कीव: रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध में अब एक अभूतपूर्व तकनीकी बदलाव देखने को मिल रहा है। मोर्चे पर अपने सैनिकों की जान बचाने के लिए यूक्रेनी सेना ने पहली बार बड़े पैमाने पर मानव रहित और बारूद से लैस ‘सुसाइड ग्राउंड रोबोट्स’ (Kamikaze UGVs) को अग्रिम पंक्ति में तैनात कर दिया है।
यूक्रेन की थर्ड आर्मी कॉर्प्स की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इस नए रोबोटिक फ्रंट की वजह से रूसी खेमे में भारी खलबली है। यूक्रेनी सैन्य कमांड का दावा है कि इन जमीनी रोबोट्स की मदद से उन्होंने अब तक 3,000 से अधिक रूसी सैनिकों को हताहत किया है। इसके अलावा, इस आक्रामक कार्रवाई के जरिए डोनबास (डोनेट्स्क) क्षेत्र के 5 प्रमुख गांवों और 3 बस्तियों समेत करीब 48 वर्ग मील (125 वर्ग किमी) इलाके को रूसी नियंत्रण से वापस मुक्त करा लिया गया है।
क्या है ‘ऑपरेशन विवाल्डी’ (Operation Vivaldi)?
इस बेहद गोपनीय और हाई-टेक सैन्य अभियान को ‘ऑपरेशन विवाल्डी’ नाम दिया गया है, जो बीते कुछ महीनों से फ्रंटलाइन पर बेहद गुपचुप तरीके से चलाया जा रहा था। इस मिशन ने दुनिया के रक्षा विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है क्योंकि इसमें पहली बार आसामं के ड्रोन और जमीन के रोबोट्स की अनोखी जुगलबंदी देखने को मिली है।
हवा से जमीन पर मार: समझिए कैसे काम करती है यह रणनीति?
यूक्रेनी सेना की टेक्निकल विंग (NC13 यूनिट) ने इस ऑपरेशन के लिए एक नई युद्ध नीति अपनाई है:
- नाइट ड्रॉपिंग (Night Dropping): यूक्रेनी सेना के बड़े ‘ग्रिफिन’ (Hryphon) हेवी बॉम्बर ड्रोन रात के अंधेरे में इन चार पहियों वाले सुसाइड रोबोट्स को अपने साथ बांधकर फ्रंटलाइन पार करते हैं।
- दुश्मन के इलाके में लैंडिंग: रूसी एयर डिफेंस और रडार को चकमा देते हुए ये ड्रोन अग्रिम मोर्चे से करीब 10 से 14 किलोमीटर गहरे रूसी नियंत्रण वाले इलाके में जाकर रोबोट्स को नीचे ड्रॉप कर देते हैं।
- साइलेंट अटैक: जमीन पर उतरने के बाद ये रिमोट-कंट्रोल्ड गाड़ियां रेंगते हुए रूसी बंकरों, खाइयों, नदी पार करने के ट्रांजिट पॉइंट्स और गोला-बारूद के ठिकानों तक पहुंचती हैं। रूसी सैनिक इन्हें यूक्रेनी पैदल सेना का हमला समझकर उलझते हैं, और तभी ये खुद को ब्लास्ट करके पूरे ठिकाने को तबाह कर देती हैं।
यूक्रेनी सेना के सेकेंड मैकेनाइज्ड बटालियन के कमांडर ‘डार्विन’ ने बताया:
“ये मशीनें कैमरों और सेंसर से लैस हैं, जिन्हें हमारे ऑपरेटर कोसों दूर बंकर में बैठकर सुरक्षित कंट्रोल करते हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि इन मशीनों के भीतर इंसानों जैसा कोई डर नहीं होता। अगर हम एक मशीन खो भी दें, तो हमें कोई गम नहीं होता क्योंकि इससे हमारे अपने सैनिकों की कीमती जान बच रही है।”
यूक्रेन का ‘आर्मी ऑफ रोबोट्स’ प्रोजेक्ट
इस प्रयोग की बड़ी सफलता के बाद अब यूक्रेन के डिजिटल परिवर्तन मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर ‘आर्मी ऑफ रोबोट्स’ प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने का फैसला किया है। इसके तहत जंग के मैदान में इंसानी सैनिकों के जोखिम को न्यूनतम करने के लिए ह्यूमनॉइड (इंसान जैसे दिखने वाले) रोबोट तैयार किए जा रहे हैं। ये मशीनें फ्रंटलाइन पर ऑटोमैटिक गन में मैगजीन लोड करने, बैटरी बदलने और माइन-स्वीपिंग (बारूदी सुरंगें हटाने) जैसे बेहद खतरनाक कामों को खुद अंजाम देंगी।
क्या कह रही है दुनिया?
युद्ध के इस रोबोटिक आदेश पर दुनिया भर के देशों की नजरें टिकी हैं:
- रूस और चीन: रूसी सेना भी फ्रंटलाइन पर सामान और रसद पहुंचाने के लिए ग्राउंड ट्रैकर्स का उपयोग बढ़ा रही है, जबकि चीन एआई-संचालित ऑटोनॉमस हथियारों पर लगातार निवेश कर रहा है।
- भारत की तैयारी: भारत में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) भी एआई और मानव रहित वाहनों (UGVs) पर तेजी से काम कर रहा है। दुर्गम और पहाड़ी इलाकों में टोह लेने तथा विस्फोटकों का पता लगाने के लिए भारत ने ‘एक्सप्लोडर’ (Exploder) जैसी स्वदेशी रोबोटिक तकनीक विकसित की है।
(अस्वीकरण: यह पूरी रिपोर्ट और नुकसान से जुड़े दावे यूक्रेनी सेना की थर्ड आर्मी कॉर्प्स के बयानों पर आधारित हैं। स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों या रूसी रक्षा मंत्रालय द्वारा इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि की जानी अभी बाकी है।)
