Monday, August 31, 2026

TOP NEWS

MP Police Recruitment 2026:...

MP Police Recruitment 2026: मध्य प्रदेश पुलिस में 9662 पदों पर बंपर भर्ती,...

भारत के विदेशी मुद्रा...

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में ऐतिहासिक उछाल, $791 अरब के नए रिकॉर्ड...

इंदौर: ड्रग्स पैडलर्स पर...

इंदौर: ड्रग्स पैडलर्स पर शिकंजा, ₹29 लाख की कोकीन के साथ विदेशी युवती...

सेक्टर -20 मार्केट में...

सेक्टर -20 मार्केट में हुई पुलिस-पब्लिक मीटिंग,भाजपा नेता नरेश अरोड़ा ने करवाया समस्याओं...
Homeदेश26 अक्टूबर वो तारीख जब भारत में मिला जम्मू कश्मीर !

26 अक्टूबर वो तारीख जब भारत में मिला जम्मू कश्मीर !

1947 का वह दौर भारतीय इतिहास का सबसे निर्णायक और विरोधाभासी अध्याय है। ब्रिटिश राज का अंत हुआ, और उपमहाद्वीप दो राष्ट्रों में विभाजित हो गया। लेकिन इस विभाजन की प्रक्रिया में, 560 से अधिक रियासतों का भविष्य एक अनसुलझा सवाल था। इन रियासतों में सबसे जटिल, सबसे खूबसूरत और सबसे विवादास्पद कहानी है जम्मू और कश्मीर की।

रियासत जम्मू और कश्मीर की भौगोलिक और जनसांख्यिकीय स्थिति उसे अद्वितीय बनाती थी। बहुसंख्यक मुस्लिम आबादी पर हिंदू शासक, महाराजा हरि सिंह का शासन था। महाराजा का शुरूआती इरादा एक स्वतंत्र और तटस्थ राष्ट्र के रूप में बने रहने का था। उन्होंने भारत और पाकिस्तान दोनों के साथ ‘यथास्थिति समझौते’ (Standstill Agreement) पर हस्ताक्षर किए ताकि संचार, व्यापार और अन्य सेवाएँ बाधित न हों।

लेकिन पाकिस्तान ने इस समझौते का सम्मान नहीं किया। उसने जल्द ही रियासत की आर्थिक नाकेबंदी शुरू कर दी—खाद्य सामग्री और ईंधन की आपूर्ति रोक दी गई। जब महाराजा ने दबाव के आगे झुकने से इनकार कर दिया, तो पाकिस्तान ने नृशंस आक्रामकता का मार्ग चुना।

अक्टूबर 1947 के तीसरे सप्ताह में, पाकिस्तानी सेना के समर्थन से पश्तून कबीलाई हमलावरों ने रियासत में घुसपैठ की। उनका मकसद कश्मीर पर जबरन कब्ज़ा करना था। ये हमलावर बर्बरता की हर सीमा लाँघ गए; उन्होंने मुजफ्फराबाद और बारामूला जैसे शहरों में लूटपाट, सामूहिक हत्याएं और बलात्कार किए।

जब हमलावर श्रीनगर से महज़ कुछ घंटों की दूरी पर थे, महाराजा हरि सिंह ने भारत सरकार से तत्काल सैन्य मदद की गुहार लगाई। दिल्ली में तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल की अध्यक्षता में बैठक हुई। भारत का रुख स्पष्ट था—किसी भी संप्रभु राष्ट्र की रक्षा के लिए, पहले कानूनी एकीकरण ज़रूरी है।

26 अक्टूबर 1947 को, महाराजा हरि सिंह ने भारतीय संविधान के तहत विलय पत्र (Instrument of Accession) पर हस्ताक्षर किए। इस कानूनी दस्तावेज़ ने जम्मू और कश्मीर को भारत संघ का हिस्सा बना दिया, जिसके तहत दिल्ली को रक्षा, विदेश मामले और संचार पर अधिकार प्राप्त हुए। यह एक ऐसा कानूनी आधार था, जो भारत और कश्मीर के रिश्ते को हमेशा के लिए स्थापित करता है।

विलय पत्र पर हस्ताक्षर होते ही, अगले ही दिन, 27 अक्टूबर को, भारतीय सेना के बहादुर जवान कश्मीर घाटी में उतर गए। यह दुनिया के सबसे ऊँचे और सबसे कठिन हवाई अभियानों में से एक था। सेना ने श्रीनगर को बचा लिया और हमलावरों को पीछे धकेलना शुरू किया।

लेकिन यहीं पर एक बड़ी राजनीतिक जटिलता पैदा हुई। भारत ने यह मामला संयुक्त राष्ट्र (UN) में उठाया। प्रधानमंत्री नेहरू ने जनमत संग्रह (Plebiscite) कराने की बात कही, लेकिन इसकी शर्त यह थी कि पाकिस्तान पहले PoK से अपनी सेना और कबीलाइयों को हटाए। पाकिस्तान ने यह शर्त कभी पूरी नहीं की और विवाद कायम रहा।

इसी दौरान, शेख अब्दुल्ला के नेतृत्व में स्थानीय राजनीतिक सहमति को देखते हुए, भारतीय संविधान में धारा 370 को अस्थायी प्रावधान के रूप में जोड़ा गया। यह एक ‘पुल’ था, जिसने राज्य को रक्षा, विदेश मामले और संचार को छोड़कर, शेष मामलों में कुछ स्वायत्तता दी।

धारा 370 ने देश की राजनीति में एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने इसका कड़ा विरोध किया। उनका ऐतिहासिक नारा था: “एक देश में दो विधान, दो निशान, दो प्रधान नहीं चलेंगे।” उनका मानना था कि यह विशेष दर्जा भारत की एकता और अखंडता के लिए खतरा है। मुखर्जी ने धारा 370 को समाप्त करने और कश्मीर के पूर्ण एकीकरण के लिए संघर्ष किया, जिसके लिए उन्होंने अपनी जान भी दी।

जम्मू और कश्मीर का विलय भारतीय इतिहास का एक ऐसा अध्याय है, जहाँ सैन्य पराक्रम, राजनीतिक दूरदर्शिता और कानूनी प्रक्रिया का संगम देखने को मिलता है। आज, उस विलय पत्र की वैधता और शक्ति ही कश्मीर को भारत का अविभाज्य अंग बनाती है। यह कहानी हमें याद दिलाती है कि राष्ट्रीय एकता और अखंडता की रक्षा के लिए भारत ने कितना बड़ा मूल्य चुकाया है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments