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पाकिस्तानी अफसर ने पत्रकार बनकर CRPF के ASI से ली खुफिया जानकारी, हर माह देता था इतने पैसे

  • पिछले दो सालों में CRPF के ASI ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के अधिकारियों को कई संवेदनशील जानकारियां दीं। ये अधिकारी खुद को टीवी पत्रकार बताकर जवान से संपर्क करते थे। इस दौरान जवान को हर महीने 3,500 और विशेष जानकारी देने पर 12,000 रुपये दिए जाते थे।

जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हो चुकी हैं और देश में जासूसी करने वालों की तलाश में लगातार कार्रवाई कर रही हैं। इसी कड़ी में सुरक्षा एजेंसियों ने जासूसी के आरोप में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के एक सहायक उप निरीक्षक (ASI) को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के अधिकारी टीवी पत्रकार बनकर उससे संपर्क था। जिसके बाद ASI ने अधिकारियों को कई संवेदनशील जानकारियां दीं।

हर महीने मिलते थे इतने रुपये

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, ASI का नाम मोती राम जाट है और उसने कथित तौर पर पिछले दो सालों में पाकिस्तानी खुफिया अधिकारियों के साथ कई अहम जानकारी शेयर की हैं। जाट ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की पहलगाम आतंकी हमले के कुछ घंटे बाद जम्मू-कश्मीर की यात्रा, 50 पर्यटन स्थलों को बंद करने का फैसला, CRPF जवानों की आवाजाही और तैनाती की जानकारी, साथ ही आतंकवादियों की संदिग्ध गतिविधियां, ये सभी महत्वपूर्ण जानकारियां पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी को दीं हैं। इतना ही नहीं इस दौरान जवान को हर महीने 3,500 और विशेष जानकारी देने पर 12,000 रुपये मिलते थे।

जाट को दिल्ली से गिरफ्तार किया

एनआईए ने इस हफ्ते की शुरुआत में जाट को दिल्ली से गिरफ्तार किया है और उससे पूछताछ कर रही है। वह जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में सीआरपीएफ बटालियन में तैनात था और 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले से पांच दिन पहले उसका ट्रांसफर दिल्ली कर दिया गया था।

महिला के साथ शेयर किए गोपनीय दस्तावेज

CRPF सूत्रों के मुताबिक, “जाट से कथित तौर पर एक महिला ने संपर्क किया, जिसने खुद को चंडीगढ़ के एक बड़े टीवी न्यूज़ चैनल की रिपोर्टर बताया। उसने उससे कुछ जानकारियां साझा करने को कहा। उस महिला ने उन्हें कुछ मैसेज और फोन कॉल्स और वीडियो कॉल भी किए थे। इसके बाद मोती राम जाट ने कथित तौर पर उसके साथ गोपनीय दस्तावेज शेयर करना शुरू कर दिया। दो-तीन महीने बाद एक व्यक्ति जो पाकिस्तानी खुफिया अधिकारी था, उसने भी उसी न्यूज चैनल का पत्रकार बनकर उससे बातें बात करने लगा।”

कोई भी मैसेज डिलीट नहीं किया

केंद्रीय खुफिया एजेंसियों और सीआरपीएफ के अधिकारियों द्वारा जब मोती राम जाट के फोन की जांच की गई तो पता चला कि उसने कोई भी मैसेज डिलीट नहीं किया था। सूत्रों के मुताबिक, “जाट ने कथित तौर पर सुरक्षा बलों की तैनाती और उनकी हरकतों की जानकारी, खुफिया एजेंसियों के मल्टी-एजेंसी सेंटर (MAC) की रिपोर्ट, और कई बार आतंकी घटनाओं के जगहों से जुड़ी गोपनीय दस्तावेज भी मुहैया कराए।”

जाट ने बातचीत के दौरान अर्धसैनिक बलों की कुछ न्यूज क्लिप भी भेजी थीं। लेकिन दूसरी तरफ के लोगों ने उसे चेतावनी दी कि वह ऐसी जानकारी शेयर न करे जो पहले से ही सार्वजनिक रूप में मौजूद हो।

सूत्रों के अनुसार, “एक-दो महीने बाद, वे हर महीने की चौथी तारीख को उसे 3,500 देने लगे। साथ ही खास जानकारी के लिए उसे अतिरिक्त 12,000 भी मिलते थे। यह पैसा उसके और उसकी पत्नी के खातों में जमा होता था।” सूत्रों के मुताबिक, उसकी हरकतों पर कई हफ्तों तक नजर रखी जा रही थी। उसे पहलगाम आतंकी हमले से पांच दिन पहले दिल्ली भेज दिया गया था।

हालांकि पहलगाम आतंकी हमले के बाद अमित शाह की जम्मू-कश्मीर यात्रा की खबरें टीवी पर आ चुकी थीं, उसने दिल्ली पहुंचने के बाद भी यह जानकारी दुबारा साझा की। साथ ही बताया कि सुरक्षा कारणों से 50 पर्यटन स्थलों को बंद कर दिया गया था।

पटियाला हाउस कोर्ट ने जत को 6 जून तक हिरासत में भेजा

पटियाला हाउस कोर्ट के विशेष न्यायालय ने जाट को 6 जून तक एजेंसी की हिरासत में भेजा है। एनआईए के प्रवक्ता ने कहा, “हमने जाट को गिरफ्तार किया है। वह सक्रिय रूप से जासूसी में लिप्त था और 2023 से राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी गुप्त जानकारियां पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों को देता रहा है। हमें यह भी पता चला है कि वह खुफिया अधिकारियों से विभिन्न माध्यमों से पैसे भी लेता था।”

CRPF के प्रवक्ता ने बताया कि जाट को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। उन्होंने कहा, “केंद्रीय एजेंसियों के समन्वय में उसकी सोशल मीडिया गतिविधियों की लगातार निगरानी के दौरान, उसने नियमों और प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया पाया गया।”

नारायण शर्मा
एन टी वी टाइम न्यूज में मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ के लिए काम करता हूं।

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