Wednesday, October 7, 2026

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राजगढ़ में खौफनाक बीमारी: 40 से ज्यादा मरीजों की गल रही चमड़ी, एक का काटना पड़ा पंजा; डॉक्टरों ने दी चेतावनी

मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले (विशेषकर ब्यावरा और आसपास के ग्रामीण इलाकों) में एक अज्ञात और खौफनाक त्वचा संक्रमण ने पैर पसार लिए हैं। इस बीमारी में मरीजों की त्वचा अचानक सड़ने और गलने लगती है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों और स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, अब तक 40 से अधिक मरीज इस गंभीर बीमारी की चपेट में आ चुके हैं। संक्रमण इतना घातक रूप ले चुका है कि एक मरीज का पैर का पंजा काटना पड़ा है, वहीं कई अन्य अस्पताल में भर्ती हैं।
कैसा है यह संक्रमण और क्या हुए नुकसान?
यह बीमारी त्वचा में बैक्टीरिया या टॉक्सिन संक्रमण की वजह से तेजी से फैलती है, जिसे मेडिकल भाषा में ‘नेक्रोटाइजिंग फैसाइटिस’ (Necrotizing Fasciitis) या ‘गैंग्रीन’ का रूप माना जा रहा है।
पैर का पंजा काटना पड़ा: ब्यावरा के पास के एक मरीज के पैर में शुरुआती लालपन और सूजन आई, जो 2 से 3 दिनों के भीतर इतनी बढ़ गई कि मांस गलकर सड़ने लगा। जान बचाने के लिए डॉक्टरों को सर्जरी करके उसका पंजा काटना पड़ा।
40 से अधिक प्रभावित: सिविल अस्पताल ब्यावरा और राजगढ़ जिला अस्पताल में लगातार ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं, जिनकी त्वचा पर बड़े-बड़े छाले पड़ रहे हैं और चमड़ी गल रही है।
बीमारी के मुख्य लक्षण
डॉक्टरों के अनुसार, यह संक्रमण बहुत तेजी से त्वचा की अंदरूनी परतों (Tissues) तक पहुंचता है। मुख्य लक्षण निम्नलिखित हैं:
अचानक लालपन और सूजन: त्वचा के किसी हिस्से (विशेषकर हाथ या पैर) पर अचानक लाल धब्बा बनना और सूजन आना।
तेज जलन और असहनीय दर्द: प्रभावित जगह पर सामान्य से बहुत ज्यादा दर्द और जलन होना।
फफोले और त्वचा का काला पड़ना: त्वचा पर पानी या मवाद भरे फोले बनना और धीरे-धीरे चमड़ी का रंग काला या नीला पड़कर गलना।
तेज बुखार और कमजोरी: शरीर में इन्फेक्शन फैलने के कारण मरीज को तेज बुखार आता है।
डॉक्टरों की सख्त चेतावनी और सलाह
ब्यावरा सिविल अस्पताल और जिला स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों ने आम जनता के लिए एडवाइजरी जारी की है:
शुरुआती लक्षणों को न टालें: त्वचा पर हल्का सा भी लालपन, सूजन या दर्द महसूस हो, तो इसे सामान्य कीड़ा काटना या एलर्जी समझकर नजरअंदाज न करें।
मेडिकल स्टोर से मनमर्जी दवाई न लें: बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी क्रीम या एंटीबायोटिक न लें। देरी होने पर इन्फेक्शन हड्डियों तक पहुंच सकता है।
घाव को दूषित पानी से बचाएं: बारिश या गंदगी के मौसम में कटी-छिली त्वचा को साफ रखें और दूषित पानी या मिट्टी के संपर्क में आने से बचें।
तुरंत अस्पताल पहुंचे: शुरुआती 24 घंटों में सही एंटीबायोटिक इलाज मिलने पर मरीज की त्वचा और अंग को सड़ने से बचाया जा सकता है।
स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए भोपाल और इंदौर से भी विशेषज्ञों की टीम स्थिति पर नजर बनाए हुए है। प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य विभाग की टीम सर्वे कर रही है, पानी और मिट्टी के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं ताकि संक्रमण के सटीक कारण (बैक्टीरिया या किसी जहरीले कीट/केमिकल) का पता लगाया जा सके।

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