खंडवा (वेब डेस्क)। भारतीय रेलवे के खान-पान की गुणवत्ता और यात्रियों की सुरक्षा पर एक बार फिर बड़ा सवालिया निशान खड़ा हो गया है। दिल्ली से चलकर एर्नाकुलम (केरल) की ओर जा रही मंगला एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 12618) में सफर कर रहे बच्चों के एक बड़े जत्थे के साथ शनिवार को सफर के दौरान एक दर्दनाक वाकया पेश आया। ट्रेन की आधिकारिक पैंट्रीकार (रसोई यान) से परोसा गया दूषित भोजन खाने के बाद करीब 30 बच्चों की तबीयत अचानक बेहद बिगड़ गई। ट्रेन के भीतर बच्चों को लगातार उल्टियां और पेट में असहनीय दर्द उठने के बाद चीख-पुकार मच गई। हालात बेकाबू होते देख रेल प्रशासन ने आनन-फानन में ट्रेन को मध्य प्रदेश के खंडवा रेलवे स्टेशन पर आपातकालीन रूप से रोका, जहां डॉक्टरों की भारी-भरकम टीम ने प्लेटफार्म पर ही अस्थाई अस्पताल बनाकर बच्चों का इलाज शुरू किया।
सफर के बीच मचा हड़कंप, सहमे सहयात्री
मिली जानकारी के मुताबिक, बच्चों का यह दल दिल्ली से एक शैक्षणिक व धार्मिक यात्रा के सिलसिले में केरल की ओर जा रहा था। शुक्रवार रात और शनिवार सुबह के भोजन के लिए बच्चों के गाइड ने मंगला एक्सप्रेस की पैंट्रीकार से खाना बुक किया था। खाना खाने के कुछ ही घंटों बाद, जैसे ही ट्रेन इटारसी को पार कर भुसावल रेल खंड की ओर बढ़ी, बच्चों को घबराहट और जी मिचलाने की शिकायत होने लगी।
देखते ही देखते एस-कोच (Sleeper Class) के भीतर करीब 30 बच्चे लगातार उल्टियां करने लगे। कुछ बच्चों की हालत इतनी बिगड़ गई कि वे डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) के कारण बेहोशी की हालत में आ गए। बच्चों की हालत देखकर डिब्बे में सवार अन्य यात्री भी सहम गए। सह-यात्रियों ने तुरंत रेल मदद ऐप (RailMadad) और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (ट्विटर) के माध्यम से रेल मंत्रालय और जबलपुर-भोपाल रेल मंडल को टैग करते हुए मेडिकल इमरजेंसी का अलर्ट भेजा।
खंडवा में अलर्ट मोड पर था अमला, प्लेटफार्म बना ‘अस्पताल’
कंट्रोल रूम से जैसे ही खंडवा रेलवे स्टेशन को ट्रेन नंबर 12618 में सामूहिक फूड प्वाइजनिंग की सूचना मिली, स्टेशन प्रबंधन और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) तत्काल हरकत में आ गया। स्थानीय जिला अस्पताल के डॉक्टरों और रेलवे के मेडिकल स्टाफ को दवाइयों, इंजेक्शन, ग्लूकोज और ओआरएस (ORS) के पैकेट्स के साथ प्लेटफार्म नंबर-1 पर तैनात कर दिया गया।
दोपहर में जैसे ही मंगला एक्सप्रेस खंडवा स्टेशन के प्लेटफार्म पर आकर रुकी, डॉक्टरों की टीम तुरंत प्रभावित बोगियों में दाखिल हुई। बच्चों की गंभीर स्थिति को देखते हुए कई बच्चों को प्लेटफार्म पर ही लिटाकर प्राथमिक उपचार, एंटी-वोमिटिंग (उल्टी रोकने के) इंजेक्शन और ओआरएस का घोल दिया गया। डॉक्टरों के मुताबिक, यह सीधे तौर पर बासी या संक्रमित भोजन (फूड प्वाइजनिंग) का गंभीर मामला है। राहत की बात यह रही कि समय रहते सही मेडिकल रिस्पॉन्स मिलने से सभी बच्चों की स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया और किसी भी बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराने की नौबत नहीं आई। लगभग 45 मिनट तक स्टेशन पर रुकने और डॉक्टरों से ‘फिट टू ट्रेवल’ का सर्टिफिकेट मिलने के बाद ट्रेन को आगे के लिए रवाना किया गया।
IRCTC और वेंडर पर गिरेगी गाज, जांच के आदेश
इस बेहद संवेदनशील घटना ने आईआरसीटीसी (IRCTC) की मॉनिटरिंग व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। यात्रियों ने मौके पर ही रेलवे अधिकारियों के सामने पैंट्रीकार प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और आरोप लगाया कि यात्रियों से मोटी रकम वसूलने के बाद भी उन्हें सड़ा-गला और बासी खाना परोसा जा रहा है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए रेलवे के वरिष्ठ वाणिज्यिक प्रबंधकों (LCM) ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। खंडवा और भुसावल स्टेशनों पर पैंट्रीकार में बचे हुए भोजन, कच्चे माल और पानी के सैंपल सील कर दिए गए हैं, जिन्हें तत्काल जांच के लिए लैब भेजा जा रहा है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यदि सैंपल की रिपोर्ट में भोजन दूषित पाया जाता है, तो संबंधित पैंट्रीकार वेंडर का ठेका (लाइसेंस) तुरंत निरस्त कर दिया जाएगा और उस पर भारी जुर्माना भी लगाया जाएगा।
