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जबलपुर में बरेला शराब दुकान पर एक के बाद एक गंभीर आरोप, आबकारी विभाग की कार्रवाई को लेकर मच गया बवाल

जबलपुर। शराब दुकानों को लेकर आमतौर पर विवाद होते हैं, लेकिन जब शिकायतें खुद सत्तारूढ़ दल के विधायक और स्थानीय निकाय अध्यक्ष की तरफ़ से आने लगें, तो मामला सिर्फ व्यापार का नहीं, सार्वजनिक सुरक्षा और सामाजिक संरचना का बन जाता है। बरेला स्थित शराब दुकान पिछले कुछ समय से चर्चा में है और वो भी किसी अच्छी वजह से नहीं। कुछ स्थानीय लोग दुकान संचालक का समर्थन करते हुए आबकारी विभाग पर आरोप लगा रहे हैं कि अधिकारी बेवजह कार्रवाई कर रहे हैं। लेकिन जब तथ्य और शिकायतों का विश्लेषण किया गया, तो सामने आया कि यह दुकान स्थानीय जनता के लिए परेशानी का केंद्र बन चुकी है।

भाजपा विधायक की शिकायत में गंभीर आरोप

बरेला शराब दुकान के खिलाफ सबसे पहली आधिकारिक शिकायत क्षेत्रीय भाजपा विधायक ने की थी। विधायक ने आरोप लगाया कि इस दुकान के खुलने के बाद:

आसपास के लगभग हर गांव में खुलेआम शराब बेचना शुरू हो गया है, और दुकानदार ने अपराध पृष्ठभूमि वाले लोगों को कर्मचारी बना रखा है, जिससे कानून व्यवस्था पर खतरा पैदा हो गया है।

नगर परिषद अध्यक्ष: “गली-गली बिक रही शराब”

भाजपा के ही नगर परिषद अध्यक्ष ने भी इस दुकान के संचालन पर नाराज़गी जताते हुए कहा:

“दुकान खुलने के बाद गली-गली में शराब बिक रही है। पहले लोग बच्चों के साथ गली में टहलते थे, अब डर के मारे घरों से बाहर नहीं निकलते।”

मारपीट की FIR: दुकान के दो कर्मचारियों पर दर्ज हुआ केस

जानकारी के अनुसार, हाल ही में दुकान के दो कर्मचारियों पर एक ठेलेवाले को पीटने का आरोप लगा, जिसकी FIR दर्ज हो चुकी है। पीड़ित ने स्पष्ट तौर पर आरोप लगाया कि ये लोग शराब बिक्री के दौरान झगड़े करते हैं और असामाजिक गतिविधियों में लिप्त हैं।

आबकारी विभाग की कार्रवाई: 429 पेटी अवैध शराब बरामद

लगातार मिल रही शिकायतों और क्षेत्रीय प्रतिनिधियों के दबाव के बीच, आबकारी विभाग ने बरेला शराब दुकान पर सघन छापा मारा और 429 पेटी बिना परमिट की शराब जब्त की।

कार्रवाई के दौरान:

  • • ना तो कोई परमिट प्रस्तुत किया गया,
  • • ना ही शराब का बैच नंबर दिया गया,
  • • बल्कि विभाग के अधिकारियों को धमकाया गया।

जिस अधिकारी पर लग रहे हैं आरोप, उसे कलेक्टर कर चुके हैं सम्मानित

हैरानी की बात यह है कि जिस आबकारी अधिकारी पर अब कुछ लोग आरोप लगा रहे हैं, उन्हीं अधिकारी ने वर्ष 2021 में 25 करोड़ रुपये की बकाया शराब राजस्व की वसूली की थी। उनके इस काम के लिए कलेक्टर द्वारा प्रशंसा और इनाम देने की सिफारिश की गई थी।

ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या कार्रवाई करने वाले ईमानदार अधिकारी को बदनाम करने की कोशिश हो रही है? क्या शराब माफिया अब जनसमर्थन का मुखौटा पहनकर प्रशासन पर दबाव बनाने की रणनीति अपना रहा है?

स्थानीय लोगों की दो फाड़ राय, लेकिन डर का माहौल बरकरार

कुछ लोग जहां दुकान संचालक के पक्ष में खड़े दिखते हैं, वहीं बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं और छोटे दुकानदार खामोश लेकिन डरे हुए हैं। एक महिला ने नाम न छापने की शर्त पर बताया:

“दुकान खुलने के बाद शाम होते ही लड़के शराब पीकर रास्ते में खड़े हो जाते हैं। हमारी बेटियों को स्कूल भेजना भी मुश्किल हो गया है।”

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