त्योहारी सीजन से पहले आम जनता को झटका: ब्लिंकिट-स्विगी और डीमार्ट से 5 किलो से ज्यादा शक्कर नहीं मिलेगी; एक महीने में 35% बढ़े दाम
नई दिल्ली/इंदौर:
देश में आगामी त्योहारी सीजन की शुरुआत से ठीक पहले आम उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी और परेशान करने वाली खबर आ रही है। यदि आप घर में त्योहार की मिठाइयों के लिए थोक में चीनी (शक्कर) खरीदने की सोच रहे हैं, तो अब आपको अपनी लिस्ट छोटी करनी होगी। ब्लिंकिट (Blinkit), स्विगी इंस्टामार्ट (Swiggy Instamart) और ज़ेप्टो (Zepto) जैसे प्रमुख क्विक-कॉमर्स ऐप्स के साथ-साथ डीमार्ट (DMart) और रिलायंस रिटेल (Reliance Retail) जैसे बड़े ऑफलाइन सुपरमार्केट्स ने शक्कर की बिक्री पर प्रति ग्राहक ‘क्वांटिटी लिमिट’ (कैपिंग) लगा दी है। अब कोई भी ग्राहक एक बार में 2 से 5 किलो से अधिक चीनी नहीं खरीद पा रहा है।
किस प्लेटफॉर्म पर है कितनी लिमिट?
अलग-अलग कंपनियों और शहरों के हिसाब से शक्कर खरीदने की अधिकतम सीमा तय की गई है:
- ब्लिंकिट (Blinkit): दिल्ली-एनसीआर और कई अन्य शहरों में प्रति ट्रांजैक्शन अधिकतम 5 किलो का सिर्फ 1 पैकेट ही ऑर्डर किया जा सकता है। वहीं पुणे जैसे शहरों में कुछ ब्रांड्स की केवल 1-1 किलो की 3 थैलियां ही कार्ट में ऐड हो रही हैं। ऐप्स पर “Sorry, we have limited quantities available” (माफ करें, हमारे पास सीमित स्टॉक है) का डिस्क्लेमर भी दिखने लगा है।
- स्विगी इंस्टामार्ट (Swiggy Instamart): यहाँ भी कड़ा प्रतिबंध है। कुछ चुनिंदा ब्रांड्स (जैसे मधुर या सुप्रीम हार्वेस्ट) के लिए ग्राहक एक बार में 1-1 किलो के अधिकतम 2 पैकेट ही मंगा सकते हैं।
- बिग बास्केट (BigBasket): इस प्लेटफॉर्म ने अलग-अलग ब्रांड्स को मिलाकर अधिकतम 5 से 6 किलो की कैपिंग तय की है। ऐप्स से चीनी के 10 किलो वाले बड़े पैकेट्स को पूरी तरह हटा दिया गया है।
- डीमार्ट और रिलायंस रिटेल (DMart & Reliance): ऑफलाइन स्टोर्स में भी हालात ऐसे ही हैं। पुणे और मुंबई समेत कई शहरों के डीमार्ट काउंटर्स पर नोटिस बोर्ड लगा दिए गए हैं, जिन पर साफ लिखा है कि प्रति इनवॉइस (बिल) केवल 5 किलो या कुछ जगहों पर 2 से 3 किलो शक्कर ही दी जाएगी।
1 महीने में 35% महंगी हुई शक्कर
इस पाबंदी के पीछे का सबसे बड़ा कारण देश में शक्कर की घटती सप्लाई और कीमतों में आया भारी उछाल है। उपभोक्ता मामले विभाग (Department of Consumer Affairs) के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत जो 26 जुलाई को लगभग ₹48 प्रति किलो थी, वह 26 अगस्त को बढ़कर ₹65.05 प्रति किलो पर पहुंच गई है। यानी मात्र एक महीने के भीतर शक्कर की कीमतों में करीब 35.5% की भारी तेजी आई है। खुदरा बाजार के साथ-साथ थोक बाजार में भी शक्कर करीब 34% महंगी हो चुकी है।
क्यों उठानी पड़ीं ये पाबंदियां?
उद्योग विशेषज्ञों और ‘एडब्ल्यूएल एग्रीबिजनेस’ के शीर्ष अधिकारियों के मुताबिक, खुदरा और ऑनलाइन चेन ने यह कदम जानबूझकर उठाया है ताकि बाज़ार में अचानक ‘पैनिक बाइंग’ (डर के मारे ज्यादा खरीदारी) और जमाखोरी को रोका जा सके। त्योहारों के समय मांग बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। सीमित स्टॉक होने के कारण कंपनियां चाहती हैं कि स्टॉक ब्लैक न हो और यह कम मात्रा में ही सही, लेकिन अधिक से अधिक उपभोक्ताओं तक आसानी से पहुंच सके। सरकार ने भी स्थिति को संभालने के लिए भारी उपभोक्ताओं (Bulk Consumers) के लिए स्टॉक होल्डिंग लिमिट को आधा करके 15 दिन कर दिया है।
