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विदिशा में मरने के बाद भी नहीं मिलती राहत, छलका जिला पंचायत अध्यक्ष का दर्द

जिला पंचायत अध्यक्ष गीता कैलाश रघुवंशी ने बताई जिले के गांवों की चौंकाने वाली कहानी, खुले आसमान में हो रहे शव दाह

विदिशा : एक ओर जहां देश अपने विकास और नई तकनीकों के जरिए पूरी दुनिया में चमक रहा है तो वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश के कुछ ऐसे गांव हैं, जो अपने पिछड़ेपन से आज भी नहीं उभर पाए हैं. विदिशा जिले की ग्यारसपुर तहसील के एक गांव में ऐसी स्थिति है कि यहां के लोग ये तक कहते हैं कि यहां मरने के बाद भी राहत नहीं मिलती. हम बात कर रहे हैं ग्राम पंचायत सीहोद के ग्राम सीहोद चक की, जहां की जिला पंचायत अध्यक्ष ने खुद बताई शमशान की अव्यवस्था की कहानी.

जिला पंचायत अध्यक्ष गीता कैलाश रघुवंशी ने बताया कि इस गांव में आज भी अंतिम संस्कार के लिए टीन शेड और चबूतरे तक की सुविधा नहीं है. जिला पंचायत अध्यक्ष गीता कैलाश रघुवंशी ने इस जमीनी हकीकत को उजागर करते हुए बड़ा बयान दिया है.

पिछले दिनों लोगों को खुले में करना पड़ा अंतिम संस्कार

शमशान घाट के लिए अबतक नहीं मिला पैसा

जिला पंचायत अध्यक्ष गीता कैलाश रघुवंशी ने बताया कि उन्होंने जिला पंचायत अध्यक्ष बनते ही मुक्तिधामों को अपनी प्राथमिकता में शामिल किया था. जिलेभर में नए मुक्तिधामों के निर्माण, पुराने की मरम्मत और पहुंच मार्ग निर्माण के लिए 2023 में मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री को पत्र सौंपा था. उन्होंने कहा – “अब तक एक भी पैसा नहीं मिला, जबकि हमने पूरी तकनीकी स्वीकृति और प्रस्ताव सौंप दिए थे.”

शमशान तक पहुंचने के लिए नहीं हैं सड़क

177 नए मुक्तिधाम बनने थे, 55 करोड़ की मांग रखी थी

जिला पंचायत अध्यक्ष ने बताया कि जिला पंचायत की ओर से 55 करोड़ रु की मांग शासन से रखी गई थी, जिससे पूरे जिले में अंतिम संस्कार के लिए आवश्यक ढांचा विकसित किया जा सकता था. गीता रघुवंशी का दावा है कि अगर यह राशि मिल जाती, तो जिले की सातों जनपद और पांचों विधानसभा क्षेत्रों में 737 पहुंच मार्ग, 177 नए मुक्तिधाम और 237 मरम्मत कार्य पूरे हो जाते, पर ऐसा हुआ नहीं.

विधायक और सांसदों पर भी उठाए सवाल

जिला पंचायत अध्यक्ष ने सवाल उठाते हुए कहा, ” जिले की पांच विधानसभा क्षेत्रों को 30-30 करोड़ रुपए मिले, सांसद भी दो हैं, तो डेढ़ सौ से दो सौ करोड़ की राशि तो जिले में आई ही है. फिर भी शांति धामों के लिए 50 करोड़ भी नहीं मिल पाए, यह कैसी प्राथमिकता है?”

जिला पंचायत अध्यक्ष गीता कैलाश रघुवंशी ने की भावुक अपील

ग्राम पंचायतों में सरपंच-सचिवों की लापरवाही

जिला पंचायत अध्यक्ष गीता कैलाश रघुवंशी ने बताया कि उन्होंने बाकायदा प्रस्ताव पास कराकर यह भी कहा था कि “कम से कम शेड और चबूतरे तो बना दें, वह भी मनरेगा से संभव है” लेकिन कई गांवों में सचिव और सरपंच रुचि ही नहीं ले रहे. उन्होंने आरोप लगाया कि सरपंच-सचिव गड़बड़ी में लगे हैं, काम करने में कोई रुचि नहीं है.

दाह संस्कार के लिए शेड तक नहीं

जिला पंचायत अध्यक्ष ने याद दिलाया कि साल 2021 में मध्यप्रदेश शासन ने मनरेगा से हर गांव में शांति धाम बनाने का आदेश दिया था, लेकिन इसका पालन नहीं हुआ। उन्होंने कहा, “रास्ता कीचड़ भरा हो तो भी कोई पार्थिव शरीर लेकर वहां पहुंच जाएगा, मगर दाह संस्कार के लिए चबूतरा और छाया तो होनी चाहिए.”

हाल की घटना के बाद लिया बड़ा फैसला

एक महीने पहले खुले में दाह संस्कार की घटना सामने आने के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष ने जिला पंचायत सीईओ ओमप्रकाश सनोडिया से आदेश जारी करवाया कि सभी सचिव-सरपंच अपने गांवों में मनरेगा से शांति धामों की मरम्मत और चबूतरा निर्माण कराएं. उन्हें 15 दिन का समय दिया गया है, जिसके बाद समीक्षा की जाएगी.

जिला पंचायत अध्यक्ष की भावुक अपील

जिला पंचायत अध्यक्ष गीता कैलाश रघुवंशी ने कहा, ” मैं ईटीवी भारत के माध्यम से सभी सचिव और सरपंचों से हाथ जोड़कर अपील करती हूं कि अंतिम संस्कार के लिए कम से कम चबूतरा और टीन शेड बना दें. शासन से भी आदेश है, और ये हमारी नैतिक जिम्मेदारी भी है.”

नारायण शर्मा
एन टी वी टाइम न्यूज में मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ के लिए काम करता हूं।

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