दुनिया की दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनी Google अपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को एक नए मुकाम पर ले जाने की तैयारी कर रही है। गूगल अब अपनी सबसे एडवांस्ड AI सेमीकंडक्टर चिप को अंतरिक्ष (Space) में भेजने और वहां की बेहद कठिन परिस्थितियों में उसकी परफॉर्मेंस को टेस्ट करने के लिए एक विशेष मिशन शुरू करने जा रही है। इस ऐतिहासिक परीक्षण का मुख्य उद्देश्य यह देखना है कि क्या एआई चिप्स अंतरिक्ष के अत्यधिक रेडिएशन (विकिरण) और ज़ीरो-ग्रेविटी में भी बिना किसी खराबी के काम कर सकती हैं।
मिशन का मुख्य उद्देश्य: अंतरिक्ष के रेडिएशन से निपटना
अंतरिक्ष का वातावरण संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है। सोलर रेडिएशन और कॉस्मिक किरणें सामान्य चिप्स के डेटा को करप्ट या उनके सर्किट को हमेशा के लिए डैमेज कर सकती हैं। गूगल इस मिशन के जरिए अपने हार्डवेयर की मजबूती को परखना चाहता है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि विपरीत परिस्थितियों में भी चिप की प्रोसेसिंग स्पीड कम न हो।
अंतरिक्ष में क्या काम करेगी यह AI चिप?
इस परीक्षण के सफल होने से सैटेलाइट्स और स्पेस ऑपरेशन्स के काम करने का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा। वर्तमान में सैटेलाइट्स पृथ्वी की जो तस्वीरें या मौसम का डेटा लेते हैं, उसे प्रोसेस करने के लिए जमीन (Earth Stations) पर भेजना पड़ता है। यह चिप सैटेलाइट को अंतरिक्ष में ही Real-time डेटा विश्लेषण करने की क्षमता देगी। इसके अलावा यह एआई चिप अंतरिक्ष में तैर रहे मलबे (Space Debris) को ट्रैक करेगी और सैटेलाइट्स को उनसे टकराने से बचाने के लिए तुरंत ऑटोमैटिक रास्ते बदलने में मदद करेगी।
भविष्य के स्पेस मिशनों पर क्या होगा असर?
यदि यह टेस्ट सफल रहता है, तो आने वाले समय में भविष्य के मंगल (Mars) और चंद्रमा (Moon) मिशनों में गूगल की इन चिप्स का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा सकेगा। इसके अलावा, इस रिसर्च से मिलने वाले डेटा का उपयोग धरती पर विमानों (Aviation) और डिफेंस सिस्टम को अधिक सुरक्षित और एडवांस्ड बनाने में भी होगा।