Thursday, October 8, 2026

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कैबिनेट का बड़ा फैसला: MSME सेक्टर के लिए ₹10,000 करोड़ का ‘SME ग्रोथ फंड’ मंजूर, छोटे उद्योगों को अब कर्ज नहीं, सीधा निवेश मिलेगा

देश के छोटे और मध्यम उद्योगों (MSMEs) को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने और उन्हें बड़े ब्रांड्स के रूप में स्थापित करने के लिए मोदी सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल (Union Cabinet) ने ₹10,000 करोड़ के ‘SME ग्रोथ फंड’ (SME Growth Fund) की स्थापना को आधिकारिक मंजूरी दे दी है।

यह फंड उन सक्षम छोटे उद्योगों के लिए गेम-चेंजर साबित होगा जो फंड की कमी के कारण अपने बिजनेस का विस्तार नहीं कर पा रहे थे।

बिना कर्ज के मिलेगी मोटी पूंजी (Direct Equity Investment)

इस सरकारी योजना की सबसे बड़ी और अनूठी खासियत यह है कि इसके तहत कंपनियों को पारंपरिक बैंक लोन की तरह भारी ब्याज पर कर्ज नहीं दिया जाएगा। इसके बजाय, सरकार योग्य और तेजी से बढ़ रहे उद्योगों में सीधा इक्विटी निवेश (Equity Capital) करेगी।

फायदा: छोटे व्यापारियों को कर्ज के दलदल में फंसे बिना अपने व्यापार को स्केल करने, नई मशीनें खरीदने और इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने के लिए ‘जोखिम पूंजी’ (Risk Capital) मिल सकेगी।

SME ग्रोथ फंड की 5 सबसे बड़ी बातें (Key Highlights):

  • फंड का ढांचा: यह पूरा फंड एक अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (AIF) और ‘फंड ऑफ फंड्स’ (Fund of Funds) की तरह काम करेगा, जिसे सेबी (SEBI) पंजीकृत प्रोफेशनल फंड प्रबंधकों द्वारा संचालित किया जाएगा।
  • मैन्युफैक्चरिंग पर मुख्य फोकस: इस फंड का एक बड़ा हिस्सा देश के उत्पादन (Manufacturing) सेक्टर को रफ्तार देने के लिए सुरक्षित रखा गया है।
  • टियर-2 और टियर-3 शहरों को फायदा: इसका मुख्य लक्ष्य बड़े महानगरों के बजाय देश के छोटे शहरों और औद्योगिक क्लस्टरों (Industrial Clusters) में चल रहे सक्षम उद्योगों तक वित्तीय मदद पहुंचाना है।
  • ग्लोबल चैंपियन बनाने का लक्ष्य: इस फंड के जरिए उन उद्योगों को चुना जाएगा जिनमें आने वाले समय में एक्सपोर्ट (निर्यात) बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारत का नाम चमकाने की क्षमता है।
  • बजट का वादा हुआ पूरा: इस फंड की शुरुआती घोषणा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा केंद्रीय बजट 2026-27 में की गई थी, जिसे अब कैबिनेट की मुहर के साथ अमलीजामा पहना दिया गया है।

क्यों पड़ी इस विशेष फंड की जरूरत?

आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, अब तक भारतीय बाजार में उपलब्ध अधिकांश प्राइवेट वेंचर कैपिटल (VC) या सरकारी लोन योजनाएं या तो बिल्कुल शुरुआती स्टेज के ‘स्टार्टअप्स’ पर ध्यान केंद्रित करती थीं या बहुत बड़े कॉर्पोरेट्स पर।

जो उद्योग ‘लघु’ से ‘मझोले’ स्तर (Small to Medium) पर पहुंच चुके थे, उनके विस्तार (Expansion) के लिए पूंजी का एक बड़ा गैप (Missing Middle Gap) था। सरकार का यह ₹10,000 करोड़ का फंड इसी अंतर को पाटने और देश में नए रोजगार पैदा करने का काम करेगा।

ताजा स्थिति: सरकारी सूत्रों के अनुसार, प्रेस इनफॉरमेशन ब्यूरो (PIB) और संबंधित मंत्रालयों द्वारा इस फंड का लाभ उठाने के लिए आवश्यक पात्रता (Eligibility) और आवेदन प्रक्रिया के विस्तृत दिशा-निर्देश (Guidelines) जल्द ही आधिकारिक वेबसाइट पर लाइव कर दिए जाएंगे।

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