चेन्नई से एक बेहद चौंकाने वाला और हृदयविदारक मामला सामने आया है, जहाँ डॉक्टरों की कथित लापरवाही के कारण एक नवजात शिशु की दाहिने हाथ की पाँचों उंगलियां काटनी पड़ीं। इस गंभीर मामले में चेन्नई उत्तर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक अस्पताल और डॉक्टर को दोषी मानते हुए ₹10 लाख का मुआवजा देने के साथ ही, इलाज पर खर्च हुए ₹23.65 लाख की भरपाई करने का आदेश दिया है। यानी, कुल मिलाकर ₹33 लाख से ज़्यादा का मुआवजा अस्पताल को देना होगा।
क्या है पूरा मामला?
आयोग ने अपने हालिया फैसले में शहर के एक अस्पताल और एक स्त्री रोग विशेषज्ञ को लापरवाही का दोषी पाया है। उन्हें कुल मुआवजा राशि के साथ ही मुकदमे की लागत के रूप में ₹10,000 का भुगतान करने का भी निर्देश दिया गया है।
बताया जा रहा है कि यह पूरा मामला ‘सर्वाइकल पेसेरी’ प्रक्रिया से जुड़ा है। इस प्रक्रिया के तहत सिलिकॉन रिंग को योनि में डाला जाता है ताकि गर्भाशय ग्रीवा को सहारा मिल सके। हालाँकि, आयोग ने पाया कि यह प्रक्रिया बिना किसी परीक्षण या आपातकालीन आवश्यकता के की गई थी और इसके लिए सहमति भी नहीं ली गई थी।
लापरवाही का नतीजा: समयपूर्व जन्म और गैंग्रीन
आयोग ने कहा कि इस अनाधिकृत और अनावश्यक प्रक्रिया के कारण 24 सप्ताह की गर्भवती महिला का समय पूर्व प्रसव कराना पड़ा। बच्चे की माँ का इसी अस्पताल में उपचार चल रहा था और जब यह प्रक्रिया की गई, तब वह 22 सप्ताह की गर्भवती थी। प्रसव के बाद नवजात शिशु को गहन चिकित्सा इकाई में ले जाया गया, जहाँ उसमें गैंग्रीन के शुरुआती लक्षण दिखाई दिए। गैंग्रीन की गंभीर स्थिति के कारण, डॉक्टर को नवजात के दाहिने हाथ की सभी पाँचों उंगलियां काटनी पड़ीं, जो बच्चे के जीवन के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
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