बांग्लादेश में नशाखोरी का विरोध करने पर हिंदू परिवार के 4 लोगों की निर्मम हत्या, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
रंगपुर (बांग्लादेश)
बांग्लादेश के रंगपुर शहर में एक बेहद दर्दनाक और सनसनीखेज वारदात सामने आई है। घर की छत पर नशा करने से मना करने पर एक ही हिंदू परिवार के चार सदस्यों की गला घोंटकर नृशंस हत्या कर दी गई। घटना को अंजाम देने के बाद बेखौफ आरोपी कई घंटों तक उसी मकान में मौजूद रहे। उन्होंने घर के फ्रिज से सामान निकालकर खाया, स्नान किया और सबूत मिटाने के बाद अगली सुबह मौके से फरार हो गए। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं की स्थिति और उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
छत पर नशा करने से रोकने पर शुरू हुआ विवाद
पुलिस जांच के मुताबिक वारदात गुरुवार देर रात की है। दो आरोपी युवक पड़ोस की इमारत के सहारे सेवानिवृत्त शिक्षक और होम्योपैथिक डॉक्टर गणपति चक्रवर्ती के मकान की छत पर चढ़ आए थे। वे वहां ‘याबा’ नामक खतरनाक नशीले पदार्थ का सेवन कर रहे थे। छत से आ रही आहट को सुनकर 65 वर्षीय डॉ. गणपति चक्रवर्ती ऊपर पहुंचे और उन्होंने युवकों को अपनी छत पर नशा करने से सख्त लहजे में मना किया। पहचान उजागर होने और पुलिस में शिकायत के डर से दोनों आरोपियों ने आक्रोशित होकर गमछे से डॉ. गणपति का गला घोंट दिया।
साक्ष्य मिटाने के लिए पूरे परिवार का किया सफाया
पति को बचाने और शोर सुनकर जब उनकी 50 वर्षीया पत्नी प्रीतिलता चक्रवर्ती सीढ़ियों की तरफ बढ़ीं, तो आरोपियों ने उन्हें भी अपना शिकार बना लिया। इसके बाद अपनी पहचान पूरी तरह छिपाने और मामले को दबाने की नीयत से आरोपियों ने परिवार के बाकी सदस्यों को भी नहीं बख्शा। उन्होंने मास्टर्स की पढ़ाई कर रही 23 वर्षीया बेटी आगामी चक्रवर्ती और 5वीं कक्षा में पढ़ने वाले 12 वर्षीय मासूम बेटे प्रियं चक्रवर्ती की भी हत्या कर दी। मासूम के शव को आरोपियों ने बेड के नीचे छिपा दिया था।
वारदात के बाद घर में खाना खाया और मिटाए सुराग
हत्या की इस खौफनाक वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों आरोपी करीब 6 से 7 घंटे तक बेखौफ होकर उसी घर में डटे रहे। इस दौरान उन्होंने घर के फ्रिज से खीरे और मेज पर रखे खजूर निकालकर खाए। खुद पर लगे खून के धब्बे साफ करने के लिए उन्होंने घर में ही स्नान भी किया। शातिर आरोपियों ने फॉरेंसिक साक्ष्य नष्ट करने के मकसद से परिवार के सभी चार मोबाइल फोनों को वाशिंग पाउडर मिले पानी में डुबो दिया। इसके अलावा मामले को लूटपाट का रूप देने के लिए अलमारियों के ताले तोड़कर सामान इधर-उधर बिखेर दिया।
बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति और बढ़ती असुरक्षा का माहौल
रंगपुर की यह घटना बांग्लादेश में लगातार बिगड़ते सामाजिक माहौल और अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय में फैले खौफ को दर्शाती है। बीते कुछ समय में बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा, घरों में घुसकर हत्या, संपत्तियों पर कब्जे और धार्मिक स्थलों पर हमलों के मामलों में चिंताजनक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आए दिन छोटी-छोटी बातों या विवादों में अल्पसंख्यक समुदायों को निशाना बनाया जाना आम होता जा रहा है। कानून व्यवस्था का डर न होने के कारण असामाजिक तत्व बेखौफ होकर ऐसी वारदातों को अंजाम दे रहे हैं, जिससे वहां रह रहे हिंदू परिवारों में असुरक्षा और भय का माहौल गहराता जा रहा है।
दो दिन बाद खुला राज और पुलिस की कार्रवाई
घटना का खुलासा तब हुआ जब दो दिनों तक परिवार के सदस्यों के फोन बंद आने पर रिश्तेदारों को अनहोनी की आशंका हुई। शनिवार रात जब रिश्तेदार घर पहुंचे तो मुख्य दरवाजा बाहर से बंद मिला। सूचना मिलने पर पुलिस और फायर सर्विस की टीम ने मौके पर पहुंचकर दरवाजा तोड़ा, जहां से चारों शव बरामद हुए। रंगपुर पुलिस, सीआईडी और डिटेक्टिव ब्रांच ने डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जिन्होंने पूछताछ में अपना अपराध स्वीकार कर लिया है।



