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‘फोन दीवार पर मारो, अरेस्ट खत्म’—डिजिटल अरेस्ट पर भड़के CJI, बैंकों की जवाबदेही तय करने का आदेश

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देश में ‘डिजिटल अरेस्ट’ और साइबर फ्रॉड के बढ़ते मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस सूर्या कांत, जस्टिस जोयमालया बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने साफ कहा है कि डिजिटल फ्रॉड के मामलों में बैंकों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। अगर बैंक अपनी लापरवाही या ‘ड्यू डिलिजेंस’ (उचित सावधानी) में फेल होते हैं, तो उन्हें पीड़ित ग्राहकों को पूरा हर्जाना देना होगा।

CJI की तल्ख टिप्पणी: ‘मोबाइल दीवार पर मारो, अरेस्ट खत्म’

अदालत में एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) वरिष्ठ अधिवक्ता एन.एस. नप्पिनई ने जब कोर्ट को बताया कि जागरूकता के बावजूद डिजिटल अरेस्ट की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं और हाल ही में एक महिला ने 2.5 करोड़ रुपये गंवा दिए, तो CJI सूर्या कांत ने हैरानी जताई।

CJI ने कहा, “पढ़े-लिखे लोग भी इस जाल में फंस रहे हैं, यह चिंताजनक है। लोकतांत्रिक देश में रहते हुए कोई कैसे सोच सकता है कि फोन पर उसे गिरफ्तार किया जा रहा है? फोन को दीवार पर मारो, अरेस्ट वहीं खत्म हो जाएगा। लोग खुद को पीड़ित बना रहे हैं।” कोर्ट ने कहा कि अगर किसी को शक हो तो वे तुरंत आधिकारिक माध्यमों पर जाकर जांच कर सकते हैं।

2026 में ₹800 करोड़ से ज्यादा की ठगी

सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने केंद्र सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए कहा कि पिछले साल के मुकाबले इस साल डिजिटल अरेस्ट के मामलों में करीब 50% की गिरावट आई है। हालांकि, इस पर CJI ने तल्ख टिप्पणी करते हुए डेटा सामने रखा कि मामलों में गिरावट के बावजूद, अकेले इस साल (2026 में) देश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों को इन अपराधों के कारण लगभग ₹800 करोड़ का नुकसान हो चुका है।

बैंकों पर लागू होगा ‘स्ट्रिक्ट लायबिलिटी’ का नियम

सुप्रीम कोर्ट ने दो मुख्य कमियों (ग्रे एरिया) को चिह्नित किया है—पहली बैंकों की जवाबदेही और दूसरी साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले ‘म्यूल अकाउंट्स’ (फर्जी बैंक खाते)। जस्टिस बागची ने स्पष्ट किया कि कोर्ट बैंकों पर ‘स्ट्रिक्ट लायबिलिटी’ (सख्त दायित्व) का क्लॉज लगाने जा रही है। अगर किसी बैंक अधिकारी की मिलीभगत या लापरवाही से किसी पीड़ित के खाते से पैसे कटते हैं, तो पीड़ित का डेबिट शून्य माना जाएगा और बैंक को पूरी राशि का हर्जाना देना होगा।

बेंच ने आरबीआई (RBI) को निर्देश दिया है कि वह अपने ‘केवाईसी (KYC) संशोधन निर्देश, 2026’ में इन सख्त नियमों को शामिल करे, जो 30 नवंबर तक अधिसूचित और 31 दिसंबर 2026 तक लागू होने की उम्मीद है।

सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख निर्देश

  • संदिग्ध ट्रांजैक्शन रोकना अनिवार्य: बैंक ग्राहकों के पुराने ट्रांजैक्शन पैटर्न से अलग होने वाले बड़े और असामान्य लेन-देन को तुरंत रोकें।
  • लोकल पुलिस को अलर्ट: असामान्य ट्रांजैक्शन की स्थिति में बैंक तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन को सूचित करें।
  • म्यूल अकाउंट्स पर शिकंजा: आरबीआई को निर्देश दिया गया है कि वह उन फर्जी खातों को तुरंत ब्लॉक करे जिनका इस्तेमाल पैसे ट्रांसफर करने के लिए किया जा रहा है।

अदालत ने कहा कि जब तक बैंकों पर दंडात्मक कार्रवाई का नियम नहीं बनेगा, तब तक वे अपनी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं करेंगे। कोर्ट ने सभी राज्यों की जांच एजेंसियों से भी डिजिटल अरेस्ट के दर्ज मामलों और उन पर हुई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है।

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