पटाखों के बिना मने सुरक्षित दिवाली: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- विराट कोहली जैसे बड़े चेहरों को आगे लाकर प्रशासन जगाए जागरूकता
नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (Delhi-NCR) में दीपावली के दौरान होने वाले वायु प्रदूषण पर देश की सबसे बड़ी अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए सरकारों को एक नया रास्ता सुझाया है। अदालत का कहना है कि सिर्फ पाबंदियां थोपने या कागजी आदेश जारी करने से जमीनी बदलाव नहीं आएगा। जनता की सोच बदलने के लिए प्रशासन को भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली और समाज के अन्य प्रभावशाली दिग्गजों की लोकप्रियता का इस्तेमाल करना चाहिए।
जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस पी.बी. वराले की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि जब तक आम लोगों में भीतर से चेतना नहीं जागेगी, तब तक प्रदूषण नियंत्रण के नियम बेअसर साबित होते रहेंगे।
आदेशों की अनदेखी पर न्यायपालिका सख्त
अदालत ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि प्रदूषण रोकने के लिए जारी किए जाने वाले दिशा-निर्देशों का जमीन पर सरेआम माखौल उड़ाया जाता है। कड़ाई से पालन न होने के कारण अदालत के फैसले केवल कागजी कसरत बनकर रह जाते हैं। पीठ ने जोर देकर कहा कि दीपावली असल में रोशनी और खुशियों का पर्व है, न कि बारूदी धुएं और धमाकों का। कोर्ट ने प्रशासन को निर्देश दिया कि वे सोशल मीडिया, टेलीविजन और अखबारों के माध्यम से नियमों का बड़े पैमाने पर प्रचार करें।
सेलिब्रिटी अपील से बदलेगी जनता की सोच
शीर्ष अदालत ने केंद्र और दिल्ली सरकार को एक अनोखा सुझाव देते हुए कहा कि विराट कोहली जैसे युवाओं के पसंदीदा रोल मॉडल्स के साथ मिलकर छोटे-छोटे जागरूकता वीडियो और संदेश तैयार किए जाने चाहिए। इन संदेशों के जरिए नागरिकों से एक सुरक्षित और प्रदूषण मुक्त त्योहार मनाने की भावनात्मक अपील की जाए। कोर्ट का मानना है कि जब ऐसे बड़े चेहरे लोगों से सीधे संवाद करेंगे, तो इसका समाज पर गहरा और सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
नई पीढ़ी से बड़ी उम्मीदें
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बच्चों और युवाओं की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण बताया। जजों ने कहा कि आज की नई पीढ़ी पर्यावरण को लेकर पहले से कहीं अधिक संवेदनशील है। अगर स्कूलों के माध्यम से बच्चों को जहरीली हवा के नुकसान समझाए जाएं, तो वे अपने घरों में बड़ों को पटाखे न चलाने के लिए मना सकते हैं।
नकली ग्रीन क्रैकर्स और मौतों के आंकड़ों पर चिंता
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट के समक्ष एक रिपोर्ट पेश की, जिसमें वायु प्रदूषण के कारण देश में लाखों मौतों का दावा किया गया है। इसके साथ ही यह मुद्दा भी उठा कि मार्केट में पर्यावरण अनुकूल (Green Crackers) होने का फर्जी ठप्पा लगाकर जहरीले पटाखे बेचे जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए सरकारों से अब तक की कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट (हलफनामा) तलब की है और मामले पर अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है।
