दमदार GDP के बीच पीएम मोदी का ‘आर्थिक राष्ट्रवाद’ का मंत्र, देशवासियों से की ये 3 बड़ी अपीलें
विशेष रिपोर्ट (नई दिल्ली):
भारतीय अर्थव्यवस्था ने वैश्विक चुनौतियों के बीच एक बार फिर शानदार रफ्तार पकड़ते हुए 7.8% की विकास दर (GDP Growth) हासिल की है। इस ऐतिहासिक कामयाबी पर देशवासियों को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बेहद महत्वपूर्ण और दूरगामी संदेश दिया है। पीएम मोदी ने एक वीडियो संदेश के जरिए देश की जनता से ‘आर्थिक राष्ट्रवाद’ अपनाने और देशहित में कुछ व्यावहारिक कदम उठाने का सीधा आग्रह किया है।
प्रधानमंत्री ने साफ किया कि दुनिया के मौजूदा हालातों को देखते हुए भारत को आर्थिक रूप से और अधिक आत्मनिर्भर बनने की जरूरत है।
1. “फिलहाल सोना खरीदने से बचें”
भारत में सोने को पारंपरिक रूप से सबसे सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन पीएम मोदी ने देशवासियों से एक लीक से हटकर अपील की है। उन्होंने कहा कि जब तक बहुत ज्यादा जरूरी न हो, नया सोना खरीदने से परहेज करें। दरअसल, भारत अपनी जरूरत का अधिकांश सोना विदेशों से आयात करता है, जिससे देश का एक बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार बाहर चला जाता है। पीएम मोदी की इस अपील का मकसद देश के पैसे को देश के भीतर ही बनाए रखना है।
2. “विदेश यात्राओं की जगह घरेलू पर्यटन को दें बढ़ावा”
प्रधानमंत्री ने नागरिकों से अनावश्यक रूप से विदेशों में छुट्टियां बिताने और विदेशों में डेस्टिनेशन वेडिंग करने के बजाय भारत के ही पर्यटन स्थलों को चुनने का आग्रह किया है। उन्होंने ‘वेडिंग इन इंडिया’ की बात दोहराते हुए कहा कि जब देश का पैसा देश के भीतर घूमेगा, तो इससे स्थानीय रोजगार बढ़ेगा और हमारे अपने छोटे व्यापारियों, होटल मालिकों और टूरिज्म सेक्टर को सीधा सहारा मिलेगा।
3. वैश्विक संकट के बीच भारत की मजबूत स्थिति
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने दुनिया के मौजूदा तनावपूर्ण हालातों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि साल 2020 के बाद से पूरी दुनिया में कहीं भी स्थिरता नहीं दिख रही है। चारों तरफ युद्ध, अशांति और सप्लाई चेन टूटने का संकट मंडरा रहा है। ऐसे मुश्किल दौर में भी अगर भारत 7.8% की तेज़ रफ्तार से आगे बढ़ रहा है, तो यह हर एक भारतवासी के कड़े परिश्रम और सामूहिक संकल्प शक्ति की वजह से संभव हो पाया है।
क्यों जरूरी हैं ये कदम?
आर्थिक जानकारों के मुताबिक, जब नागरिक सोने की खरीद और विदेशी यात्राओं जैसी चीजों पर खर्च कम करते हैं, तो देश का व्यापार घाटा (Trade Deficit) कम होता है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय रुपया मजबूत होता है और सरकार को महंगाई पर काबू पाने में मदद मिलती है। प्रधानमंत्री का यह संदेश साफ तौर पर दिखाता है कि ‘विकसित भारत’ का लक्ष्य केवल सरकारी नीतियों से नहीं, बल्कि नागरिकों के वित्तीय अनुशासन से ही हासिल किया जा सकता है।


