Friday, October 9, 2026

TOP NEWS

Prabhat Pattan News: प्रभात...

Prabhat Pattan News: प्रभात पट्टन के पास गोधनी रोड पर मुख्य सड़क धंसने से गहरा गड्ढा बन गया है। सड़क अंदर से खोखली होने से बड़े हादसे की आशंका है। पूरी खबर पढ़ें।

MP News: मध्य प्रदेश...

MP Patwari News: मध्य प्रदेश में स्वामित्व योजना की रजिस्ट्री पर साइन न करने पर 102 पटवारियों पर बड़ी कार्रवाई। 27 बर्खास्त और 75 सस्पेंड, पूरी खबर पढ़ें।

स्टारलिंक विवाद: “क्या अंबानी...

Starlink India License Delay: भारत में स्टारलिंक लाइसेंस विवाद पर एलन मस्क, मुकेश अंबानी, और राहुल गांधी के बीच सोशल मीडिया पर जंग छिड़ गई है, जहां मस्क के 'Is Ambani the boss?' वाले ट्वीट पर राहुल गांधी ने तीखा तंज कसा है. जानिए क्या है पूरा मामला.

अमेरिका का बड़ा एक्शन:...

अमेरिकी सरकार का बड़ा एक्शन! TCS, इन्फोसिस, विप्रो और माइक्रोसॉफ्ट समेत 8 दिग्गज टेक कंपनियों को ग्रीन कार्ड प्रोग्राम से बैन किया। जानिए कर्मचारियों पर इसका क्या असर होगा।
Homeदेशमलेशिया से डिपोर्ट हुए बंबीहा गैंग के 3 गैंगस्टर: शुरुआत से लेकर...

मलेशिया से डिपोर्ट हुए बंबीहा गैंग के 3 गैंगस्टर: शुरुआत से लेकर बड़े अपराधों तक, पढ़िए इनसाइड स्टोरी

मलेशिया से डिपोर्ट हुए बंबीहा गैंग के 3 गैंगस्टर: शुरुआत से लेकर बड़े अपराधों तक, पढ़िए इनसाइड स्टोरी

नई दिल्ली/चंडीगढ़, 24 अगस्त 2026। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों और पंजाब पुलिस की एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) के विशेष सेल OFTEC (ओवरसीज फ्यूजिटिव ट्रैकिंग एंड एक्सट्रैडिशन सेल) ने देश विरोधी ताकतों और संगठित अपराध के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी चोट की है। बंबीहा गैंग के तीन सबसे बड़े विदेशी हैंडलर—जसप्रीत सिंह उर्फ जस बेहबल, अजय सिंह और पवनदीप सिंह—को मलेशिया से डिपोर्ट कर दिल्ली के आईजीआई (IGI) हवाई अड्डे पर गिरफ्तार कर लिया गया है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने साफ किया कि अपराधियों के खिलाफ इस वैश्विक धरपकड़ के तहत अकेले साल 2026 में अब तक 51 खूंखार अपराधियों को विदेशों से सुरक्षित वापस भारत लाया जा चुका है।

आइए जानते हैं इन तीनों गैंगस्टरों की शुरुआत कैसे हुई, ये गैंग में कब और कैसे शामिल हुए, और इनके कौन-से बड़े अपराधों ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा रखी थी।

