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मो. यूनुस की कुटिल चाल, तीस्ता प्रोजेक्ट में करा रहे चीन की एंट्री, क्या करेगा भारत ?

तीस्ता नदी सिक्किम और प.बंगाल के लिए अहम. तीस्ता प्रोजेक्ट में चीन की हो रही एंट्री !

एन टीवी टाइम प्रतिनिधि/नई दिल्ली : बांग्लादेश में जब से शेख हसीना की सरकार गई है, तब से भारत के साथ संबंध सामान्य नहीं रहे हैं. बांग्लादेश की सरकार के अंतरिम प्रमुख मो. यूनुस लगातार भारत विरोधी रूख अख्तियार करते रहे हैं. इसी कड़ी में उन्होंने चीन का दौरा किया और तीस्ता प्रोजेक्ट के लिए चीन की मदद मांगी है. यूनुस को यह अच्छी तरह से पता है कि इस प्रोजेक्ट में चीनी एंट्री से भारत असहज हो सकता है, इसके बावजूद उन्होंने यह फैसला लिया. तीस्ता नदी भारत के लिए क्यों मायने रखती है, प्रोजेक्ट भारत के कितने करीब है और भारत की सुरक्षा के लिहाज से यह क्यों महत्वपूर्ण है, इसे समझने से पहले तीस्ता प्रोजेक्ट क्या है, इसकी जानकारी प्राप्त करते हैं.

तीस्ता प्रोजेक्ट क्या है –

तीस्ता नदी हिमालय के पौहुनरी पर्वत से निकलती है. यह सिक्किम से सटा क्षेत्र है. तीस्ता सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होते हुए ब्रह्मपुत्र नदी में मिल जाती है. इसके बाद यह बांग्लादेश की ओर चली जाती है. यानी तीस्ता ब्रह्मपुत्र नदी की सहायिका है. हिन्दू पुराणों के अनुसार ‘तिस्ता’ का अर्थ ‘त्रि-स्रोता’ या ‘तीन-प्रवाह’ है.

सिक्किम में तीस्ता पर बना पुल

तीस्ता नदी सिक्किम के मैदानी इलाकों से होकर गुजरती है. इन इलाकों के लोगों के लिए यह नदी काफी महत्वपूर्ण है. नदी यहां के मैदानी इलाकों को पानी की आपूर्ति करती है. इसके बाद नदीं पश्चिम बंगाल में प्रवेश करती है. यहां पर यह लगभग छह जिलों से गुजरती है. इन सभी इलाकों के लिए तीस्ता को लाइफ लाइन माना जाता है. उत्तरी बंगाल से यह नदी दक्षिण की ओर बहती है. उत्तरी क्षेत्रों की यह प्राथमिक नदी है. इसके बाद यह बांग्लादेश में लगभग 2800 वर्ग किलोमीटर एरिया को कवर करती है.

बांग्लादेश में तीस्ता (जमुना) नदी (Getty Image)

तीस्ता प्रोजेक्ट के तहत बांग्लादेश में बैराज का निर्माण होना है. इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य नदी बेसिन का बेहतर प्रबंधन, बाढ़ का नियंत्रण और जल संकट से निजात पाना है. अभी बांग्लादेश को जितना पानी मिलता है, वह इससे अधिक पानी की मांग कर रहा है.

बांग्लादेश वाले इलाके के अपस्ट्रीम में बहुउद्देशीय बैराज का निर्माण होना है. निचले हिस्से में आने वाले बहाव को नियंत्रित किया जाना है. बांग्लादेश में जिन इलाकों से नदी गुजरती है, कई जगहों पर इसकी चौड़ाई पांच किलोमीटर तक है. इतने बड़े एरिया में पानी के फैलने से लोगों को दिक्कतें आती हैं. बांग्लादेश चाहता है कि इस एरिया को छोटा किया जाए. उसके लिए निर्माण कार्य जरूरी है. कुछ जगहों पर नदी की गहराई को भी बढ़ाना है. ड्रेजिंग के जरिए नदी की गहराई बढ़ाई जा सकती है. ऐसा करने से नदी के तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को राहत मिलेगी.

बांग्लादेश का तर्क है कि तीस्ता प्रोजेक्ट के पूरे होने पर सैकड़ों एकड़ जमीन को हासिल किया जा सकेगा. उस पर खेती हो सकेगी. वे भूमिहीन लोगों के बीच भूमि को बांट सकते हैं. जमीन पर उद्योग-धंधे का भी विकास हो सकता है.

प्रोजेक्ट को लेकर क्या है विवाद

तीस्ता नदी का बांग्लादेश में कम वर्षा वाले मौसम में प्रवाह. यह सबसे बड़ी वजह है. तीस्ता नदी की कुल लंबाई 414 किलोमीटर है. इसमें से यह 151 किलोमीटर सिक्किम से, 142 किलोमीटर प.बंगाल से और 121 किलोमीटर बांग्लादेश से होकर बहती है. बांग्लादेश में नदी का औसत प्रवाह 7932.01 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड अधिकतम और 283.28 क्यूमेक न्यूनतम है. बांग्लादेश चाहता है कि उसे और अधिक पानी मिले. पानी सिक्किम और प.बंगाल के किसानों के लिए आवश्यक है. इसलिए भारत कभी नहीं चाहेगा कि उसके किसानों की अनदेखी हो. ऊपर से बांग्लादेश ने तीस्ता प्रोजेक्ट पर अपनी ही सरकार के फैसले को पलट दिया है. शेख हसीना सरकार ने इस प्रोजेक्ट में भारत को शामिल करने का निर्णय लिया था. पर मो. यूनुस ने इस प्रोजेक्ट में चीन को शामिल करने का निर्णय लिया है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक उसने चीन को आमंत्रित किया है. यह फैसला भारत के हित में नहीं है. क्योंकि बांग्लादेश तीन ओर से भारत से घिरा हुआ है. लिहाजा, उसका हरेक फैसला भारत की सुरक्षा पर असर डाल सकता है. वैसे, बांग्लादेश का जन्म ही भारत की वजह से हुआ था. भारत की भूमिका के कारण ही बांग्लादेश अस्तित्व में आया. इसके बवाजूद मो. यूनुस इसकी अनदेखी करने का दुस्साहस कर रहे हैं.

भारत के साथ विवाद सुलझाने की कोशिश

यूपीए के समय में इस विवाद को सुलझाने की कोशिश की गई थी. लेकिन बात आगे नहीं बढ़ सकी. उस समय प.बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विरोध किया था. इसके बाद मोदी सरकार ने 2015 में फिर से पहल की. ऐसा लगा कि विवाद को सुलझाया जा सकता है. पीएम मोदी के साथ प.बंगाल की सीएम ममता बनर्जी भी बांग्लादेश गई थीं. पर पिछले 10 सालों से कोई प्रगति नहीं हुई.

बांग्लादेश में जब शेख हसीना की सरकार थी, तो एक उम्मीद थी कि भारत और बांग्लादेश तीस्ता नदी विवाद को सुलझा सकते हैं. लेकिन हसीना के जाने के बाद समझौता खटाई में पड़ गया है. ऊपर से बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस की चीन यात्रा ने रही सही कसर पूरी कर दी है. यूनुस की इस यात्रा को लेकर जो खबरें आ रही हैं. उनके अनुसार चीन तीस्ता प्रोजेक्ट पर बांग्लादेश को सहयोग करेगा. पर जानकार मानते है कि यदि ऐसा हुआ, तो भारत का हित प्रभावित होगा. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस प्रोजेक्ट में चीन की मदद हासिल करने के लिए शेख हसीना भी गई थीं. लेकिन उन्होंने तीस्ता जल प्रोजेक्ट के लिए भारत के नाम पर ही मुहर लगाई. इस फैसले से चीन भन्ना गया था. यह प्रोजेक्ट करीब एक अरब डॉलर का है. बांग्लादेश के यूनुस की यात्रा के बाद एक बयान जारी कर बताया है कि बांग्लादेश तीस्ता रिवर क्रॉम्प्रीहेंसिव मैनेजमेंट एंड रेस्टोरेशन प्रोजेक्ट में चीनी कंपनियों को आमंत्रित किया गया है.

  • बांग्लादेश का अस्तित्व 1971 में आया.
  • 1972 में भारत-बांग्लादेश संयुक्त नदी आयोग का गठन.
  • 1983 में दोनों देशों के बीच तीस्ता को लेकर समझौता. 39 फीसदी भारत और 36 फीसदी बांग्लादेश को पानी देने का निर्णय. 25 फीसदी पानी पर बातचीत का प्रस्ताव.
  • 1996 में गंगा के पानी पर हुए समझौते के बाद तीस्ता पर फिर से उठा विवाद.
  • 2000 में तीस्ता पर एक मसौदा तैयार.
  • 2010 में इस मसौदे को मिली मंजूरी.
  • 2011 में ममता बनर्जी ने किया विरोध, मसौदे पर नहीं बढ़ी बात.
नारायण शर्मा
एन टी वी टाइम न्यूज में मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ के लिए काम करता हूं।

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