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इंदौर में राजनीतिक घमासान, महापौर पुष्यमित्र भार्गव को बताया ‘मित्रासुर’, कांग्रेस ने घेरा, सुधार के लिए दी 6 महीने की डेडलाइन

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इंदौर:
मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में सोमवार को नगर निगम और महापौर के खिलाफ राजनीतिक पारा गरमा गया. इंदौर कांग्रेस ने शहर की विभिन्न नागरिक समस्याओं को लेकर नगर निगम के खिलाफ एक अनोखा विरोध प्रदर्शन किया. इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने रीगल चौराहे पर महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने जमकर नारेबाजी की और महापौर पुष्यमित्र भार्गव को ‘मित्रासुर’ बताते हुए उनका पुतला दहन किया.

पुतले पर लिखे शहर के बड़े घोटाले और समस्याएं
नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष सोनिला मिमरोट के नेतृत्व में महिलाओं और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इस उग्र प्रदर्शन में हिस्सा लिया. प्रदर्शनकारियों द्वारा जलाए गए ‘मित्रासुर’ के पुतले के अलग-अलग चेहरों पर इंदौर शहर की प्रमुख समस्याओं और कथित अनियमितताओं से जुड़े नाम लिखे गए थे.

इस पुतले पर मुख्य रूप से फर्जी बिल घोटाला मित्र, फर्जी नामांतरण घोटाला मित्र, जलसंकट मित्र, गड्ढा मित्र, सफाईकर्मियों का झूठा मित्र, घटिया ट्रैफिक नवाचार मित्र, अवैध होर्डिंग मित्र, भेदभाव मित्र और भागीरथपुरा कांड मित्र जैसे गंभीर मुद्दों को दर्शाया गया था. प्रदर्शन के दौरान ‘महापौर मुर्दाबाद’, ‘धोखेबाज’ और ‘भाजपा मुर्दाबाद’ के नारों के साथ-साथ ‘राहुल गांधी जिंदाबाद’ के नारे भी गूंजे.

महापौर जनता के मित्र नहीं, शत्रु हैं: सोनिला मिमरोट
मीडिया से चर्चा करते हुए नेता प्रतिपक्ष सोनिला मिमरोट ने महापौर पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि महापौर पुष्यमित्र भार्गव खुद को इंदौर का मित्र बताते हैं, लेकिन असल में वे जनता के मित्र नहीं, बल्कि शत्रु साबित हो रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि मेयर अपनी जिम्मेदारियां निभाने में पूरी तरह विफल रहे हैं और उन्होंने शहर की सड़कों के गड्ढों, गंभीर जलसंकट, ट्रैफिक और ड्रेनेज जैसी बुनियादी समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दिया है. इसके साथ ही उन्होंने महापौर पर निगम के घोटालों में शामिल लोगों को संरक्षण देने का भी आरोप लगाया.

6 महीने का अल्टीमेटम, नहीं तो उग्र आंदोलन की चेतावनी
कांग्रेस ने नगर निगम प्रशासन और महापौर को चेतावनी देते हुए 6 महीने का समय दिया है. नेता प्रतिपक्ष ने साफ तौर पर कहा कि महापौर आगामी जनवरी तक अपने काम को साबित करके दिखाएं और इन नागरिक समस्याओं में सुधार करें. यदि अगले कुछ महीनों में शहर के हालात नहीं सुधरे, तो जनता का आक्रोश और बढ़ेगा, जिसके बाद कांग्रेस सड़कों पर उतरकर इससे भी बड़ा और उग्र आंदोलन करेगी.

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