सागर शराब कांड: 18 मौतें और व्यवस्था वेंटिलेटर पर, माफिया के आगे ‘मोहन सरकार’ का कानून लाचार क्यों?
सागर। मध्य प्रदेश के सागर जिले में हुआ जहरीली शराब कांड सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र की नाक के नीचे पनप रहे अवैध नशे के कारोबार का वो खौफनाक चेहरा है जिसने कई हंसते-खेलते परिवारों को तबाह कर दिया है। बंडा थाना क्षेत्र के गांवों में मचे इस कोहराम में अब तक 18 लोग दम तोड़ चुके हैं, जबकि 84 से ज्यादा जिंदगी और मौत के बीच अस्पतालों में जूझ रही हैं। यह घटना चीख-चीख कर कह रही है कि सूबे में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और प्रशासनिक इकबाल पूरी तरह खत्म हो चुका है।
इस पूरे घटनाक्रम ने मोहन यादव सरकार के ‘सुशासन’ के दावों की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं। आइए देखते हैं वो तीखे और कड़वे तथ्य जो सीधे तौर पर
शासन-प्रशासन को कटघरे में खड़ा करते हैं:
- सरकारी संरक्षण में माफिया?
लाइसेंसी ठेकेदारों के नाम शामिल
सबसे बड़ा और चौंकाने वाला तथ्य यह है कि इस कांड में सिर्फ छोटे-मोटे अवैध तस्कर ही नहीं, बल्कि सरकार से बकायदा लाइसेंस लेने वाले ठेकेदार यशवंत ठाकुर और सिद्धार्थ कुशवाहा भी मुख्य आरोपी हैं। पुलिस ने 30 से अधिक आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया है, जिनमें से 10 को हिरासत में लिया गया है। सवाल यह उठता है कि जिन दुकानों और ठेकों की निगरानी का जिम्मा आबकारी विभाग का था, वहां मौत का यह जहरीला केमिकल (मिथाइल अल्कोहल) कैसे और किसकी शह पर बिक रहा था? - आबकारी और स्थानीय पुलिस की ‘मौन सहमति’
नौरोजा, घुघरा खुर्द और बराज जैसे ग्रामीण इलाकों में जहरीली शराब का यह नेटवर्क रातों-रात खड़ा नहीं हुआ। स्थानीय पुलिस और आबकारी महकमा तब तक गहरी नींद में सोया रहा, जब तक कि एक साथ दर्जनों लाशें गिरना शुरू नहीं हो गईं। जब हर गांव में अवैध शराब की पैठ बन रही थी, तब खुफिया तंत्र और स्थानीय प्रशासन क्या कर रहा था? क्या यह सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही और मिलीभगत का सबूत नहीं है?
- वेंटिलेटर पर स्वास्थ्य व्यवस्था और सिर्फ ‘दिखावटी’ जांच
अस्पतालों में 84 से ज्यादा मरीजों का इलाज जारी है। हालांकि प्रशासन अब गांवों में मेडिकल स्क्रीनिंग का ढोंग कर रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि जब तक यह कार्रवाई शुरू हुई, तब तक मिथाइल अल्कोहल कई लोगों के शरीर में अपना जानलेवा असर दिखा चुका था। हर बार की तरह इस बार भी मुख्यमंत्री ने “दोषियों को न बख्शने” का रटा-रटाया बयान जारी कर दिया है, लेकिन धरातल पर कड़े कदम गायब हैं।
- कानून व्यवस्था पर कड़े सवाल
विपक्ष भी इस मुद्दे पर हमलावर है और सरकार को घेर रहा है कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। शराब माफियाओं का यह बेखौफ नेटवर्क दर्शाता है कि उन्हें न तो पुलिस का डर है और न ही सरकार के बुलडोजर का।
जनता का सीधा सवाल:
सागर की यह त्रासदी चीख-चीख कर पूछ रही है कि इन 18 मौतों की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा? क्या आबकारी विभाग के बड़े अफसरों पर गाज गिरेगी या हर बार की तरह छोटे कर्मचारियों को सस्पेंड करके मुख्य गुनहगारों और उनके सियासी आकाओं को बचा लिया जाएगा?
