आजमगढ़ सामूहिक हत्याकांड: पत्नी, पुत्र और 2 पुरोहितों की हत्या करने वाला मुख्य आरोपी पुलिस मुठभेड़ में ढेर, बंधक बनाए गए बच्चे मुक्त
आजमगढ़ (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले से एक बेहद गंभीर और दुखद घटना सामने आई है। अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गहजी गांव में अपनी ही पत्नी, 8 वर्षीय पुत्र और दो पुरोहितों की गोली मारकर हत्या करने वाले मुख्य आरोपी अरविंद सिंह को पुलिस और सुरक्षाबलों की संयुक्त टीम ने आत्मरक्षार्थ की गई जवाबी कार्रवाई (मुठभेड़) में मार गिराया है। पुलिस ने आरोपी द्वारा बंधक बनाए गए बच्चों को मुक्त कराने के लिए करीब 8 घंटे तक चले अत्यंत संवेदनशील रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद यह कार्रवाई की।
पूजा-पाठ के विवाद में हुआ सामूहिक हत्याकांड
प्राप्त आधिकारिक विवरण के अनुसार, आरोपी अरविंद सिंह की पत्नी बबीता सिंह (32 वर्ष) परिवार की सुख-शांति के लिए घर में विशेष अनुष्ठान (नारायण बलि पूजा) करा रही थीं। अरविंद इस धार्मिक कार्य का विरोध कर रहा था। मंगलवार की शाम करीब 6 बजे जब अरविंद घर पहुंचा, तो पूजा होते देख उसका विवाद पुरोहितों और परिवार से शुरू हो गया।
विवाद के दौरान अरविंद ने अपने लाइसेंसी हथियार से अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। उसने अपनी पत्नी बबीता, पुरोहित महेंद्र पाठक (60 वर्ष) और पुरोहित अखिलेश मिश्रा (50 वर्ष) की मौके पर ही गोली मारकर हत्या कर दी।
तीन बच्चों को बनाया बंधक, रातभर घेराबंदी में जुटी रही पुलिस
इस वीभत्स हत्याकांड को अंजाम देने के बाद आरोपी अरविंद ने अपनी दो बेटियों और एक बेटे को कमरे में ले जाकर खुद को बंद कर लिया और उन्हें बंधक बना लिया। घटना की सूचना मिलते ही वाराणसी जोन के एडीजी, आजमगढ़ एसएसपी डॉ. अनिल कुमार, भारी पुलिस बल और एसओजी (SOG) की टीम के साथ मौके पर पहुंचे।
पुलिस अधिकारियों ने बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कई घंटों तक आरोपी से आत्मसमर्पण करने और बच्चों को छोड़ने की वार्ता की, लेकिन आरोपी लगातार पुलिस बल को भी निशाना बनाने की धमकी देता रहा।
पुत्र पर गोली चलाने के बाद पुलिस की त्वरित कार्रवाई
देर रात अचानक कमरे के भीतर से पुनः गोली चलने की आवाज आई। आरोपी अरविंद ने कमरे के अंदर ही अपने 8 वर्षीय मासूम पुत्र शौर्य को गोली मार दी। बच्चे के जीवन पर संकट देखते हुए पुलिस टीम ने तत्काल अत्यधिक संवेदनशीलता के साथ दरवाजा तोड़ा और कमरे में प्रवेश किया।
कमरे में प्रवेश करते ही आरोपी अरविंद ने पुलिस टीम पर सीधी फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस द्वारा की गई त्वरित जवाबी कार्रवाई में आरोपी अरविंद सिंह गंभीर रूप से घायल हो गया और अस्पताल ले जाते समय उसकी मृत्यु हो गई।
दो मासूम बच्चियों का सुरक्षित रेस्क्यू
इस अत्यंत कठिन ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने कमरे के भीतर से अरविंद की दो अन्य बेटियों (10 वर्षीय परी और 11 महीने की सान्वी) को पूरी तरह सुरक्षित निकाल लिया। वहीं, अरविंद की गोली से घायल उसके पुत्र शौर्य को तत्काल जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
इस पूरी दुखद घटना में आरोपी समेत कुल 5 लोगों की मृत्यु हुई है। पुलिस प्रशासन ने सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और क्षेत्र में कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रित है।
