भागीरथपुरा दूषित जल कांड के जिम्मेदार अफसर को बनाया रायसेन का कलेक्टर, कांग्रेस का तीखा हमला
भोपाल/इंदौर। मध्य प्रदेश शासन द्वारा किए गए हालिया प्रशासनिक फेरबदल के बाद राज्य की सियासत गरमा गई है। इंदौर नगर निगम में जल प्रदाय विभाग के तत्कालीन अपर आयुक्त रहे आईएएस अधिकारी रोहित सिसोनिया को रायसेन जिले का नया कलेक्टर नियुक्त किया गया है। इस नियुक्ति पर प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जताते हुए प्रशासनिक जवाबदेही और सरकार की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है भागीरथपुरा जल कांड और अधिकारी की भूमिका?
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में सीवेज का पानी पीने के पानी की पाइपलाइन में मिलने के कारण एक भीषण जल त्रासदी हुई थी। दूषित पानी के सेवन से बड़े पैमाने पर लोग उल्टी, दस्त और डिहाइड्रेशन का शिकार होकर अस्पतालों में भर्ती हुए थे। इस त्रासदी में कई मासूम नागरिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी।
घटना के वक्त रोहित सिसोनिया इंदौर नगर निगम में जल विभाग के प्रभारी अपर आयुक्त थे। प्रशासनिक लापरवाही और ढीली निगरानी के गंभीर आरोपों के बाद तत्कालीन समय में सरकार ने उन्हें इस पद से हटा दिया था।
न्यायिक आयोग की रिपोर्ट में हुआ था लापरवाही का खुलासा
इस पूरे मामले पर गठित न्यायिक जांच आयोग ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट में स्पष्ट किया था कि पाइपलाइन बदलने के टेंडर में करीब 859 दिनों की अत्यधिक और अनावश्यक देरी की गई, जिसके कारण यह बड़ा हादसा टाला नहीं जा सका। आयोग की रिपोर्ट में तत्कालीन उच्च अधिकारियों को इस प्रशासनिक ढिलाई और खराब निगरानी के लिए जिम्मेदार माना गया था।
कांग्रेस ने खोला मोर्चा, फैसले को वापस लेने की मांग
न्यायिक आयोग की रिपोर्ट में लापरवाही दर्ज होने के बावजूद रोहित सिसोनिया को एक अहम जिले (रायसेन) की कमान सौंपे जाने पर विपक्ष सरकार पर हमलावर है।
कांग्रेस नेताओं ने इस फैसले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि इतनी बड़ी आपराधिक घटना के जिम्मेदार अधिकारी को सरकार ने पुरस्कृत कर रायसेन का कलेक्टर बना दिया है। क्या सरकार ने पोस्टिंग देते समय जांच पैनल की रिपोर्ट और तथ्यों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया?
विपक्ष ने मांग की है कि इस नियुक्ति को तुरंत रद्द किया जाए, दोषी अधिकारियों पर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज हो और पीड़ित परिवारों को पूर्ण न्याय मिले। प्रशासनिक हल्के में भी इस बात को लेकर चर्चाएं तेज हैं कि न्यायिक जांच में नाम आने के बाद भी इतनी बड़ी पोस्टिंग कैसे दे दी गई। अब देखना यह होगा कि बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच शासन इस फैसले पर क्या रुख अपनाती है।
