मैड्रिड : स्पेन में बढ़ते किराये और गंभीर होते हाउसिंग संकट ने एक बड़े राजनीतिक भूचाल का रूप ले लिया है। एक 87 वर्षीय दिव्यांग बुजुर्ग महिला को किराया न चुका पाने के कारण उनके 70 साल पुराने आशियाने से जबरन बाहर निकाले जाने की घटना ने देश की सरकार को घुटनों पर ला दिया है। इस मामले पर देशव्यापी भारी जनाक्रोश और संसद में सरकार के इमरजेंसी हाउसिंग बिल के गिरने के बाद, स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ (Pedro Sánchez) ने संसद भंग करते हुए समय से पहले (स्नैप इलेक्शन) आम चुनाव कराने का ऐलान कर दिया है। देश में तय समय से करीब 8 महीने पहले आगामी 29 नवंबर को नए सिरे से मतदान होगा।
क्या है पूरा विवाद? (जिसने बदल दी देश की राजनीति)
यह पूरा मामला मारिया डेल कारमेन अबास्कल (मारीकारमेन) नाम की एक 87 वर्षीय बुजुर्ग पेंशनर की बेदखली से जुड़ा है। मारीकारमेन मैड्रिड के एक अपार्टमेंट में साल 1956 से किराये पर रह रही थीं।
साल 2018 में एक बड़े रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन ने इस पूरी बिल्डिंग को खरीद लिया, जिसके बाद इस फ्लैट का मासिक किराया €500 (करीब ₹46,000) से बढ़ाकर सीधे €1,650 (करीब ₹1.52 लाख) कर दिया गया। बुजुर्ग महिला की मासिक पेंशन केवल €1,350 थी, जिसके कारण वह यह भारी-भरकम किराया देने में असमर्थ थीं।
बीती 23 सितंबर को भारी पुलिस बल ने महिला के घर का दरवाजा तोड़कर उन्हें महज 30 मिनट के भीतर घर से बाहर कर दिया। व्हीलचेयर पर रहने वाली इस बुजुर्ग महिला को स्ट्रेचर पर डालकर एम्बुलेंस से ले जाने की तस्वीरों ने सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा भड़का दिया।
सड़कों पर उतरी जनता, संसद में हारी सरकार
इस अमानवीय कार्रवाई के विरोध में मैड्रिड, बार्सिलोना और वालेंसिया सहित देश के 50 से अधिक शहरों में लाखों लोग सड़कों पर उतर आए। हालात को संभालने के लिए पीएम पेड्रो सांचेज़ की गठबंधन सरकार ने संसद में दो इमरजेंसी हाउसिंग बिल पेश किए।
इस कानून का मकसद कॉर्पोरेट सट्टेबाजों पर लगाम कसना और 2030 तक कमजोर किरायेदारों की बेदखली पर रोक लगाना था। हालांकि, संसद में विपक्षी दलों और सरकार के ही एक सहयोगी दल (Junts) ने मिलकर इस बिल को गिरा दिया। संसद में बहुमत खोने और अपनी नीतियों को लागू न करवा पाने के बाद प्रधानमंत्री ने पद से पीछे हटते हुए नए चुनावों की घोषणा कर दी।
कॉर्पोरेट कंपनी को पीछे हटना पड़ा, पर बदल गया स्पेन का एजेंडा
जनता के भारी दबाव और चौतरफा बदनामी के बाद उस रियल एस्टेट कंपनी को आखिरकार झुकना पड़ा है। एक नए कानूनी समझौते के तहत कंपनी मारीकारमेन को वापस उसी घर में रखने के लिए तैयार हो गई है, और उनका किराया अब उनकी कुल आय के 30% (लगभग 500 यूरो) पर तय कर दिया गया है। फिलहाल अस्पताल में भर्ती महिला जल्द ही अपने पुराने घर लौटेंगी।
भले ही इस बुजुर्ग महिला को उनका आशियाना वापस मिल गया हो, लेकिन इस घटना ने स्पेन में विदेशी सट्टेबाजों, पर्यटकों के कारण आसमान छूती मकानों की कीमतों और आम जनता की लाचारी को देश का सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बना दिया है। आगामी 29 नवंबर को होने वाले चुनावों में अब यह हाउसिंग क्राइसिस ही सत्ता का भविष्य तय करेगा।


