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Saturday, February 14, 2026

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बड़गांव पत्रकारो को गाली गलोच मार पिट जान से मारने कि धमकी पर सलेया पुलिस ने तत्काल कार्यवाही कि मोके से फारार हो गया आरोपी राजू तेली

बड़गांव पत्रकारो को गाली गलोच मार पिट जान से मारने कि धमकी पर सलेया पुलिस ने तत्काल कार्यवाही कि मोके से फारार हो गया आरोपी राजू तेली

ब्यूरो रिपोर्टर

राजू तेली ने पत्रकार सतेंद्र जैन को गाली गलोच मारपीट जान मारने कि धमकी दी कबरेज कर रहे रोड कि न्यूज सूत्रों जानकारी के अनुसार राजू पर गुड़गांव मे अबैध शराव भी बरामद हुई थी
सतेंद्र जैन पत्रकार या उसके परिवार को कुछ भी होता है तो पूर्ण जिम्मेदारी राजू तेली और उनके सतियो कि होंगी सलेया चौकी प्रभारी रमेश सैनिक राजू कि तलाश कर रहे है पुलिस पहुँचे इससे पहले फरार होगया पत्रकारों पर हो रहे अत्याचार की रिपोर्टिंग करना, उनके मौलिक अधिकारों को सुरक्षित करने और न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। पत्रकारिता को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के रूप में देखा जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने भी यह स्पष्ट किया है कि किसी पत्रकार का समाचार लेख या वीडियो प्रथम दृष्टया देश की एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाला कृत्य नहीं है, इसलिए इसके आधार पर उन पर राजद्रोह का आरोप नहीं लगाया जा सकता है।
पत्रकारों के सामने आने वाली चुनौतियाँ:
पत्रकार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का प्रयोग करते हुए अक्सर हिंसा और धमकियों का सामना करते हैं। उन्हें हत्या, अपहरण, ऑनलाइन उत्पीड़न, धमकियाँ, यातना और मनमाने ढंग से हिरासत में लिए जाने जैसी खतरों का सामना करना पड़ सकता है।
अपराधियों के लिए सज़ा सुनिश्चित करना:
पत्रकारों के खिलाफ अपराध करने वालों को दंडित करना महत्वपूर्ण है। इसमें अपराध को आदेश देने वाले, साजिश रचने वाले, सहायता करने वाले या उकसाने वाले लोग भी शामिल हैं। पीड़ितों और उनके परिवारों को उचित उपचार तक पहुँच सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।
पत्रकार सुरक्षा कानून की आवश्यकता:
पत्रकारों के लिए एक सुरक्षा कानून की मांग की जाती है, जैसा कि मध्य प्रदेश में भी देखा गया, जहां पत्रकारों को लगातार अभद्रता और हमले का शिकार होना पड़ रहा है।
भारत में मानहानि कानून:
भारत में किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाली कोई भी बात कहना या लिखना मानहानि कहलाता है और यह भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 499 के तहत एक अपराध है।
पत्रकारों के लिए अधिकार और ज़िम्मेदारियाँ:
पत्रकारों के पास सच बताने और लोगों की आवाज़ सुनने की ज़िम्मेदारी होती है। उन्हें तथ्यों की जाँच और सार्वजनिक रिकॉर्ड तक पहुँच की आवश्यकता होती है, साथ ही सोशल मीडिया का उपयोग रिपोर्टिंग में पारदर्शिता लाने के लिए किया जाता है

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