( संवाददाता प्रफुल्ल तंवर )
पन्ना में प्रभारी मंत्री इंदर सिंह परमार के सामने गिड़गिड़ाए बुजुर्ग दंपत्ति, पैरों के सामने गिरकर बोले साहब हम जिंदा हैं, हमारी जमीन दिलवा दो.
एनटीवी टाइम न्यूज पन्ना/जिले के प्रभारी मंत्री इंदर सिंह परमार अपने 2 दिवसीय प्रवास पर पन्ना पहुंचे थे. इस दौरान वे ग्राम जनवार में आयोजित उद्यानिकी विभाग के कार्यक्रम में शामिल हुए, जहां उनके पैरों पर गिरकर बुजुर्ग दंपति गिड़गिड़ाते नजर आए. अचानक से ऐसा दृश्य देखकर वहां मौजूद लोग और प्रभारी मंत्री इंदर सिंह सन रह गए है. प्रभारी मंत्री के पैरों पर चरण वंदना करते हुए बुजुर्ग दंपत्ति ने कहा, “साहब हम जिंदा है, हमें हमारी जमीन दिलवा दो. वहीं प्रभारी मंत्री ने कहा कि पटवारी से कहते हैं और वहां से चल दिए.
दबंगों ने बुजुर्ग की हड़प ली जमीन
बुजुर्ग दंपत्ति भूरा आदिवासी उम्र 80 वर्ष एवं केशकाल आदिवासी उम्र 75 वर्ष आज से करीब 30 साल पहले कामकाज की तलाश में कटनी चले गए थे. आरोप है कि दबंगों ने बेटे के साथ मिलकर बुजुर्ग दंपत्ति का खेत और घर सहित करीब 6 एकड़ जमीन हड़प ली. इस मामले की जानकारी जब बुजुर्ग दंपति की भतीजी शीला आदिवासी को लगी, तो उन्होंने बुजुर्ग दंपत्ति की खोज खबर ली और कटनी से ढूंढकर पन्ना लेकर आई. जहां उनको पता चला कि उन्हें मृत घोषित कर दिया है. उनका नाम वोटर लिस्ट, आधार कार्ड और वृद्धा पेंशन से काट दिया गया है. बुजुर्ग न्याय के लिए दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है.
प्रभारी मंत्री के पैरों पर गिरी बुजुर्ग दंपत्ति
पन्ना जिले के प्रभारी मंत्री इंदर सिंह परमार उद्यानिकी विभाग के कार्यक्रम में ग्राम जनवार पहुंचे थे. तभी बुजुर्ग दंपति और उसकी भतीजी प्रभारी मंत्री से मिलने कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे, जहां बुजुर्ग दंपत्ति ने प्रभारी मंत्री के पैरों पर गिरकर न्याय दिलाने की गुहार लगाई. उन्होंने प्रभारी मंत्री से कहा, “साहब हम जिंदा हैं, हमारी जमीन हमें दिलवा दो. तब प्रभारी मंत्री ने कहा कि “एक-दो दिन में पटवारी से हम आपकी जमीन ढूंढवाते हैं.” यह कहकर प्रभारी मंत्री वहां से चले गए. जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है.

पीड़ित केशकली बाई ने बताया, “हमारी जमीन हमें पता नहीं कहां चली गई है. गांव में एक एकड़ थी और 5 एकड़ खेत थे. हमारा नाम वोटर लिस्ट, आधार कार्ड और वृद्धा पेंशन से कटवा दिया गया है. हमें मृत घोषित कर दिया है. हम लोग भीख मांग कर गुजर बसर कर रहे हैं. हम जिंदा हैं और हमें मृत घोषित कर दिया गया है और हमारी जमीन कहीं खो गई है.”
मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाकर बेटे ने बेची जमीन
पटवारी विमल यादव ने बताया, “मैं 12 साल पहले जनवार गांव में पटवारी के पद पर कार्यरत था. ये बुजुर्ग दंपत्ति करीब 30 साल पहले कटनी जिले में चले गए थे. इन लोगों ने वहां पर आप नाम बदलकर आधार कार्ड और परिचय पत्र ग्राम देवरा में बनवा लिए थे. ये लोग वो बात नहीं बता रहे हैं. इनके बेटे रामेश्वर आदिवासी बाहर मजदूरी का काम करता है. उसने 12 साल पहले माता-पिता की मृत्यु होने का पंचनामा बनवाकर 17 आरे (एक एकड़ से कम जमीन) जमीन गांव के एक आदिवासी को बेच दी थी. करीब 5 एकड़ जगह अभी भी बुजुर्ग के नाम पर है.”