा रक्षा सहित सभी क्षेत्रों में विश्व को नेतृत्व प्रदान करेगा।

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