एक दिल दहला देने वाली घटना में, पारिवारिक विवाद और आपसी रंजिश के चलते एक व्यक्ति ने अपनी ही 6 वर्षीय भतीजी के साथ बर्बरता की। घटना के बाद गंभीर हालत में बच्ची को स्थानीय अस्पताल के आईसीयू (ICU) में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी ताऊ को गिरफ्तार कर लिया है।
मां से रंजिश का बदला बच्ची से लिया
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी का पीड़ित बच्ची की मां के साथ अक्सर विवाद होता रहता था। इसी रंजिश के चलते आरोपी ने इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया। पूछताछ में आरोपी ने पुलिस के सामने अपना जुर्म कबूल किया है। आरोपी ने कथित तौर पर बयान दिया कि वह बच्ची की मां से बेहद परेशान था और बच्ची भी उसे पसंद नहीं थी। आरोपी ने पुलिस से कहा, “वह (बच्ची) बहुत चपड़-चपड़ (ज्यादा बोलना) करती थी।” इसी खुन्नस में उसने सुनसान जगह पाकर मासूम को अपनी हवस का शिकार बना डाला।
हालत बेहद नाजुक, डॉक्टरों की टीम निगरानी में मुस्तैद
वारदात के बाद अत्यधिक रक्तस्राव और शारीरिक चोटों के कारण बच्ची अचेत हो गई थी। परिजनों को जब इस बात का पता चला, तो वे तुरंत उसे अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों के मुताबिक, बच्ची के आंतरिक अंगों में गंभीर चोटें आई हैं और उसे फिलहाल वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टरों की एक विशेष टीम उसकी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। डॉक्टर ने बताया कि अगले 48 घंटे बच्ची के स्वास्थ्य के लिए बेहद संवेदनशील हैं।
पोक्सो एक्ट और सख्त धाराओं के तहत मामला दर्ज
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने पीड़िता के परिजनों के बयान और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उसे जेल भेज दिया है।
क्षेत्रीय पुलिस अधीक्षक ने मीडिया को बताया, “यह एक अत्यंत जघन्य अपराध है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने का प्रयास करेगी। जांच को त्वरित गति से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।”
समाज में आक्रोश, सुरक्षा पर उठे सवाल
इस घटना के बाद से स्थानीय क्षेत्र में भारी आक्रोश व्याप्त है। महिला संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने आरोपी को कड़ी सजा देने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया है। लोगों का कहना है कि जब घर के भीतर ही बच्चियां सुरक्षित नहीं हैं, तो समाज में सुरक्षा की गारंटी कैसे दी जा सकती है।


