शेयर बाजार की तर्ज पर होगी उज्जैन के मंदिरों की ट्रेडिंग: देश का पहला ‘टेंपल बॉन्ड’ मॉडल तैयार
धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी उज्जैन से देश के वित्तीय और धार्मिक इतिहास में एक अनूठा अध्याय जुड़ने जा रहा है। मध्य प्रदेश सरकार सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए उज्जैन और मालवा क्षेत्र के प्रमुख मंदिरों के कायाकल्प के लिए देश का पहला टेंपल बॉन्ड (Temple Bond) मॉडल लेकर आई है। सबसे खास बात यह है कि ये बॉन्ड आने वाले एक से दो महीनों में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर लाइव हो जाएंगे, जिसके बाद आम लोग शेयर बाजार की तरह ही इनकी रोज ऑनलाइन खरीद-बिक्री (ट्रेडिंग) कर सकेंगे।
क्या है पूरी योजना और वित्तीय ढांचा
उज्जैन और उसके आस-पास के कुल 11 प्रमुख धार्मिक स्थलों के विकास और सौंदर्यवर्धन के लिए लगभग 1,124 करोड़ रुपये का एक बड़ा मास्टर प्लान तैयार किया गया है। इस बड़ी रकम को जुटाने के लिए सरकार सिर्फ बजट पर निर्भर नहीं है, बल्कि एक हाइब्रिड फाइनेंशियल मॉडल का इस्तेमाल कर रही है। इस योजना के तहत 200 करोड़ रुपये टेंपल बॉन्ड के जरिए बाजार से जुटाए जा रहे हैं। इसके अलावा, उज्जैन विकास प्राधिकरण (UDA) की गारंटी पर बैंकों से लगभग 600 करोड़ रुपये के लोन की प्रक्रिया भी लगभग पूरी हो चुकी है और बची हुई राशि केंद्र सरकार की ग्रांट व अर्बन चैलेंज फंड के जरिए मिलेगी।
आम निवेशक कैसे करेंगे ट्रेडिंग और क्या होगा फायदा
इस अनूठे प्रयोग के जरिए आम जनता को सीधे तौर पर धार्मिक स्थलों के विकास से जोड़ा जा रहा है। कोई भी आम नागरिक इन डिजिटल बॉन्ड्स को खरीद सकेगा। जब ये बॉन्ड शेयर बाजार की तरह ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध होंगे, तो निवेशक अपनी सुविधा के अनुसार इन्हें कभी भी खरीद या बेच सकेंगे।
इस मॉडल की तुलना इंदौर नगर निगम द्वारा पूर्व में जारी किए गए ‘ग्रीन बॉन्ड’ से की जा रही है। जिस तरह इंदौर के ग्रीन बॉन्ड निवेशकों को बैंकों से मिलने वाले सामान्य ब्याज की तुलना में करीब 8.25% प्रतिवर्ष का आकर्षक रिटर्न मिला था, ठीक उसी तरह उज्जैन के इन टेंपल बॉन्ड्स पर भी निवेशकों को बेहतर और सुरक्षित रिटर्न मिलने की उम्मीद है। इन बॉन्ड्स के पुनर्भुगतान (Repayment) और ब्याज का मुख्य जरिया इन मंदिरों को मिलने वाला चढ़ावा, दान और उनकी अन्य आय को बनाया गया है।
इन 11 प्रमुख मंदिरों की बदलेगी सूरत
इस योजना के तहत जिन 11 प्रमुख धार्मिक स्थलों को शामिल किया गया है, उनमें से कई पर जमीनी स्तर पर काम शुरू भी हो चुका है।
- मुख्य रूप से बाबा कालभैरव मंदिर, मंगलनाथ मंदिर, सिद्धवट और सांदीपनि आश्रम में विकास कार्य शुरू कर दिए गए हैं।
- आगर-मालवा जिले में स्थित प्रसिद्ध मां बगुलामुखी मंदिर (नलखेड़ा), अंगारेश्वर महादेव मंदिर और भूखी माता मंदिर के लिए निर्माण एजेंसियों को वर्क ऑर्डर जारी हो चुके हैं।
- इसके अलावा गढ़कालिका और शनि मंदिर जैसे अन्य महत्वपूर्ण स्थलों के कायाकल्प के लिए भी टेंडर प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
इस पूरी परियोजना का मुख्य उद्देश्य सिंहस्थ महापर्व से पहले उज्जैन आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को विश्वस्तरीय बुनियादी सुविधाएं, पार्किंग, सुगम दर्शन और बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करना है। देश का यह पहला ऐसा प्रयोग है जहां आस्था को आधुनिक वित्तीय साधनों से जोड़कर विकास का एक नया रास्ता तैयार किया जा रहा है।
