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Ntvtime Crimex: वो रहस्यमयी तांत्रिक जिसे न जहर मार पाया न सीने की गोली, जानिए 1916 के सबसे खौफनाक कत्ल ‘रासपुतिन मर्डर केस’ की पूरी फाइल

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Crimex Special: वो रहस्यमयी तांत्रिक जिसे न जहर मार पाया न सीने की गोली, जानिए इतिहास के सबसे खौफनाक कत्ल ‘रासपुतिन मर्डर केस’ की पूरी फाइल

क्राइम डेस्क (NTV TIME): रात के इस विशेष सेगमेंट Crimex में आज हम इतिहास के उस सबसे बड़े और काले पन्ने को खोलने जा रहे हैं, जिसकी मौत की गुत्थी आज भी दुनिया के फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स को हैरान कर देती है। यह कहानी है रूस के राजघराने को अपनी उंगलियों पर नचाने वाले ‘रहस्यमयी भिक्षु’ ग्रिगोरी रासपुतिन की। एक ऐसा इंसान जिसके बारे में दावा किया जाता है कि उसे मारने के लिए सायनाइड जैसा खतरनाक जहर और ताबड़तोड़ गोलियां भी छोटी पड़ गई थीं।

कौन था रासपुतिन और क्यों रची गई हत्या की साजिश?

साइबेरिया के एक छोटे से गांव में जन्मा रासपुतिन कोई मामूली इंसान नहीं था। उसने खुद को एक चमत्कारी संत घोषित कर दिया था। रूस के आखिरी राजा और रानी का इकलौता बेटा एक जानलेवा बीमारी से पीड़ित था। रासपुतिन ने अपनी कथित तंत्र-मंत्र की विद्या से उस बच्चे की जान बचाई और देखते ही देखते वह शाही परिवार का सबसे करीबी सलाहकार बन गया।

रूसी साम्राज्य के राजकाज और फैसलों में रासपुतिन का दखल इतना बढ़ गया कि वहां के अमीर नवाबों और शाही खानदान के लोगों को लगने लगा कि यह अघोरी पूरे रूस को बर्बाद कर देगा। इसी के बाद महल के कुछ रसूखदार लोगों ने रासपुतिन को रास्ते से हटाने का एक खौफनाक प्लान बनाया।

हत्या की वो रात और नाकाम होता ‘सायनाइड’

कड़कड़ाती ठंड वाली एक रात को साजिशकर्ताओं ने रासपुतिन को अपने महल में एक पार्टी के बहाने बुलाया। महल के तहखाने में रासपुतिन के लिए खास तौर पर ऐसे केक और वाइन परोसी गई, जिसमें पोटेशियम सायनाइड की इतनी भारी मात्रा मिलाई गई थी जो पल भर में कई इंसानों को सुला दे।

साजिशकर्ताओं के बयानों के मुताबिक, रासपुतिन ने वो केक खाए और वाइन भी पी, लेकिन उस पर जहर का कोई असर नहीं हुआ। वह हंसता रहा और बातें करता रहा। साजिशकर्ता डर से कांपने लगे कि क्या यह कोई इंसान है या कोई परछाई!

हॉरर फिल्म जैसी खौफनाक हकीकत

जब जहर ने काम नहीं किया, तो घबराए हुए मुख्य साजिशकर्ता ने अपनी रिवॉल्वर निकाली और सीधे रासपुतिन के सीने पर गोली दाग दी। रासपुतिन जमीन पर गिर गया। सबने राहत की सांस ली और लाश को ठिकाने लगाने की तैयारी करने लगे।

लेकिन तभी कुछ ऐसा हुआ जो किसी हॉरर फिल्म से कम नहीं था। कुछ ही मिनटों में रासपुतिन की लाश अचानक उठ खड़ी हुई। उसने अपनी डरावनी आंखों से कातिलों को देखा, उनका गला दबाने की कोशिश की और घायल होने के बावजूद महल के आंगन की तरफ भागने लगा। भागते हुए रासपुतिन पर पीछे से तीन और गोलियां दागी गईं, जिसके बाद वह बर्फ के ढेर पर गिर पड़ा।

पुलिस ने कैसे की इस अंधे कत्ल की वैज्ञानिक तफ्तीश?

