Home मध्य प्रदेश अमझेराःमाता अमका-झमका की पवित्र व धार्मिक नगरी अमझेरा में बदलाव की शुरुआत

अमझेराःमाता अमका-झमका की पवित्र व धार्मिक नगरी अमझेरा में बदलाव की शुरुआत

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जितेंद्र चौहान
अमझेराःमाता अमका-झमका की पवित्र व धार्मिक नगरी अमझेरा में बदलाव की शुरुआत हो चुकी है। मध्य प्रदेश सरकार अपनी महत्वाकांक्षी श्रीकृष्ण पाथेय योजना के तहत धार जिले के प्राचीन धार्मिक नगर अमझेरा (प्राचीन कुंदनपुर) को भी तीर्थ स्थल के रूप में विकसित करने की तैयारीयां पूर्ण हो गई है। शासन द्वारा श्रीकृष्ण-रुक्मिणी पाथेय परियोजना विकसित करने के लिए योजना धरातल आ गई हैं।सरकार की योजनानुसार मंदिर परिसर और आसपास के सपास के क्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण और देवी रुक्मिणी के प्रेम-विवाह से जुड़े प्रसंगों को दर्शाने वाली कलाकृतियां स्थापित की जाएंगी। सरकार इस महत्वाकांक्षी योजना को लेकर पूर्व जिला पंचायत सदस्य व अमका झमका मंदिर निर्माण समिति के संरक्षक कमल यादव द्वारा विगत दिनों मुख्यमंत्री को मांग पत्र भी दिया गया था।

प्रथम चरण की राशि हुई मंजूर

अमका-झमका मन्दिर परिसर में आगंतुक दर्शानार्थियो की सुविधाओ को विकसित करने के लिए मप्र राज्य पर्यटन विकास निगम द्वारा प्रथम चरण में राशि रू 275,15 लाख की निविदा आमंत्रित की गई है, जिसमे प्रमुख रुप से बाउंड्री वॉल, चैनलिंक फेसिंग, मंदिर जीर्णोदार, जनसुविधा, पार्किंग, गार्ड रूम, पेयजल सुविधा, डस्टबिन,बेंचेस आदि कार्य सम्मिलित किए गए हैं। श्री कृष्ण रूक्मिणी लोक निर्माण को श्री कृष्ण पाथेय परियोजना के अंतर्गत सम्मलित किया गया है।जिसके कार्य हेतु वास्तुविद के चयन प्रक्रिया प्रचलन में है जो कि दूसरे चरण में वृहद और विशाल स्तर पर निर्माण कार्य किया जाएगा।

योजना के तहत मंदिर परिसर का सुंदरीकरण तथा पौराणिक प्रसंगों को जीवंत करने वाली संरचनाएं विकसित की जाएंगी। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार संबंधित अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि सिंहस्थ-2028 से पहले इस परियोजना का स्वरूप जमीन पर दिखाई देने लगे। इस योजना का उद्देश्य भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, उनकी लीलाओं, ज्ञान-दर्शन और संदेशों को देश-दुनिया तक पहुंचाना है।गौरतलब है कि मुख्यमंत्री स्वयं भी इस धार्मिक स्थल के प्रति विशेष आस्था रखते हैं और वे यहां दो बार दर्शन के लिए आ चुके हैं, जिनमें एक बार उन्होंने अमझेरा में कृष्ण जन्माष्टमी मनाई थी। इस बार भी संभावना जताई जा रही है की मुख्यमंत्री यहां जन्मा अष्टमी मनाने आ सकते हैं।

अमका-झमका का मंदिर अतिप्राचीन होकर सिद्ध शक्तिपीठ के रूप में जाना जाता है

धार जिला से 28किमी दुर दक्षिण पश्चिम में विन्‍ध्‍याचल की सुरम्‍य उपत्‍यकाओं में बसे अमझेरा नगर का प्राचीन वैभव अतिमहत्‍वपुर्ण है। इस नगर के इतिहास के गर्त में अनेकों पुराना ऐतिहासीक घटनाएं छुपी है। इस नगर के दक्षिण में स्थित माता अमका-झमका का मंदिर अतिप्राचीन होकर सिद्ध शक्तिपीठ के रूप में जाना जाता है। द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण इसी मंदिर से माता रूक्मिणी को हरण कर ले गए थे। यहा पर मालवा,निमाड,गुजरात महाराष्‍ट व राजस्‍थान के हजारों कि संख्‍या में लोगों की आस्‍था का प्रतीक है।उक्‍त मंदिर के बारे में प्रचलित है कि यहां पर मांगी गई हर प्रकार की मुराद पुरी होती है। मंदिर अत्‍यधिक चमत्‍कारी है, जिसके अनेक किस्‍से जनमानस में प्रचालित है।

इस स्वीकृति पर अमझेरा ही नहीं पूरे धार जिले के श्रद्धालुओं में हर्ष व्याप्त है और समिति अध्यक्ष प्रकाश राठौर, सदस्य गोविंद गुप्ता,राजेंद्र शर्मा, मुकेश पंडित, विक्रम राठौर,अभिजीत पंडित, अमित तिवारी,पिंटू सोनी, राजेश चौहान, अनुराग चंदेरिया, सुमित पंडित, निशीथ पंडित, शिवा मकवाना, अर्पित शर्मा आदि भक्तों ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और पर्यटन विभाग के समस्त अधिकारियों का आभार व्यक्त किया।

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