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राष्ट्रीय एकता , अखंडता के अग्रदूत सरदार वल्लभभाई पटेल

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31 अक्टूबर ,2026

31 अक्टूबर राष्ट्रीय एकता दिवस

राष्ट्रीय एकता , अखंडता के अग्रदूत सरदार वल्लभभाई पटेल

सरदार वल्लभ भाई पटेल के 151 वाँ जन्मोत्सव 31 अक्टूबर को पूरे देश में राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। 31 अक्टूबर, 1875 को बोरसद तालुक के करमसद में नडियाद, गुजरात में जन्मे वल्लभभाई पटेल (एक सफल वकील) बचपन से साहसी, मेहनती और ईमानदारी की अपनी पहचान बना ली। साधारण परिवार के कारण वल्लभभाई पटेल की शिक्षा निजी प्रयास से कष्टों के बीच ही पूरी हुई।

1926 में वल्लभभाई पटेल की भेंट महात्मा गांधी से हुई और फिर वे स्वाधीनता आंदोलन में शामिल हो गए। बैरिस्टर वाली अंग्रेजों की वेशभूषा त्याग दी और स्वदेशी रंग में रंग गए। बारडोली के किसान आंदोलन का सफल नेतृत्व करने के कारण गांधी जी ने उन्हें सरदार कहा है और यह उपाधि उनके नाम के साथ जुड़ गई। इसी के कारण उनके मजबूत इरादों से भारत की 562 रियासतों को भारतीय संघ में विलय करने के करने सफल हुए,और उन्हें लोह पुरुष माना गया। यही से लोह पुरुष सरदार पटेल ने अपनी राजनीतिक दक्षता,
कौशल और इच्छा शक्ति से भारत को नई पहचान तथा दिशा दी। उनके आदर्श जीवन के मूल्यों उत्कर्ष और आचरण की शुद्धि के के आधार पर राष्ट्र के भारत में युग परिवर्तन के नायक के रूप में प्रतिष्ठित हुए।
इसके साथ ही वे एक ऐसे वक्ता थे , जो स्पष्ट और निर्भीकता से कभी गांधी जी से सहमत होते तो कभी असहमत होने के साथ अपनी बात साफ कर देते थे। वह कई बार जेल जाने के साथ 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में भी उन्हें 3 वर्ष की सजा हुई।
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के मजबूत स्तंभ बनकर उभरे। अपने जीवन काल के दौरान कई बार में जेल गए। इसी कारण उनका जीवन साहस और नेतृत्व आज भी हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है। उन्होंने ऐसा साहस, अनुशासन ,आत्म बल ,आदर, आलस्य ,त्याग ,उत्साह, कर्तव्यनिष्ठा , स्वावलंबन, दया नमृता ,प्रेम, मैत्री, लोक सेवा आदि जीवन मूल्यों के प्रति नेतिक भाव जागृत करने के लिए समय-समय पर देशवासियों को प्रेरित किया।

अपने लक्ष्य से कभी नहीं डीगे नहीं । 151 जन्म जयंती 2026
का वर्ष भी एक ऐसा अवसर है। जो देश के लिए गर्व और प्रेरणा दोनों ही प्रदान करता है। उनका संदेश एक भारत, श्रेष्ठ भारत आज भी प्रासंगिक है।

सरदार वल्लभभाई पटेल की स्टैच्यू ऑफ यूनिटी बनाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात को दिया वैश्विक पर्यटन का गौरव बना, इससे भारत में ही नहीं बल्कि विश्व में भी अपनी प्रतिष्ठा स्थापित की है। 2010 में नरेंद्र जी मोदी को स्टैचू ऑफ यूनिटी का विचार आया था। 2019 में एकता नगर को योजनाबद्ध तरीके से विकसित करने की ‌योजना बन गई थी। 2023 में एकता नगर के रूप में देश का पहला इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र बन गया। स्मरण रहे गुजरात के केवडया में स्थित स्टैचू ऑफ यूनिटी अब केवल एक पर्यटन स्थल ही नहीं है बल्कि एकता नगर के रूप में विकसित होकर स्थाई पर्यटन हरित ऊर्जा और सामाजिक समावेश का प्रेरणादायक मॉडल बन चुका है।

पटेल ऐसी शिक्षा के पक्षधर थे, जो लड़कों को ही नहीं लड़कियों को भी मधुर आचार-विचार में विनयशील और विवेकशील बनाएं। वह चारित्रिक विकास को अधिक महत्व देते थे। इस कारण वल्लभभाई पटेल भारतीयों में उदात्त जीवन मूल्यों के अग्रणी रहे।

उन्होंने देशवासियों को कहा, हमेशा सत्य बोलने की हिम्मत रखो, अन्याय खिलाफ सदा लड़ते रहो, घर की बात को घर में ही रखो और शेर जैसा कलेजा बनाकर रखो।

भारत जिन चुनौतियों में 2–4 हो रहा था, उसे सुव्यवस्थित करके जुड़े सरदार पटेल के सिद्धांत मार्गदर्शन सिद्ध हुए हैं। इसीलिए वे आज भी असरदार के रूप में सरदार विख्यात हुए हैं। इसीलिए उल्लेखनीय है, की स्वतंत्रता के पहले और इसके तुरंत बाद उतने ही असरदार थे और भारत इस समय जिस दौर से गुजर रहा है, उसमें भी वह राष्ट्रीय एकता के प्रेरक कड़ी ऋबने हुए हैं। उनके मूल्यों की आत्मसात कर राष्ट्र को सशक्त बनाना ही उनकी जन्म
जयंती पर उनके प्रति राष्ट्र की कृतज्ञ श्रद्धांजलि होगी। इस प्रकार भारत रत्न सरदार वल्लभभाई पटेल का देश की एकता और अखंडता के लिए दिया गया योगदान सदैव प्रेरणा स्त्रोत होता रहेगा। सरदार जी का जीवन देश भक्ति , त्याग और संगठन का प्रतीक माना जाता है। वे आदर्शों पर चलकर एक मजबूत भारत के निर्माण में योगदान दिया था ।

डॉ.बी.आर. नलवाया, मंदसौर

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