बालाघाट (मध्य प्रदेश): लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल जिले बालाघाट के जगला गांव पहुंचे। यहां उन्होंने हाल ही में विभिन्न बीमारियों और प्रशासनिक उपेक्षा के कारण असमय अपनी जान गंवाने वाले बैगा आदिवासी बच्चों के पीड़ित परिवारों (स्वजन) से मुलाकात की और उनके साथ बैठकर गहरा दुख साझा किया।
दौरे के मुख्य बिंदु और जमीनी घटनाक्रम:
- बच्चों से किया संवाद: जगला गांव जाने से पहले राहुल गांधी बिरसा विकासखंड के माटे प्राथमिक शासकीय स्कूल पहुंचे। वहां उन्होंने करीब 15 मिनट बच्चों से बात की, उनकी पढ़ाई और स्कूल में मिलने वाले मिड-डे मील (मध्याह्न भोजन) की गुणवत्ता की जानकारी ली।
- परिजनों को बंधाया ढांढस: राहुल गांधी बिरसा ब्लॉक के सुदूर जगला गांव पहुंचे, जहां बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण और आदिवासी समाज के लोग मौजूद थे। राहुल गांधी ने पीड़ित परिवारों के घर-घर जाकर जमीन पर बैठकर उनका दर्द सुना और उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिया।
- वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी: इस भावुक और संवेदनहीन परिस्थिति के बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और मध्य प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ पदाधिकारी भी राहुल गांधी के साथ मौजूद रहे।
प्रशासनिक आंकड़ों पर उठे सवाल
क्षेत्र में लगातार हो रही आदिवासी बच्चों की मौतों को लेकर स्थानीय दावों और सरकारी आंकड़ों में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। आधिकारिक तौर पर प्रशासन ने जहां 32 बच्चों की मौत की बात स्वीकारी है, वहीं स्थानीय ग्रामीणों और कांग्रेस कमेटी का आरोप है कि यह संख्या कहीं अधिक है। राहुल गांधी ने उन परिवारों से भी विशेष तौर पर मुलाकात की जिनके बच्चों की मौत का कारण कथित रूप से सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हो पाया है।
“दुख की घड़ी में आदिवासियों के साथ खड़ा हूं” – राहुल गांधी
इस दौरे को लेकर राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर सरकार पर निशाना साधते हुए लिखा, “बीमारी और सरकार की उपेक्षा से अपने मासूम बच्चों को खोने वाले आदिवासी परिवारों से मिलने आज बालाघाट आया हूं। उन्हें यह बताने आया हूं कि इस दुख में वे अकेले नहीं हैं—मैं और पूरी कांग्रेस पार्टी उनके साथ मजबूती से खड़े हैं।”
भाजपा का पलटवार
दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राहुल गांधी के इस दौरे की तीखी आलोचना की है। सत्तापक्ष की ओर से इसे कांग्रेस की केवल राजनीति और “पॉलिटिकल स्टंट” करार दिया गया है। सरकारी प्रवक्ता और स्थानीय नेताओं का दावा है कि प्रभावित क्षेत्रों में लगातार डॉक्टरों की टीमें तैनात हैं और स्वास्थ्य शिविर लगाकर स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में लिया जा रहा है।