  1. जसप्रीत सिंह उर्फ जस बेहबल: लोकल शूटर से इंटरनेशनल कमांडर बनने की कहानी
  • शुरुआत और बैकग्राउंड: जसप्रीत सिंह पंजाब के फरीदकोट जिले के बेहबल कलां गांव का मूल निवासी है। शुरुआती दिनों में वह स्थानीय स्तर पर छोटी-मोटी लूटपाट, अवैध हथियार रखने और लड़ाई-झगड़े जैसे मामलों में शामिल था। जब पंजाब पुलिस ने उस पर शिकंजा कसना शुरू किया, तो वह जून 2019 में फर्जी पासपोर्ट और ट्रेवल डाक्यूमेंट्स के सहारे मलेशिया भाग गया।
  • गैंग में एंट्री: मलेशिया पहुंचने के बाद जसप्रीत की मुलाकात पंजाब के ही एक और भगोड़े गैंगस्टर सिम्मा बेहबल से हुई। सिम्मा पहले से ही दविंदर बंबीहा गैंग का बड़ा नेटवर्क देख रहा था। सिम्मा के जरिए जसप्रीत की एंट्री मुख्य सिंडिकेट में हुई। अपनी चालाकी और ग्राउंड नेटवर्क को संभालने की क्षमता के कारण वह जल्द ही मलेशिया में बंबीहा गैंग का मुख्य रणनीतिकार और ‘इंटरनेशनल कमांडर’ बन गया।
  • सबसे बड़ा सनसनीखेज अपराध (2025 का मर्डर): जसप्रीत को साल 2025 में हुए यदविंदर सिंह की हत्या के मामले में मुख्य रूप से नामजद किया गया था। यदविंदर सिंह, पंजाब यूनिवर्सिटी (चंडीगढ़) के पूर्व छात्र नेता जीवनजोत सिंह चहल उर्फ जुगनू का निजी ड्राइवर था। जुगनू को डराने और अपना वर्चस्व कायम करने के लिए जसप्रीत ने मलेशिया में बैठकर पूरी साजिश रची, शूटरों का इंतजाम किया और उन्हें आधुनिक हथियार मुहैया कराए।
  1. अजय सिंह: राजस्थान से निकलकर बंबीहा गैंग का ‘रंगदारी किंग’ बना
  • शुरुआत और बैकग्राउंड: अजय सिंह राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले का रहने वाला है। राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों में लॉरेंस बिश्नोई गैंग और बंबीहा गैंग के बीच चल रही वर्चस्व की जंग के दौरान अजय सिंह ने बंबीहा गैंग का हाथ थामा। वह भारत में पुलिस की रडार पर आने के बाद अवैध तरीके से मलेशिया भाग निकला था।
  • गैंग में एंट्री और भूमिका: बंबीहा गैंग के विदेशी आकाओं को भारत में व्यापारियों को धमकाने के लिए स्थानीय हिंदी भाषी और साहसी लड़कों की जरूरत थी। अजय सिंह ने गैंग में अपनी जगह ‘एक्सटॉर्शन एक्सपर्ट’ (रंगदारी किंग) के रूप में बनाई। वह मलेशिया से इंटरनेट कॉलिंग (वर्चुअल नंबरों) के जरिए पंजाब, राजस्थान और दिल्ली के बड़े सटोरियों, real estate कारोबारियों और पंजाबी म्यूजिक डायरेक्टर्स को सीधे फोन कर करोड़ों की रंगदारी मांगता था। रंगदारी से वसूला गया पैसा हवाला नेटवर्क के जरिए विदेशों में गैंग के टॉप कमांडरों तक पहुंचता था।
  • बड़ा अपराध (लुधियाना ब्लास्ट की साजिश): अजय सिंह सिर्फ रंगदारी तक सीमित नहीं रहा। उसने साल 2025 में पंजाब के लुधियाना शहर में एक बड़े हैंड ग्रेनेड हमले की साजिश रची। उसने अपने ग्राउंड स्लीपर सेल्स को एक्टिव किया ताकि राज्य का सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ा जा सके।
  1. पवनदीप सिंह: हथियारों की डीलिंग और पाकिस्तान-ISI कनेक्शन
  • शुरुआत और बैकग्राउंड: पवनदीप सिंह भी राजस्थान के श्रीगंगानगर का ही रहने वाला है और अजय सिंह का सबसे भरोसेमंद साथी है। वह पढ़ाई छोड़ने के बाद अवैध हथियारों की तस्करी के धंधे में उतरा था। अजय सिंह के साथ मिलकर ही उसने बंबीहा गैंग के अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट को जॉइन किया और बाद में मलेशिया शिफ्ट हो गया।
  • गैंग में एंट्री और नार्को-टेरर लिंक: पवनदीप का मुख्य काम बंबीहा गैंग के लिए ‘लॉजिस्टिक्स’ यानी हथियारों और ड्रग्स की सप्लाई चेन को बनाए रखना था। वह सीमा पार (Cross-border) से आने वाले हथियारों के सिंडिकेट को ऑपरेट करता था।
  • ग्रेनेड हमला और आईएसआई लिंक: पवनदीप और अजय ने मिलकर 2025 में लुधियाना में तबाही मचाने के लिए अपने गुर्गों को चीनी P86 हैंड ग्रेनेड सप्लाई किए थे। हालांकि, पंजाब पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस ने समय रहते 27 अक्टूबर 2025 को उनके दो शूटरों को इस विस्फोटक के साथ गिरफ्तार कर लिया, जिससे यह बड़ा हमला नाकाम हो गया। जांच एजेंसियों को पुख्ता इनपुट मिले हैं कि पवनदीप का यह नेटवर्क सीधे तौर पर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI और वहां बैठे ड्रग तस्करों से जुड़ा हुआ था।

यह भी पढ़े

मलेशिया से बंबीहा गैंग के 3 कुख्यात गैंगस्टर डिपोर्ट, दिल्ली एयरपोर्ट पर गिरफ्तार

लॉरेंस बिश्नोई गैंग से दुश्मनी और कनाडा कनेक्शन

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, दविंदर बंबीहा गैंग की कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ गैंग के साथ सालों से खूनी दुश्मनी (Gang War) चल रही है। सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड के बाद से दोनों गैंग एक-दूसरे के गुर्गों को निशाना बना रहे हैं। मलेशिया से पकड़े गए ये तीनों गैंगस्टर—जसप्रीत, अजय और पवनदीप—कनाडा और अमेरिका में बैठे बंबीहा गैंग के टॉप सरगना ‘गौरव पटियाल उर्फ लक्की पटियाल’ के सीधे संपर्क में थे। लक्की पटियाल के इशारे पर ही ये तीनों मलेशिया से लॉरेंस बिश्नोई गैंग के ठिकानों की रेकी करवा रहे थे और पंजाब व राजस्थान में बिश्नोई गैंग के करीबियों पर हमले की योजना बना रहे थे। इनकी गिरफ्तारी से बंबीहा गैंग के ग्लोबल सिंडिकेट और लॉरेंस गैंग के खिलाफ उनके मंसूबों को करारा झटका लगा है।

पंजाब पुलिस का ‘ऑपरेशन प्रहार’ और इनसाइड स्टोरी

पंजाब के डीजीपी और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों की एक संयुक्त विंग पिछले 6 महीनों से मलेशिया में इन तीनों के डिजिटल फुटप्रिंट्स (IP Addresses और कॉलिंग डेटा) को ट्रैक कर रही थी। भारत सरकार ने इंटरपोल के माध्यम से मलेशियाई अधिकारियों को इनके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस और पुख्ता डोजियर सौंपे। इसके बाद मलेशियाई पुलिस ने इन्हें कुआलालंपुर के पास एक गुप्त ठिकाने से हिरासत में लिया और कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर भारत डिपोर्ट कर दिया।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments