विशेष धार्मिक रिपोर्ट
श्रावण मास की पूर्णिमा यानी रक्षाबंधन का पावन पर्व बहन और भाई के पवित्र प्रेम का प्रतीक है। इस वर्ष रक्षाबंधन के पावन अवसर पर चंद्र ग्रहण का साया रहने के कारण शास्त्रों के अनुसार दान-पुण्य और भक्ति का महत्व कई गुना बढ़ गया है। ग्रहण के सूतक काल और ग्रहण अवधि के दौरान पूजा-पाठ, जप एवं दान करने से साधक को अक्षय पुण्य फलों की प्राप्ति होती है।
ज्योतिष एवं धर्मशास्त्रों के अनुसार, चंद्र ग्रहण के समय किया गया दान विशेष रूप से चंद्रमा से संबंधित दोषों का निवारण करता है और जीवन में सुख-समृद्धि लाता है।
ग्रहण काल एवं रक्षाबंधन पर अवश्य करें इन वस्तुओं का दान:
सफेद अन्न एवं मिष्ठान: चंद्रमा का संबंध श्वेत रंग से है। इस दिन चावल, चीनी, दूध, दही, और सफेद मिठाइयों का दान करने से मानसिक शांति और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है।
श्वेत वस्त्र: जरूरतमंदों एवं ब्राह्मणों को स्वच्छ सफेद वस्त्र दान करने से कुंडली में चंद्र ग्रह बलवान होता है और आरोग्यता की प्राप्ति होती है।
चांदी की वस्तुएं: अपनी सामर्थ्य अनुसार चांदी का सिक्का, बर्तन या कोई छोटी वस्तु दान करने से धन-धान्य में वृद्धि होती है और घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।
चांदी व मोती: चंद्रमा का रत्न मोती अथवा चांदी का दान ग्रहण दोष के अशुभ प्रभावों को क्षीण करता है।
तिल और गुड़: ग्रहण के बाद स्नान कर काले तिल और गुड़ का दान करने से समस्त पापों का नाश होता है और पितृदोष से राहत मिलती है।
दान एवं पूजन के समय ध्यान रखने योग्य धार्मिक नियम:
ग्रहण से पूर्व व पश्चात् स्नान: सूतक काल से पूर्व और ग्रहण समाप्ति के तुरंत बाद शुद्ध जल से स्नान करके ही दान-पुण्य का संकल्प लें।
मंत्र जाप: ग्रहण अवधि के दौरान “ॐ सोमाय नमः” या “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते रहें।
स्पर्श वर्जित: सूतक काल और ग्रहण के समय मूर्तियों का स्पर्श न करें, केवल मानसिक जप करें। ग्रहण मोक्ष (समाप्ति) के बाद ही दान की सामग्री का स्पर्श कर उसे योग्य व्यक्ति को सौंपें।
रक्षाबंधन के इस पावन पर्व पर भाई-बहन के प्रेम के साथ-साथ शास्त्रों में बताए गए इन दान नियमों का पालन करने से चंद्र देव का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में रिद्धि-सिद्धि का वास होता है।
