Silver Price Crash: त्योहारी सीजन में चांदी की चमक हुई फीकी, रिकॉर्ड हाई से ₹1.90 लाख तक टूटे दाम; जानें क्या रहेगी आगे की स्थिति
त्योहारों के ऐन मौके पर सराफा बाजार से बड़ी खबर आ रही है। रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद घरेलू और वैश्विक बाजार में चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक क्रैश (भारी गिरावट) देखा गया है। घरेलू वायदा बाजार (MCX) पर चांदी का भाव 10 महीने में पहली बार ₹2 लाख प्रति किलोग्राम के स्तर से नीचे फिसल गया है।
पिछले कुछ दिनों की ताबड़तोड़ बिकवाली के कारण महज चार दिनों के भीतर चांदी में ₹16,503 प्रति किलो की बड़ी गिरावट दर्ज की जा चुकी है। वहीं, जनवरी के अपने ऑल-टाइम हाई स्तर (₹4.10 लाख प्रति किलो) से तुलना करें तो चांदी करीब ₹1.90 लाख (46% से ज़्यादा) तक सस्ती हो चुकी है।
चांदी के भाव टूटने की 4 मुख्य वजहें
विशेषज्ञों और कमोडिटी मार्केट के विश्लेषकों के मुताबिक, इस भारी गिरावट के पीछे कई बड़े वैश्विक, तकनीकी और औद्योगिक कारण जिम्मेदार हैं:
- औद्योगिक मांग में भारी कमी: चांदी का बड़ा हिस्सा सोलर पैनल्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) और इलेक्ट्रॉनिक सामानों में इस्तेमाल होता है। वैश्विक कंपनियों ने चांदी की जगह तांबे (Copper) जैसे सस्ते विकल्पों को आजमाना शुरू कर दिया है, जिससे इंडस्ट्रियल डिमांड काफी घट गई है।
- ब्याज दरों का दबाव: मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतें $114 प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। इससे महंगाई बढ़ने की आशंका है, जिसके चलते अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कम हो गई हैं। ब्याज दरें ऊंची रहने की संभावना से निवेशक चांदी जैसी बिना नियमित आय वाली संपत्तियों से पैसा निकाल रहे हैं।
- मजबूत होता डॉलर इंडेक्स: वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर में आई मजबूती और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बॉन्ड यील्ड (Bond Yield) बढ़ने ने कीमती धातुओं की कीमतों पर चौतरफा दबाव बना दिया है।
- मार्केट में मुनाफावसूली (Profit Booking): ऊंचे स्तरों पर बड़े संस्थागत निवेशकों द्वारा की गई भारी बिकवाली और तकनीकी सुधार (Technical Correction) के चलते भी कीमतों में लगातार गिरावट का सिलसिला जारी है।
आगे क्या रह सकती है बाजार की स्थिति? (Future Scenarios)
आने वाले दिनों में सराफा बाजार में चांदी की चाल को लेकर विशेषज्ञों ने निम्नलिखित 3 मुख्य स्थितियां (Scenarios) जताई हैं:
स्थिति 1: त्योहारों पर खरीदारी बढ़ने से आ सकता है आंशिक सुधार (Mild Recovery)
धनतेरस और दिवाली के दौरान भारतीय बाजारों में भौतिक चांदी (Physical Silver) जैसे सिक्कों, बर्तनों और गहनों की मांग पारंपरिक रूप से बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। घरेलू स्तर पर यह मजबूत मांग कीमतों को और नीचे गिरने से रोक सकती है और निचले स्तरों से बाजार में हल्की रिकवरी (सुधार) देखी जा सकती है।
स्थिति 2: वैश्विक दबाव जारी रहा तो ₹1.85 लाख तक फिसल सकते हैं दाम (Further Correction)
यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर की मजबूती इसी तरह बनी रहती है और चीन या अमेरिका से औद्योगिक मांग के मोर्चे पर कोई सकारात्मक खबर नहीं आती है, तो तकनीकी चार्ट के अनुसार चांदी का भाव घरेलू बाजार में और नीचे खिसक सकता है। ऐसे में यह ₹1,85,000 से ₹1,88,000 प्रति किलो के नए सपोर्ट लेवल को टेस्ट कर सकती है।
स्थिति 3: एक सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव (Range-bound Trading)
चूंकि बाजार पिछले कुछ दिनों में बहुत तेजी से गिरा है, इसलिए आने वाले एक से दो हफ्तों तक बाजार में ठहराव (Consolidation) देखने को मिल सकता है। ऐसी स्थिति में चांदी की कीमतें ₹1,92,000 से लेकर ₹2,05,000 प्रति किलोग्राम के एक सीमित दायरे के बीच ही ऊपर-नीचे होती रहेंगी।
खरीदारों और निवेशकों के लिए सलाह
सराफा विशेषज्ञों का मानना है कि धनतेरस और दिवाली से ठीक पहले आई यह गिरावट उन आम ग्राहकों के लिए एक बेहतरीन मौका (Buying Opportunity) साबित हो सकती है जो लंबे समय से गहने या चांदी के सिक्के खरीदने की योजना बना रहे थे। हालांकि, अल्पकालिक (Short-term) निवेशकों को बाजार की इस भारी अस्थिरता को देखते हुए एकमुश्त पैसा लगाने के बजाय किश्तों में (SIP फॉर्मेट में) खरीदारी करने की सलाह दी जा रही है।
