Tuesday, October 13, 2026

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अमेज़न के ‘रिफंड लूपहोल’ से करोड़ों का फर्जीवाड़ा: पार्सल भी रख लिया और पैसे भी ऐंठे, जानें कैसे हुआ इस हाई-टेक स्कैम का पर्दाफाश

अमेज़न के ‘रिफंड लूपहोल’ से करोड़ों का फर्जीवाड़ा: पार्सल भी रख लिया और पैसे भी ऐंठे, जानें कैसे हुआ इस हाई-टेक स्कैम का पर्दाफाश

क्राइम डेस्क: ई-कॉमर्स दिग्गज अमेज़न (Amazon) के तकनीकी सिस्टम में सेंध लगाकर करोड़ों रुपये का चूना लगाने वाले एक बेहद शातिर और हाई-टेक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। मध्य प्रदेश की गुना पुलिस ने इस सनसनीखेज मामले के मुख्य सूत्रधार शेखर मीणा सहित उसके साथियों को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस गिरोह ने अमेज़न की रिफंड पॉलिसी और कूरियर ट्रैकिंग सिस्टम के बीच के एक बड़े ‘लूपहोल’ (खामी) का फायदा उठाकर करीब 40 से 50 करोड़ रुपये का फ्रॉड किया है।

इस ठगी की कार्यप्रणाली (Modus Operandi) इतनी सुनियोजित थी कि इसने साइबर पुलिस और ई-कॉमर्स एक्सपर्ट्स दोनों को हैरान कर दिया है।

डिलीवरी और रिफंड के ‘टाइम गैप’ का उठाया फायदा

पुलिस जांच के अनुसार, यह गिरोह अमेज़न की रिफंड प्रक्रिया और कूरियर पार्टनर्स के बीच होने वाले डेटा अपडेट के समय (Time Lag) का फायदा उठाता था। इस पूरे खेल को स्टेप-बाय-स्टेप इस तरह अंजाम दिया जाता था:

  1. महंगे गैजेट्स को टारगेट करना: गिरोह के सदस्य अमेज़न ऐप पर फर्जी नामों और अलग-अलग राज्यों के पतों का इस्तेमाल कर अकाउंट बनाते थे। इसके बाद वे आईफोन (iPhone) जैसे करीब 1 लाख रुपये तक की कीमत वाले प्रीमियम स्मार्टफोन ऑर्डर करते थे।
  2. कूरियर कंपनी की ट्रैकिंग: आरोपी जानबूझकर उन ऑर्डर्स को टारगेट करते थे जिनकी डिलीवरी ‘ब्लूडार्ट’ जैसी बड़ी कूरियर कंपनियों के माध्यम से होनी होती थी।
  3. डिलीवरी को लटकाना: जब डिलीवरी कूरियर बॉय पार्सल लेकर पहुंचता, तो आरोपी घर पर न होने या किसी काम में व्यस्त होने का बहाना बनाकर डिलीवरी की तारीख को लगातार 10 से 12 दिनों के लिए आगे बढ़वा देते थे।
  4. अमेज़न से रिफंड की मांग: जैसे ही अमेज़न के सिस्टम में डिलीवरी ‘पेंडिंग’ या ‘लंबित’ दिखने लगती, आरोपी कस्टमर केयर से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराते थे कि उन्हें उनका कीमती पार्सल समय पर नहीं मिला है और वे ऑर्डर कैंसिल करना चाहते हैं।
  5. डबल मुनाफा (पैसा और पार्सल दोनों हाथ में): अमेज़न अपने कूरियर स्टेटस में डिलीवरी पेंडिंग देखकर ग्राहक के खाते में रिफंड प्रोसेस कर देता था। पैसे बैंक खाते में आते ही, आरोपी कूरियर बॉय या लॉजिस्टिक्स स्टाफ के साथ मिलीभगत कर या किसी तरह मौका पाकर उस लंबित पार्सल को भी कलेक्ट कर लेते थे। इस तरह उनके पास महंगा फोन भी आ जाता था और उसके पूरे पैसे भी रिफंड हो जाते थे।

फर्जी सिम और फर्जी बैंक खातों का मायाजाल

इस करोड़ों के फर्जीवाड़े को छुपकर अंजाम देने के लिए मास्टरमाइंड शेखर मीणा ने देशव्यापी नेटवर्क तैयार किया था। जांच में पता चला है कि ठगी में इस्तेमाल किए गए सभी सिम कार्ड्स और बैंक खाते फर्जी दस्तावेजों के जरिए अलग-अलग राज्यों से एक्टिवेट कराए गए थे। हर नए ऑर्डर के साथ नाम, मोबाइल नंबर और डिलीवरी एड्रेस बदल दिया जाता था, जिससे अमेज़न का एल्गोरिदम भी इस फ्रॉड को समय रहते पकड़ नहीं पाया।

पुलिस की कार्रवाई और आगे की जांच

गुना पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर उसके पास से बड़ी मात्रा में फर्जी दस्तावेज, डिजिटल सबूत और नकदी बरामद की है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस रैकेट के तार देश के कई अन्य राज्यों से जुड़े हैं और इसमें कुछ कूरियर कंपनियों के स्थानीय कर्मचारियों की संलिप्तता से भी इनकार नहीं किया जा सकता। पुलिस फिलहाल गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में छापेमारी कर रही है और अमेज़न के लीगल सेल को भी इस लूपहोल की तकनीकी जानकारी दी गई है।

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