हिमालयी क्षेत्र में बड़ा संकट: तिब्बत में मलबे से बनी कृत्रिम झील टूटी, नेपाल में दूसरी तबाही का हाई अलर्ट, रेस्क्यू ऑपरेशन रुका
काठमांडू / नई दिल्ली:
नेपाल और तिब्बत (चीन) के सीमावर्ती इलाकों में कुदरत का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार को हुए भीषण ग्लेशियर ब्लास्ट के बाद अब इस क्षेत्र पर तबाही की दूसरी लहर का खतरा मंडरा रहा है। तिब्बत के ऊपरी हिस्से में भूस्खलन और मलबे के कारण नदियों का रास्ता रुकने से बनी एक विशालकाय कृत्रिम झील (Barrier Lake) का बांध शुक्रवार को टूट गया है। इसके चलते नेपाल के निचले और तटीय इलाकों में पानी का भारी सैलाब तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने आपातकालीन चेतावनी (Emergency Warning) जारी कर दी है।
सेना और रेस्क्यू टीमों को पीछे हटने के आदेश, रोकी गई राहत
चीन के जिरोंग (Gyirong) बॉर्डर के ऊपरी हिस्से में स्थित इस प्राकृतिक बांध के फटने की खबर मिलते ही नेपाल पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने तुरंत हाई अलर्ट जारी किया है।
- रोकना पड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन: बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहले से चल रहे खोज और बचाव कार्य को तुरंत प्रभाव से रोक दिया गया है। सुरक्षा अधिकारियों ने सेना, पुलिस और राहत कर्मियों को खुद को सुरक्षित करने के लिए ऊंचे स्थानों पर जाने के निर्देश दिए हैं।
- इलाका खाली कराने का काम शुरू: भोटे कोशी (Bhote Koshi) और त्रिशूली (Trishuli) नदियों के किनारे बसे सभी गांवों, बाजारों और रिहायशी बस्तियों को आनन-फानन में खाली कराया जा रहा है।
- हेलीकॉप्टर सेवाएं ठप: रसुवा (Rasuwa) जिले में लगातार बढ़ते जलस्तर और मौसम की खराबी के कारण वायुसेना और निजी हेलीकॉप्टरों से किया जा रहा रेस्क्यू भी पूरी तरह ठप हो गया है।
चीन ने पहले ही दी थी 30 लाख क्यूबिक मीटर पानी की चेतावनी
चीन के जल संसाधन विभाग ने कुछ समय पहले ही अलर्ट जारी किया था कि Chhochen Khola और Purepu Tsangpo नदियों के संगम पर भूस्खलन के मलबे से एक अस्थाई बांध बन गया था। इस प्राकृतिक रुकावट के पीछे करीब 25 से 30 लाख क्यूबिक मीटर पानी जमा हो चुका था। पानी का दबाव असहनीय होने के कारण शुक्रवार को यह कृत्रिम बांध ढह गया, जिससे भारी मात्रा में पानी अब तेजी से नीचे नेपाल की तरफ बह रहा है।
पहली लहर से ही मची है भारी तबाही, सैकड़ों की मौत
दो दिन पहले (बुधवार को) हुए मुख्य हादसे (Glacial Lake Outburst Flood – GLOF) ने नेपाल और चीन सीमा को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया है:
- भारी जानी नुकसान: इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 460 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 1300 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। लापता लोगों में करीब 800 विदेशी सैलानी भी शामिल हैं।
- अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्ग तबाह: बाढ़ के पहले रेले में नेपाल और चीन को जोड़ने वाला ‘फ्रेंडशिप ब्रिज’ (Friendship Bridge), रसुवागढ़ी का सीमा शुल्क कार्यालय और एक निर्माणाधीन ड्राई पोर्ट पूरी तरह बह चुके हैं। बॉर्डर पर खड़ी सैकड़ों कमर्शियल गाड़ियां पानी में विलीन हो गई हैं।
भू-वैज्ञानिकों का मानना है कि ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) के चलते हिमालयी क्षेत्रों में तापमान का संतुलन बिगड़ रहा है, जिससे ग्लेशियर तेजी से पिघल कर टूट रहे हैं। अगले 48 घंटे नेपाल और भारत के सीमावर्ती तटीय इलाकों के लिए बेहद नाजुक माने जा रहे हैं।