रासपुतिन के अचानक लापता होने के बाद शाही खुफिया एजेंसी और शहर की पुलिस तुरंत हरकत में आई। पुलिस ने इस अंधे कत्ल की गुत्थी को सुलझाने के लिए निम्नलिखित कड़ियों को जोड़ा:

  • पिकेट ड्यूटी पर तैनात सिपाही की गवाही: तड़के सुबह गश्त कर रहे एक पुलिस अधिकारी ने प्रिंस युसुपोव के महल के पास गोलियां चलने की आवाज सुनी थी। जब उसने महल के संतरी से पूछा, तो उसने इसे ‘एक पागल कुत्ते को मारने की घटना’ बताकर टाल दिया। पुलिस ने इस बयान को संदिग्ध मानते हुए डायरी में नोट किया।
  • बर्फ पर जमी फॉरेंसिक कड़ियां: अगले दिन सुबह खोजी जासूसों की टीम जब युसुपोव महल के आंगन में पहुंची, तो वहां बर्फ पर फैले खून को साफ करने की कोशिशों के निशान दिखे। कड़कड़ाती ठंड के कारण खून पूरी तरह बर्फ में जम चुका था। वहीं तलाशी के दौरान पुलिस को बर्फ में धंसा हुआ रासपुतिन का एक भारी बूट (जूता) मिला।
  • कार का रूट मैप और लाश की बरामदगी: खुफिया पुलिस ने उन गाड़ियों की आवाजाही पर नज़र रखी जो रात के वक्त महल से बाहर निकली थीं। एक संदिग्ध गाड़ी के टायरों के निशान का पीछा करते हुए पुलिस जमी हुई नेवा नदी के पुल (Petrovsky Bridge) तक पहुंची। वहां बर्फ कटी हुई मिली और पुल के रेलिंग पर खून की बूंदें थीं। गोताखोरों को नदी में उतारकर तीन दिन की कड़ी मशक्कत के बाद रासपुतिन की बंधी हुई लाश को पानी से ढूंढ निकाला गया।

पोस्टमार्टम का सबसे बड़ा खुलासा

कत्ल को पूरी तरह छुपाने के लिए कातिलों ने रासपुतिन के हाथ-पैर बांधे और उसे चादर में लपेटकर जमी हुई नदी की बर्फ काटकर पानी में फेंक दिया।

जब तीन दिन बाद पुलिस को नदी से रासपुतिन की लाश मिली, तो असली मिस्ट्री सामने आई:

  • क्या नदी में डूबने से मौत हुई?: सालों तक यह अफवाह उड़ी कि जब रासपुतिन को नदी में फेंका गया तब भी वह जिंदा था और उसकी मौत डूबने से हुई। लेकिन असली पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने साफ किया कि उसके फेफड़ों में पानी नहीं था। यानी पानी में फेंकने से पहले ही उसकी जान जा चुकी थी।
  • जहर का सच: जांचकर्ताओं के मुताबिक रासपुतिन को मीठा खाना बिल्कुल पसंद नहीं था, इसलिए उसने शायद वह जहरीला केक खाया ही नहीं था, बल्कि कातिलों ने अपनी कहानी को खतरनाक बनाने के लिए जहर का झूठ फैलाया था।
  • मौत की असली वजह: फॉरेंसिक जांच के मुताबिक, रासपुतिन की मौत की असली वजह उसके माथे पर बिल्कुल करीब से मारी गई आखिरी गोली थी, जिसने उसके दिमाग को पूरी तरह डैमेज कर दिया था।

रासपुतिन की यह रहस्यमयी मौत आज भी इतिहास के सबसे वीभत्स और अनसुलझे षड्यंत्रों में गिनी जाती है, जिसने इसके ठीक बाद पूरे रूसी राजशाही साम्राज्य के अंत की नींव रख दी थी।


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