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विदेशी निवेशकों की रिकॉर्ड ₹3.08 लाख करोड़ की महा-बिकवाली से हड़कंप, जानें क्या है कारण

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भारतीय शेयर बाजार में हाहाकार: विदेशी निवेशकों ने निकाले रिकॉर्ड ₹3.08 लाख करोड़, जानें बड़ी वजहें

नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की रिकॉर्ड बिकवाली का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। अक्टूबर महीने में अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी बाजार से ₹48,056 करोड़ से अधिक की भारी-भरकम राशि बाहर निकाल ली है। इससे पहले सितंबर महीने में भी बाजार ने ₹35,861 करोड़ का बड़ा आउटफ्लो (निकासी) देखा था।

आधिकारिक बाजार आंकड़ों के अनुसार, इस साल में अब तक कुल विदेशी निकासी ₹3.08 लाख करोड़ के ऐतिहासिक स्तर को छू चुकी है। यह आंकड़ा पिछले पूरे साल में हुई ₹1.66 लाख करोड़ की निकासी के मुकाबले लगभग दोगुना है, जो भारतीय बाजार के इतिहास में सबसे बड़ी विदेशी बिकवालियों में से एक बन चुकी है।

📉 विदेशी निवेशकों के बाहर जाने के 5 मुख्य कारण

विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा लगातार की जा रही इस आक्रामक बिकवाली के पीछे वैश्विक और घरेलू मोर्चों पर कई बड़े कारण काम कर रहे हैं:

  1. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें (Crude Oil Surge): मध्य पूर्व में जारी भीषण भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिससे तेल महंगा होने पर भारतीय कंपनियों के मुनाफे और मार्जिन पर सीधा दबाव पड़ रहा है।
  2. मजबूत अमेरिकी डॉलर और बढ़ती बॉन्ड यील्ड: अमेरिका में ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड (ब्याज दरें) उच्च स्तर पर बनी हुई हैं और डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है। इसके चलते विदेशी निवेशकों के लिए भारत जैसे उभरते बाजारों के मुकाबले अमेरिका जैसे सुरक्षित बाजारों में निवेश करना अधिक आकर्षक और कम जोखिम भरा हो गया है।
  3. सस्ते विदेशी बाजारों का आकर्षण: भारतीय बाजार का वैल्यूएशन (मूल्यांकन) लंबे समय से काफी महंगा बना हुआ था। इसके विपरीत, चीन, हांगकांग, ताइवान और दक्षिण कोरिया के बाजार इस समय काफी सस्ते और आकर्षक लग रहे हैं, जिससे विदेशी फंड भारत से पैसा निकालकर वहां शिफ्ट कर रहे हैं।
  4. AI और सेमीकंडक्टर का बूम: दुनिया भर के बड़े निवेशक इस समय अमेरिका और ताइवान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर सेक्टर में आ रहे उछाल का फायदा उठाने के लिए अपना फोकस वहां केंद्रित कर रहे हैं।
  5. रुपये में रिकॉर्ड कमजोरी और टैक्स की चिंता: डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया अपने सबसे निचले स्तरों पर आ चुका है। मुद्रा में इस भारी उतार-चढ़ाव और हाल के समय में बढ़ाए गए कैपिटल गेन्स टैक्स के कारण भी विदेशी निवेशकों का भरोसा डगमगाया है।

🇮🇳 भारतीय निवेशकों के लिए क्या है राहत की बात?

विदेशी निवेशकों की इस ऐतिहासिक बिकवाली के बावजूद भारतीय बाजार पूरी तरह से क्रैश नहीं हुआ है। इसके पीछे मुख्य दीवार बनकर खड़े हैं भारत के घरेलू संस्थागत निवेशक (DII), जैसे कि घरेलू म्यूचुअल फंड्स, बीमा कंपनियां और खुदरा (Retail) निवेशक। जब-जब विदेशी निवेशक बाजार में माल बेचकर निकल रहे हैं, तब-तब घरेलू निवेशक बड़े पैमाने पर खरीदारी करके बाजार को संभाले हुए हैं, जो भारतीय अर्थव्यवस्था और डोमेस्टिक लिक्विडिटी की ताकत को दर्शाता है।

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि जब तक मध्य पूर्व का तनाव शांत नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतें स्थिर नहीं होतीं, तब तक विदेशी निवेशकों की इस घर वापसी पर पूरी तरह रोक लगना मुश्किल है। हालांकि, हालिया हफ्तों में बिकवाली की रफ्तार थोड़ी धीमी जरूर पड़ी है, जिससे बाजार को मामूली राहत मिलने की उम्मीद जगी है।

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