Home मध्य प्रदेश इंदौर का 100 करोड़ का गोल्ड स्मगलिंग कांड: DRI की बड़ी कार्रवाई,...

इंदौर का 100 करोड़ का गोल्ड स्मगलिंग कांड: DRI की बड़ी कार्रवाई, सराफा कारोबारी पिता-पुत्र की जमानत खारिज

0

इंदौर: देश के सबसे बड़े सराफा बाजारों में से एक इंदौर के सराफा में डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) ने 100 करोड़ रुपये से अधिक के सोने की अवैध खरीद-बिक्री (गोल्ड स्मगलिंग सिंडिकेट) का सनसनीखेज भंडाफोड़ किया है। केंद्रीय जांच एजेंसी DRI की कड़ाई से हुई पूछताछ में सामने आया है कि इंदौर के एक नामी आभूषण कारोबारी ने पिछले 2 से 3 सालों के भीतर भारी मात्रा में विदेशी तस्करी का सोना खरीदा था। इस मामले में इंदौर जिला कोर्ट ने मुख्य आरोपी सराफा व्यापारी दीपक खंडेलवाल और उनके बेटे नकुल खंडेलवाल की जमानत याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

कार की फ्रंट सीट के नीचे से शुरू हुई जांच की कड़ी

इस महा-घोटाले की शुरुआत तब हुई, जब DRI की टीम को इनपुट मिला था कि महाराष्ट्र के रास्ते भारी मात्रा में सोना इंदौर लाया जा रहा है। जांच एजेंसी ने घेराबंदी कर इंदौर बाईपास पर एक संदिग्ध कार को रोका और तलाशी ली। कार की फ्रंट सीट के नीचे छिपाकर रखे गए एक विशेष बॉक्स से सोने के बिस्किट बरामद हुए, जिनकी बाजार में कीमत 4.72 करोड़ रुपये आंकी गई थी। मौके से DRI ने रोमेल और यश लालवानी नाम के दो तस्करों को गिरफ्तार किया था।

3 साल में खरीदा 90 किलो तस्करी का सोना

पकड़े गए तस्करों ने पूछताछ में कबूला कि यह विदेशी सोना इंदौर के सराफा बाजार स्थित ‘जीडी ज्वेलर्स’ के मालिक दीपक खंडेलवाल को डिलीवर किया जाना था। इसके बाद DRI ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए जब मुख्य डीलर निखिल लालवानी और सराफा कारोबारी दीपक खंडेलवाल व उनके बेटे नकुल खंडेलवाल को राजस्थान के कोटा से दबोचा, तो सबसे बड़ा खुलासा हुआ।

जांच में सामने आया कि पिता-पुत्र की इस जोड़ी ने पिछले 2 से 3 सालों में अवैध सिंडिकेट के जरिए करीब 90 किलो विदेशी तस्करी का सोना खरीदा था, जिसकी मौजूदा बाजार कीमत 100 करोड़ रुपये से भी अधिक है।

कैश पेमेंट करने वाले बड़े ग्राहक और सुनार रडार पर

एजेंसी को पक्का अंदेशा है कि यह पूरा सोना विदेश से अवैध रास्तों से भारत लाया गया और बिना कस्टम ड्यूटी चुकाए, फर्जी बिलों या बिना बिल के सराफा बाजार में खपाया गया। DRI अब उन बड़े रसूखदार ग्राहकों और अन्य ज्वेलर्स की लिस्ट तैयार कर रही है, जिन्होंने इस 100 करोड़ के सिंडिकेट से सीधे कैश (नकद) भुगतान कर सोना खरीदा था।

कोर्ट में खारिज हुई जमानत

जिला कोर्ट में आरोपियों की तरफ से दलील दी गई कि वे पिछले 20 सालों से साफ-सुथरा व्यापार कर रहे हैं और केवल धार्मिक दर्शन के लिए राजस्थान गए थे, जहां उन्हें गलत तरीके से पकड़ा गया। हालांकि, विशेष लोक अभियोजक ने कोर्ट के सामने पुख्ता डिजिटल सबूत और कड़ियों को पेश किया, जिसके बाद अदालत ने मामले की गंभीरता और 100 करोड़ के राजस्व नुकसान को देखते हुए पिता-पुत्र को जमानत देने से साफ इंकार कर दिया।

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version