मध्य प्रदेश में युवाओं के लिए बड़ा फैसला: अब ‘5वीं कैटेगरी’ से होगी बेरोजगारों की पहचान, रोजगार से जोड़ेगी मोहन सरकार
भोपाल: मध्य प्रदेश में बेरोजगार और पढ़ाई छोड़ चुके युवाओं के लिए मोहन यादव सरकार ने एक नया और बड़ा मास्टरप्लान तैयार किया है। प्रदेश में अब युवाओं को एक नई यानी ‘पांचवीं कैटेगरी’ में वर्गीकृत कर उनकी पहचान की जाएगी। सरकार का मुख्य मकसद उन युवाओं को तलाशना है जो किसी कारणवश न तो आगे की पढ़ाई कर पा रहे हैं, न ही किसी तरह की ट्रेनिंग ले रहे हैं और न ही उनके पास रोजगार का कोई साधन है।
क्या है यह ‘5वीं कैटेगरी’ (NEET)?
अंतरराष्ट्रीय मानकों और योजनाओं के तहत इस वर्ग को NEET (Not in Education, Employment or Training) कहा जाता है।
- अब तक सामान्य तौर पर छात्र, नौकरीपेशा, स्वरोजगारी और पंजीकृत बेरोजगार की श्रेणियां ही प्रमुख मानी जाती थीं।
- इस नई पांचवीं श्रेणी के जरिए सरकार ऐसे ‘दिशाहीन’ या मुख्यधारा से छूटे युवाओं का अलग से डेटाबेस तैयार करेगी, जो किसी भी सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हो पाते।
सरकार ने बनाया विशेष वर्किंग ग्रुप
इस योजना को धरातल पर उतारने और ऐसे युवाओं की सटीक पहचान करने के लिए राज्य सरकार ने एक उच्च स्तरीय वर्किंग ग्रुप (Working Group) का गठन किया है। यह ग्रुप:
- प्रदेश के शहरी और ग्रामीण इलाकों में ऐसे युवाओं का सर्वे और डेटा तैयार करेगा।
- युवाओं की रुचि और स्थानीय अवसरों के हिसाब से स्किल डेवलपमेंट (कौशल विकास) के विशेष कोर्स तैयार करेगा।
- ट्रेनिंग पूरी होने के बाद युवाओं को सीधे रोजगार या स्वरोजगार योजनाओं से जोड़ने का काम करेगा।
युवाओं को कैसे मिलेगा इसका फायदा?
- घर बैठे पहचान: जो युवा पढ़ाई छोड़ चुके हैं या काम की तलाश में भटक रहे हैं, उन्हें सरकार खुद चिन्हित कर अवसर देगी।
- फ्री स्किल ट्रेनिंग: युवाओं को मार्केट डिमांड के हिसाब से आधुनिक तकनीकी और वोकेशनल ट्रेनिंग दी जाएगी।
- आर्थिक स्वावलंबन: ट्रेनिंग के बाद लोन, सब्सिडी और रोजगार मेलों के जरिए युवाओं को पैरों पर खड़ा होने में मदद मिलेगी।


