भोपाल: मध्य प्रदेश के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग में तकनीक के इस्तेमाल से भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई सामने आई है। राज्य के 374 नगरीय निकायों में पिछले तीन वर्षों के दौरान हुई 1,134 करोड़ रुपये से अधिक की सरकारी खरीदी का जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) सॉफ्टवेयर से ऑडिट किया गया, तो वित्तीय अनियमितताओं और सामानों की कीमतों में भारी अंतर का चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।
इस डिजिटल जांच रिपोर्ट के सामने आने के बाद विभाग के अपर मुख्य सचिव (एसीएस) संजय दुबे ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। रिपोर्ट के आधार पर कुल 392 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है, जिनमें 135 मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीएमओ) शामिल हैं।
मध्य प्रदेश नगरीय निकाय एआई ऑडिट: 2 लाख की गाड़ी 6 लाख में खरीदी, एआई ने खोली पोल
विभाग द्वारा आयोजित एक विभागीय समीक्षा और प्रशिक्षण बैठक के दौरान उस वक्त हड़कंप मच गया जब एसीएस संजय दुबे ने खुद प्रेजेंटेशन के जरिए अधिकारियों की कारगुजारियों को उजागर किया। एआई टूल द्वारा किए गए मूल्य विश्लेषण में सामने आया कि अलग-अलग निकायों ने एक ही उत्पाद को बेहद अलग और मनमानी कीमतों पर खरीदा है।
बैठक में एसीएस ने उदाहरण देते हुए बताया कि:
- एक नगरीय निकाय ने जिस कचरा वाहन को महज 2 लाख रुपये में खरीदा, वहीं दूसरे निकाय ने कुछ अतिरिक्त सामान का बहाना बनाकर उसी वाहन को 6 लाख रुपये में खरीद डाला।
- बाजार में मिलने वाली मात्र 400 रुपये की एलईडी लाइट को कुछ निकायों के रिकॉर्ड में 11,000 रुपये की दर पर खरीदा दिखाया गया।
- साफ-सफाई के लिए इस्तेमाल होने वाला लिक्विड केमिकल जहां एक निकाय ने 5 रुपये प्रति लीटर की दर से लिया, वहीं दूसरे निकाय ने इसके लिए 33,000 रुपये प्रति लीटर तक का भुगतान कर दिया।
सरकारी खजाने को नुकसान: औसत कीमत पर होती खरीदी, तो बचते जनता के 250 करोड़ रुपये
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है कि यदि यह पूरी खरीदी सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जेम पोर्टल) और ई-टेंडर्स के माध्यम से वास्तविक और औसत बाजार दरों पर की जाती, तो मध्य प्रदेश सरकार और जनता के लगभग 250 करोड़ रुपये बचाए जा सकते थे। अधिकारियों ने नियमों की आड़ लेकर और वेंडर्स के साथ साठगांठ कर सरकारी खजाने को भारी चपत लगाई है।
एसीएस संजय दुबे की चेतावनी: ट्रेनिंग के दौरान अधिकारियों को फटकार, ‘अब सीधे होगी जेल’
इस बड़े खुलासे के बाद राजधानी भोपाल में आयोजित विभागीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान एसीएस संजय दुबे का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने सभी निर्देशकों, कलेक्टर्स और मुख्य नगरपालिका अधिकारियों की मौजूदगी में लापरवाह कार्यप्रणाली को लेकर तीखी फटकार लगाई।
अधिकारियों को अंतिम चेतावनी देते हुए एसीएस ने साफ कहा कि सरकारी पैसे का इस तरह का दुरुपयोग अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वर्तमान वित्तीय वर्ष से यदि किसी भी निकाय की खरीदी प्रक्रिया में इस तरह का मूल्य अंतर या विसंगति पाई गई, तो संबंधित अधिकारियों को केवल निलंबन या विभागीय जांच का सामना नहीं करना पड़ेगा, बल्कि सीधे दंडात्मक और कानूनी कार्रवाई कर जेल भेजा जाएगा।
मध्य प्रदेश के अधिकारियों पर कार्रवाई: 7 सेवा से बाहर, कइयों की रुकी वेतन वृद्धि
इस पूरे मामले में अब तक 62 से अधिक गंभीर केस दर्ज कर 146 से अधिक अधिकारियों-कर्मचारियों को सीधे तौर पर लपेटे में लिया जा चुका है।
- विभाग ने सख्त कदम उठाते हुए अब तक 7 दोषी कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी हैं।
- लगभग 76 अधिकारियों की वेतन वृद्धि रोकने के आदेश जारी किए गए हैं।
- इसके अलावा, 17 सेवानिवृत्त अधिकारियों की पेंशन से वसूली की प्रक्रिया शुरू की गई है, जो इस गड़बड़ी में शामिल थे।
मध्य प्रदेश सरकार के इस तकनीक आधारित भ्रष्टाचार विरोधी अभियान ने प्रशासनिक गलियारों में खलबली मचा दी है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में जांच का दायरा बढ़ने पर कुछ और बड़े चेहरों पर गाज गिर सकती है।
