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जनगणना 2026: देश में पहली बार होगी जातिगत जनगणना! 40 सवालों की लिस्ट जारी, जानें आपसे क्या-क्या पूछा जाएगा

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आजादी के बाद पहली बार जनगणना में पूछी जाएगी जाति: कोविड वैक्सीन से लेकर बैंक अकाउंट तक पूछेंगे 40 सवाल, लिस्ट जारी


नई दिल्ली:
देश में होने वाली आगामी जनगणना को लेकर एक ऐतिहासिक निर्णय सामने आया है। स्वतंत्रता के बाद पहली बार राष्ट्रीय जनगणना में नागरिकों से उनकी जाति (Caste) से संबंधित सवाल पूछा जाएगा। इसके साथ ही सरकार ने जनगणना में पूछे जाने वाले 40 सवालों की सूची भी जारी कर दी है।
इस बार की जनगणना पहले की तुलना में काफी अलग और विस्तृत होगी। इसमें डिजिटल तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा और नागरिकों से उनके दैनिक जीवन, स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति से जुड़े कई नए सवाल पूछे जाएंगे।

मुख्य बिंदु: जनगणना 2026 की बड़ी बातें


जातिगत जनगणना (Caste Census): आजादी के बाद यह पहला मौका होगा जब सामान्य जनगणना प्रपत्र में जाति का कॉलम शामिल होगा।


डिजिटल माध्यम से डेटा कलेक्शन: एन्युमरेटर्स (गणक) इस बार कागजी फॉर्म के बजाय मोबाइल ऐप के जरिए डेटा दर्ज करेंगे।
डिजिटल स्व-गणना (Self-Enumeration): नागरिकों को खुद भी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज करने का विकल्प दिया जाएगा।


पूछे जाएंगे ये मुख्य 40 सवाल


जारी की गई लिस्ट के अनुसार, जनगणना अधिकारी घर-घर जाकर कुल 40 मुख्य विषयों पर जानकारी जुटाएंगे। इनमें से कुछ प्रमुख सवाल इस प्रकार हैं:
स्वास्थ्य और सुरक्षा:
आपने कोविड-19 (Covid-19) वैक्सीन कहां लगवाई (सरकारी अस्पताल, निजी केंद्र आदि)?
परिवार में किसी सदस्य को कोई गंभीर या पुरानी बीमारी है या नहीं?
वित्तीय स्थिति:
परिवार के सदस्यों के पास कुल कितने बैंक अकाउंट हैं?
क्या परिवार डिजिटल पेमेंट या इंटरनेट बैंकिंग का उपयोग करता है?
आवास और सुविधाएं:
मकान की स्थिति (पक्का/कच्चा) और स्वामित्व।
पीने के पानी का मुख्य स्रोत और बिजली/ऊर्जा का साधन।
घर में शौचालय और एलपीजी/पीएनजी कनेक्शन की उपलब्धता।
डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण:
घर में इंटरनेट कनेक्शन, स्मार्टफोन, लैपटॉप/कंप्यूटर और टेलीविजन की स्थिति।
वाहन की जानकारी (दोपहिया, चारपहिया आदि)।
जनसांख्यिकी और सामाजिक स्थिति:
परिवार के सदस्यों की संख्या, आयु, लिंग और वैवाहिक स्थिति।
शैक्षणिक योग्यता और रोजगार/व्यवसाय का विवरण।
जाति और धर्म से जुड़ा विवरण।


इस बार क्या होगा खास?
सरकार का मानना है कि इस विस्तृत डेटा संग्रह से कल्याणकारी योजनाओं (Welfare Schemes) को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी। जातिगत आंकड़े सामने आने से सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए नीतियां तैयार करना आसान होगा। इसके अलावा, डिजिटल प्रक्रिया के कारण जनगणना का अंतिम डेटा बहुत तेजी से प्रोसेस और जारी किया जा सकेगा।

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